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  • 9 hours ago
कुदरत का कहर या इंसानी गलती? देखें तबाही वाली बाढ़ की 'कहानी'

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00:15मस्कार मैं उनेह बातन और आप देख रहे हैं कहानी 2.0
00:19हर साल मौन सुनाता है और उसके साथ ही आती है बाड की वही भयावा तस्वीरे
00:24कहीं पहार तूटते हैं कहीं नजियां शेहरों को निगल जाती हैं तो कहीं खंटों की बारिश पूरे व्यवस्था की पोल
00:32खुल देती है
00:32लेकिन क्या ये सिर्फ एक प्राकरते का आपदा है या इसके पीछे हमारी अपनी गलतिया है
00:37आखे क्यों हर साल भारत का कोई न कोई इसा पानी में डूब जाता है और क्या इस त्रास्दी का
00:43कोई स्थाई समर्धान है
00:44आज कहानी में इनी सवालों के जबाब तलाशेंगे और समझेंगे कि आखित हर साल क्यों डूब रहा है भारत
01:01जादा दिक्कत हो रहा है और आप देश सकते हैं पुरा सिप्षा का टाउन पानी ते दुख गिया है
01:11यह घर का घर बरबद अभी चिज़ा क्या देगा गवर्मेंट पार्च दर देगा उसे इनका घर का पुरा सामन आ
01:17जाएगा
01:21मुसलादार बारिष और तेज हुई और भारी बारिष
01:25और साल का प्रॉब्लिम है एक साल का प्रॉब्लम नहीं है
01:54तरकार कोई भी आजाए अगर वो जमीन पे काम नहीं करेगी तो यही हाल देहेंगे
02:10तो देने सिस्टम ठीक करना चाहिए बेसिलिए प्रब्लम वहीं से सब नालेव अगिर नेरो होगे पानी वहीं पेश्टक हो जाता
02:22बार सिर्फ पानी का बढ़ा हुआ जलसर नहीं ये वो ताकत है जो कुछ घंटों में पूरे शेहर की रफतार
02:30रोक देती है
02:31काओं का नक्षा बदल देती है और लाखों लोगों को बेघर कर देती है
02:34लेकिन सवाल यही है कि क्या हर बार इसकी वज़ा सिर्फ आसमान से बरसने वाला पानी है
02:40या फिर नदियों के बदलते स्वरूप जंगलों की कटाई बेतर्ती विकास भी एक पड़ी वज़ा है
03:04लगभग इस गाई के बदेए से बीच-ति-ति-ति-ति-तार लोग विपक्त हुए
03:10भी नहीं बाचाए है लोग
03:18तो घर पर है था पाने मतलब इतना ही स्पिट बढ़के आया है
03:24मतलब घर का आतमे को हम लग छोड़के दूसरे दूसरे का बचाना लगी है
03:37पर तिस गरों में पाने है और सब लोगों को निकाल दिया है खाय देकात कोई है उसको निकाल दो
03:46हम लोग कैसे सर्वाइब कर फिर से नॉर्मेल जिन्देगी कैसे लाएगा वही से हम लोग को ज्यादा जिस्क्रत है अभी
03:52तो जो हो गया वो हो गया
03:53पिता जिकार 17 साल हो गया यह पेहली बाग इसा महीं गया
04:00कि नाउंस्मेंट किया जा रहा है कि जो भी नीचले इलाके में है वहां से सुरक्षी चले जाए और जहां
04:06भी काम के बीना अगर कोई काम नहीं है तो गर से बहार ना निकले
04:16करीब साथ लग से उपर लोग बार से पभावित हुए है जिस जबकि कौनसास लोगों की मौत और खबरे सामने
04:25आ रही है
04:44यह सिर्फ पानी नहीं है यह वो सैलाब है जो कुछ खंदों में शेहरों को बेवस बना देता है
05:05यह वो बार है जो घरों को मलबे में बदल देती है
05:08खेतों को जील बना देती है और सिंदगी को राहत शिविरों तक सिमित कर देती है
05:19दूबी हुई सडकें दूबे हुए मकान दूबे हुए खेत दूबे हुए पाजार
05:42दूबे हुए सपने और उमीग के साहरे किसी छट पर बैठा हुआ पूरा का पूरा परिवार
