00:00चंद्रमुखी, जो कभी अपनी खोबसूरती के लिए जानी जाती थी, अब इतनी बदसूरत हो गई थी, कि खुद को भी
00:07आइने में नहीं देख पा रही थी।
00:09चंद्रमुखी की हालत देखकर, उसकी मा की आँखों से आंसू बह निकले।
00:13जब उसकी विमारी वैद के पकड़ में नहीं आई तो उसकी माने तंत्रिकों का सहारा लिया, मगर कोई भी उसे
00:19ठीक नहीं कर पाया।
00:20तंत्र की क्रिया, काला जादू किया गया है तुम्हारी बेटी पर, मगर इसका तोड़ सिर्फ वही कर सकता है जिसने
00:27इसे किया है।
00:28ऊसके अलावा कोई तुम्हारी बेटी को ठीक नहीं कर सकता, ये इसी तरह तुड़ पेगी।
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