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  • 6 hours ago
भारत के विदेशी चंदा नियमन कानून (FCRA) में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अमेरिका की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इन संशोधनों पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे 'ईसाइयों पर सीधा हमला' करार दिया है, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह बिल इसी स्वरूप में पारित होता है, तो इसका गहरा असर भारत-US द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है.आखिर FCRA कानून में ऐसा क्या बदलने जा रहा है जिससे अमेरिका परेशान है? दरअसल, नए प्रस्ताव के तहत सरकार एक 'डेजिग्नेटेड अथॉरिटी' बनाएगी. यदि किसी NGO, चर्च या धार्मिक संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होता है. तो सरकार उस विदेशी फंड और उससे बनी संपत्ति का मैनेजमेंट अपने हाथ में ले सकेगी.

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00:01Bhaarit के एक प्रस्तावित कानून पर अमेरिकी सांसद ने आपत्ती जताई है और चेताव नीदी कि इसका असर भारत और
00:07अमेरिका के संबंधों पर पढ़ सकता है।
00:09विवाद है FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर।
00:12लेकिन पहले समझ ये FCRA आखिर है क्या?
00:15FCRA यानि Foreign Contribution Regulation Act आसान भाशा में कहें तो ये वो कानून है जिसके जरिये भारत में NGO,
00:23ट्रस्ट, सैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को विदेश से मिलने वाले चंदे और फंडिंग को नियंतरित करता है।
00:31अब इसी कानून में प्रस्तावित बदलावों पर अमेरिकी संसद राईली मूर ने गंभीर चिंता जदाई है।
01:06अमेरिकी संसद के इन आरोपों के बीच ये समझना जरूरी है कि प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक में आखिर प्रवधान क्या
01:14है।
01:15इस बिल में 2026 में सरकार को एक designated authority बनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
01:22अगर किसी संगठन का FCRA registration कैंसल हो जाता है, वो registration सेरिंडर करता है या उसका registration रिन्यू नहीं
01:31होता है तो authority उस संगठन के foreign contribution और उस विदेशी फंड से बनाई गई
01:37asset का management अपने हाथ में ले सकेगी। और यहाँ एक महत्वपोर्ण बात ये है कि अगर ऐसी कोई asset
01:45पूजास्थल है तो प्रस्तावित कानून में authority के लिए उसका धार्मिक स्वरूप बनाए रखना सुनिशित करने का प्रवधान भी है।
01:54ग्रह मंत्राले के मताबिक 2019-2022 के बेच 13,520 संगठनों को 55,741 करोड रुपए का विदेशी योगदान मिला।
02:06FCR मोल रूप से भारत में आने वाले विदेशी फंड से जुड़ा कानून है।
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