05:50यह सिर्फ पानी नहीं यह हर साल लोट कराने वाली वो द्रास्ती है जो किसी का घर बहा ले जाती
05:56है
05:56किसी की जिंदगी और किसी की पूरी उम्र की कमाई
06:13अब यह तो नैचरली हो जाता है लेकिन फोड़ा बारीश में ही यह दिस्मेंटल हो गया कोलाप्स हो गया है
06:23तो यह नहीं हो नहीं हो नहीं हो लागातार परमपुद्रगर पानी बारीश हो रहा है इसलिए अभी पाच्छे दिन से
06:27बढ़ रहा है अब रहा है
06:29पानी बढ़ने से लिए हम लोग के यहाँ पर जो भू काटा उठू मने ज़्यादा होता है बहुत आखिरी हो
06:34गया है
06:36इस साल भी असम, कुझरा, केरल, उडिशा, महराश्ट और पुर्वोतर के कई राज्यों में एक ही तस्वीर नजर आ रही
06:43है
06:46चारो तरब पानी और उस पानी के बीच जिन्दगी बचाने की जद्दो जहद
06:58कही हेलिकॉप्टर आस्मान से उम्मीद बरसा रहे थे
07:05कही नावे एम्बुलेंस बन गई है
07:16कही स्कूल राहत शुविर बन गए
07:24और कही पूरा गाउन नक्षे से खाइब हो गया है
07:32क्या हर बार सिर्फ आस्मान जिम्मेदार होता है
07:36या धर्ती पर भी कहीं कोई घलती हो रही है
07:39सबसे ज्यादा दर्द इस बार भी असम ने छेला है
07:43ब्रमपुत्र जिसे जीवन देने वाली नदी कहा जाता है
07:46वही ब्रमपुत्र लाखों लोगों के लिए तबाही बन गई है
07:50लाखों परिवारों के सामने फिर वही सवाल खड़ा हो गया है
07:53कि अब जिन्दकी कहां से शुरू करे
08:02बेजमेंट के अंदर पानी भर जाता है हर साथ और बहुत नुक्सान होता है
08:06लोगों को जो भाड़े से रहते हैं उनका तो अब देखानी अताकों से रूलन जैसे आदल गादले है फनीचर है
08:12पूरा धेर लगाया हो था अभी साथ आठ दिन पहले और अभी वाफिस यह की पोजिशन है पूरा धेर लगने
08:18वाला है
08:18ऑब दुक्सान लोगों का इसमें 4-5 दिन लगता है पाणी रहता है और बच्चों को पड़ाई में भी तकलिफ
08:41पड़ती है वो स्कूल नहीं जा पा रहे
08:50लेकिन असंभ हर साल ही डूपता क्यूं है क्या ब्रह्म पुत्र में बढ़ती गाद इसकी वज़ा है क्या जंगलों की
09:01कटाई और नदियों के किनारों का बढ़ता अतिक्रमन बाड को और भी विक्राल बना रहा है
09:15और सिर्फ असंभी क्यों अब देश के बड़े बड़े शहर भी कुछ घंटों की बारिश में पानी पानी हो जाते
09:21हैं
09:22मुंबई, बेंगलूरू और हैदराबाद जैसा आधुनिक शहर तैरने लगता है
09:37अध्या प्रस्ट श्रारो महाँ hai
09:37I guarantee अध ρूथ हाना पिन अधा बारी शड़ी करता है उसकर बारी नहीं होता है
09:41माच पानी इन अभी हो गया है छो दिन से बेसी हो गया है, �Дश दिनों पानी हो गया है
09:47ऑस्जादा बारिशता बेखलए है कि प्रब्लम ने है
09:50सब भीक्ते भीक्ते कैसे कैसे कमर तक पानी के साथ जा रहे हैं, कोई भी ब्रोस्ता नहीं है
10:09पटना, गुआहाटी, चेन्नई, दिल्ली सूरत तक बारिश में डूप जाता है
10:13सवाल ये है कि क्या हमारी जिन्दकी छोटी हो गई है या हमारे शहर बहुत बढ़े हो गए है
10:24बार सिर्फ लोगों को नहीं डुगोती, हजारों करोड रुपे की अर्थ वियस्था भी अपने साथ बहा ले जाती है
10:32तो क्या हर मौनसून में यही कहानी दोहराई जाएगी
10:36या बार को समझने और उससे लड़ने का कोई रास्ता भी है
10:40आज कहानी में जाने ये आखिर क्यूं हर साल डूब रहा है भारत
10:44असम बार बार बार का सबसे बड़ा शिकार क्यों बनता है
10:48बाड से देश को हर साल कितना नुकसान होता है और क्या इस तराज़्दी को रोका जा सकता है
11:06असा हमें बाड का आना कोई नई बात नहीं है लेकर इस बार की तबाही ने पुराने कई रिकॉर्ड्स को
11:12तोड़ दिया है
11:12सवाल सिर्फ इतना कि ब्रह्मपुत्र हर साल उफान पर क्यों आती है सवाल ये भी कि आखिर ऐसी कौन सी
11:19वज़र है जो इस प्राकृतिक आपदा को हर साल और जादा पिनाशकारी बना रही है
11:24कैसकी वज़ा सिर्फ बारिश है या इसके पीछे आसम का भूगोल है ब्रह्मपुत्र में बढ़ती गाध है और हमारी तैयारियों
11:32की कमी भी जिम्मेतार है
11:55कि पितले क्वस हैर में नाग साल इसके पार टाहस प्रहा है
12:23कि तै
12:3619 जुलाई 2026 शाम के करीब 5 बजे असम के शिवसागर के इस इलाके में हर कोई अपने घर में
12:47बैठा था
12:47यह पूरा इलाका यहां पर सबसे उचाई पर है यहां कभी बार का पानी नहीं पहुँचा था
12:53लेकिन उस दिन बहस दो घंटे में पानी उनकी छाती तक पहुँच गया
12:57जान भचानी के लिए यहां की लोगों ने विस्तर पर पुर्सियां और तेबल रखी और पूरा परिवार रात भर उन्हीं
13:03कुर्सियों पर पैठा रहा
13:12यहां हर कोई कहता है जीवन में ऐसी बार तभी नहीं देखी यह सिर्फ कुछ परिवारों की कहानी नहीं है
13:18यह आज के असम की कहानी है
13:27अचाल फार कि यहां से तक नहीं निकल पाया बान यहीं से सामने में से ही उस को बहाके लेके
13:35गया
13:35तो मौल निकलते निकलते मेन पुड़ा पानी होगी अगे लोग मने निकलने नहीं सöker सब चला
13:53लेकिन सवाल है आकिर असम हर साल क्यों डूपता है इस सवाल का जवाब असम के भूकोल में शिपा है
13:59असम तीन तरब से पहाणों से घिरा है इसके बीच से ब्रह्म पुत्र नदी बहती है
14:05मौनसुर में नागलेंड अरणाचल प्रतेश और आसपास के पहाणों पर होने वाली भारी बारिश का पूरा पानी बहकर असम के
14:12मैदानों में उतराता है
14:13यही वज़ा है कि राजजी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ संभावित शेटर मारा जाता है
14:19इस बार भी 18 से 19 जुलाई को उपली इलाकों में सामाने से कई गुना ज्यादा बारिश हुई
14:25नतीचा यह हुआ कि कुछी घंटों में ब्रह्म पुत्र समेत कई नदियां खत्रे की निचान से उपर पहुँच गई
14:58जब पता चला है कि सबके घर में पानी है
15:01गुज गया है उसके बाद मतलब सब जान बचा के मतलब कुछ ले नहीं सके जान बचा के खार यहां
15:08से निकल गए
15:09पुड़ा पानी में तो घर बचा ही नहीं घर घर बोलने के लिए कुछ भी नहीं है अभी
15:29लेकिन सिर्फ एक वज़ा नहीं है असम में बरबादी की
15:33नक्षे के सरिये समझने की कोशिश करते हैं यह है ब्रमपुत्र नदी
15:37ब्रमपुत्र नदी हिमाले से निकलते समय सिर्फ पानी ही नहीं लाती बलकि पहाडों की मिट्टी और पत्थर भी अपने साथ
15:45बहा कर लाती है
15:45लेकिन जैसे ही यह असम के मैदानों में पहुचती है पूरी कहानी बदल जाती है यहां नदी की रफ्तार धीमी
15:52बढ़ जाती है और उसके साथ हाई मिट्टी नदी के तल में जमने लगती है हर साल यह मिट्टी थोड़ी
15:57थोड़ी बढ़ती रहती है और धीरे धीरे नदी क
16:00तक तल उचा होता जाता है इसका मतलब है कि नदी में पानी के बहने की जगर हर साल कम
16:06होती जाती है और फिर आता है मौन्सुम अड़नाचल प्रदेश भुटान और आसपास के पहाड़ों से आने वाली दर्जन और
16:13नदियां एक साथ ब्रंपुत्र में मिल जाती है देखते ही
16:17देखते नदी में पानी का बहाव कई गुना बढ़ जाता है ब्रंपुत्र इतना पानी संभाल नहीं पाती और अपने किनारे
16:23छोड़कर आसपास के लाकों में फैल जाती है यही वज़ा कि असम में बार सिर्फ भारी बारिश की कहानी नहीं
16:29बलकि उसके भुगोल ब्रंप�
16:47नदियों में से एक है हर साल ब्रंपुत्र का तल थोड़ा थोड़ा ऊचा होता जा रहा है और उसकी पानी
16:52समिर्टनी की शमता कम होती जाती है फिर थोड़ा ज्यादा पानी आते ही नदी अपने किनारे छोड़ देती है आकड़े
16:59भी यही कहानी बताते है उनीस सो बारे से �
17:021928 के बीच ब्रंपुत्र का फैलाव लगभग 3870 वर किलोमीटर था 2006 तक यही फैलाव बढ़कर करीब 6000 वर किलोमीटर
17:11हो गया कई जगा नदी की चौड़ाई 15 किलोमीटर तक बढ़ चुकी है
17:23लेकिन इस कहानी में एक और बड़ा मोडाया था पंदर अगस नीस सो पचास को
17:30असम में 8.6 तीवरता का भुकम पाया पहाड दरग गए भारी भूस खलन हुआ लाखोटन मिटी और चट्टाने ब्रंपुत्र
17:38म्यागिरी नदी का रास्ता बगल गया
17:41कई जगर नदी का तल दस क्लीट तक उपर उड़ गया इसके बाद ब्रंपुत्र ने हर साल अपना रास्ता बदलना
17:48शुरू कर दिया
17:52जहां पहले कभी बार नहीं आती थी वहां पानी पहुँचने लगा और जहां पहले बार आती थी वहां हालाद बदलने
17:58लगे
17:58इस साल भी शिवसागर, चराईदेव और दोरहट जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए जबकि यहां की लोग कहते हैं कि
18:06उनके भुजूर्गों ने भी ऐसी बार नहीं देखी थी
18:15प्रभावित हुँचने लोग के लिए जातना रहा सब भुगा गिया है हमरा गोरु सलोठु रहा सलोठु दूर्टु पहुचा है और
18:22बाद बगी चला गिए
18:23सामान तामान सब गहर सब खता है कुछ नहीं को अभी वीवर तरब रहता है और दिन को अधर रहता
18:31है रात को अभी दिन को अधर जाएगा रात को अधर जागा सोता है बहुत तकलिम में हम लोग को
18:37ऐसा प्लेट हमने भी देखा नहीं है बहुत साल बाद में लोग बुल रह
18:41कि वहा है और बहुत ही ज़्यादा मामारी हो रहा है और परिशानी हो रहा है लोगों को बाहर निकल
18:51नहीं पा रहे हैं बहुत दिक्कत हो रहा है
18:56अब तक असम में ब्रह्मपुत्र के किनारे लगभग 4,800 किलोमीटर लंबे तटबंध बनाए जा चुके हैं
19:03लेकिन बड़ी बाढ़ आते ही यही तटबंध तूर जाते हैं जलवायू परिवर्तन और जंगलों की कटाई की वज़ा से अब
19:09बारिश कई महीनों में नहीं बलकि कुछ दिनों में ही अत्यधिक मात्रा में हो जाती है
19:14दूसरी तरब जंगल कम होने से मिट्टी का कटाव बढ़ता है और ज्यादा गाद नदियों में पहुचती है इससे बाढ़
19:21और भी विक्राल होती चली जाती है
19:23कई विश्य शग्यों का कहना है कि असम की भौगवलिक परिस्तितियों को देखते हुए बाढ़ को पूरी तरह रोकना संभव
19:29नहीं है लेकिन इससे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है
19:39असम में 2016 में 10,000 करोड की बरबादी हुई और 64 लोगों की मौत हुई
19:452017 में 4,358,000 करोड और 160 लोगों की मौत हुई
19:512019 में 3,237 करोड और 101 लोगों की मौत हुई
19:552020 में 2,642 करोड और 150 लोगों की मौत हुई
20:012022 में 10,000 करोड और 189 लोगों की मौत हुई
20:05अगर हमसीं बात करें तो असम में हर साल बाड़ाती है
20:09और उसका कारण यह है कि ब्रंपत्र जो नदी है वो और वाकी नदियों से काफी हटके है
20:13इसका जो त्रटमंध हैं काफी चोड़े हैं उथली नदी है
20:17यह जानि गहराई कम है लेकिन इसकी चोड़ाई जादा है
20:35पढ़ता है जिसके कारण जो असम है पूरा बार्ड गरस हो जाता है तो इस वार जो असम में बार्ड
20:40आप देख रहे हैं वो पिछले 80 सालों में सबसे जादा बैयानक बार्ड आई कोई है
20:45हर साल बारिश होगी ब्रंपुत्र उफान पर आईगी और शायद असम के लिए किसी नए गाउं किसी नए शेहर में
20:53फिर बार से बरबादी होगी
20:59लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये नहीं है कि बान कब आईगी
21:02सवाल ये है कि क्या हर साल लाखों लोगों की जिन्दगी यूही पानी में डूपती रहेगी
21:08या फिर अब समय आ गया है ब्रह्म पुत्र से होने वाली बरबादी को रोकने का
21:21डूबी हुई सडकें, घंटो जाम में फसी गारियां करोडों की कॉलनियों के बीच नाव से पहुँचते बचावदर
21:27ये तस्वीर अब किसी एक शेहर की नहीं रही है
21:30बैंगलूरू हो, दिल्ली, मुंबाई, चेन्ने या फिर गुरुग्राम
21:33हर मौनसू में कोई ना कोई बड़ा शेहर पानी में डूब जाता है
21:37सवाल यही कि क्या इसकी वज़ा सिर्फ रिकॉर्ड बारिश है
21:40या फिर बेतर टीब शेहरी विकास और हमारी सरकारी तग्यारियों की कमी भी इन शेहरों को डूबो रही
21:48यह चार फिट लम्सम होगा पानी ठीक है
21:52कमुंदर में लहरे उठती है उस तरीके की लहरे जो है अरक पर देखने को मिल रहा है
21:59तमाम वो लोग हैं जो कि हर मौन सूमी बारिश में इस तरह के हरातों का सामना करने के लिए
22:05मजबूर है
22:08यहां से गोईनपुरी से यहां तक दस मेंड का रास्ता निया दो गंटे वह यहां जांब खड़े करें
22:12यह मुंबई है देश के आर्थिक राजधाने जिस शेहर को कभी रुकना नहीं आता था
22:36अब हर मौनसून में कुछ घंटों की बारिश इसे रोग देती है
22:45मीची नदी की सफाई के दावे हर साल होते हैं लेकिन बारिश आते ही सर के नदी बन जाती है
22:51लोकल ट्रेने रुख जाते हैं एरपोर्ट तक पानी पहुंच जाता है और करोणों का कारुबार घंटों के लिए ठप पड़
22:57जाता है
23:09से लगातार बारितोरा है और पानी निकलने का नाम ही ने ले रहा है
23:12और पब्लीक परस्वान है आने जाने का दिक्कत है बस भी तो दो पड़ी है खड़ी है चार दिन तिन
23:17दिन से पड़ी है
23:18समझे पर देख़् सकते कितना पानी बेरा है क्या कर दोशनर चल करनेर जाओ उर
23:39सब गाडीयां बंद हो रही हैं
23:56अब चलिए एहमदाबाद, स्मार्ट सिटी, रिवर फ्रेंट, चौड़ी सरके, लेकिन पारिशाते ही पूरा सिस्टम बह जाता है
24:10जिस शहर को आधुनिक विकास का मॉडल बताय जाता है
24:13उसी शहर में पैदल चलने के लिए सरके अंगायब हो जाती है
24:17अंदर पास तालाब बन जाते हैं और लोग गाडियों से नहीं, पानी में उतर कर घर पहुचते हैं
24:32ये है सूरत, कपड़ा और हीरा उद्यों का सबसे बड़ा शहर
24:35लेकिन यहां हर पारिश के साथ सबसे बड़ा सवाल यही उठता है
24:39कि तापती नदी का पानी पहले घरों में आएगा या शहर का ड्रेनेज पहले जवाब देगा
24:49कई कोलोनियों में घरों और सरक का फर्क मिट जाता है
24:59कहां नाली है, कहां सरक और कहां किसी का आंगन समझना मुश्किल हो जाता है
25:16कोई नहीं देखने आता है इटर
25:18सब सामान बिगड़ता है जो अपना जो पिरीज बगार जो भी होता है
25:25200 दुकान अंदर गरका हो चुकी है तो समझना के एक दुकान में किसी का एक क्रोड का मलता
25:47सूरत की ऐसी सिती हो जाती है कि बड़े बड़े मौल तक दूप जाते है
26:01अब गुरुग्राम देश का कॉर्पोरेट हब गगन चुमबी अबारतें करोणों की सोसाइटियां लेकिन बारिश के सामने सब बेवस
26:12कुछ देर की बारिश और एक्सप्रेस वे पार्किंग बन जाता है
26:19ओफिस पहुचने का रास्ता घंटों के इंतजार में बदल जाता है
26:22इतना नहीं ये देश के सबसे आधनिक शहरों में जेग है
27:07अब दिल्ली देश की राजधानी जहां संसद है राश्पती भवन है सुप्रीम कोट है
27:13लेकिन पारिश के बाद कई लाकों में हालात ऐसे हो जाते हैं कि सडक और नाला एक जैसे दिखने लगते
27:19है
27:23संगम बिहार से आनन बिहार तक और कनोट प्लेस से साउफ एक्स तर हर जगा वही कहानी
27:28पानी भरता है प्रैफिक थमता है और राजधानी के रफ़तार रुप जाती है
27:43देखिए सबसे बड़ी बात है सदर बजार में जगा जगा पानी भर चुका है
27:47चाहे वो अपना तेली वाड़ा हो कुतब रोड़ हो या में सदर बजार हो
27:52यहाँ पर यह समझ लो निकलना तक मुश्किल हो गया है
27:57गलियों में इतना बढ़ चुका है कई दुकानों के अंदर पानी आ चुका है उससे जो वेपारियों को काफी मुश्किल
28:03का सामना करना पड़ रहा है
28:05इतने पुराने हो चुके है जो अंगरेजों के जमाने के सिवर डले वे जब बहुत कम अबादी होती थी
28:10अब अबादी बहुत घेन हो चुकी है तो अब यह सारे सिवर सिस्टम को चेंज करने की चुरूत है
28:29यह हैं बेंगलूरू देश की आईटी राजधानी, कभी से जीलों का शहर कहा जाता था, आज जीले कम हो गई
28:38और पानी सलकों पर स्यादा दिखाई देता है
28:41आईटी पारकों में पानी, सोसाइटियों में पानी, बारिश रुख जाती है, लेकिन शहर घंटों तक पानी में डूबा रहता है
28:49अब हैदराबाद, तेजी से बढ़ता माहनगर, लेकिन यहाँ भी कुछ घंटों की तेज बारिश, पूरी विवस्था की परिक्षा लेती है
28:57जीलों और प्राकरतिक नालों पर बढ़ते अतिक्रमन का नतीजा अब हर मौनसुन में दिखाई देता है
29:07कई लाखे तापू बन जाते हैं और लोगों को घर लोटना भी मुश्किल हो जाता है
29:15शेहर अलग-अलग है लेकिन कहनी एक ही है
29:18कहीं नदियों के रास्ते बंद कर दिये गए, कहीं जीलों पर इमारते खड़ी कर दी गई, कहीं नालियां छोटी बढ़
29:24गई
29:24और कहीं शेहर इतने बड़े हो गए कि बारिश के लिए जगए ही नहीं बची
29:29सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बादल कितना बर्शा है
29:31सवाल यह है कि क्या हमारे शेहर बारिश के लिए तयार है
29:54असम में सभी जगे बाड़ की इस्तिती आ जाती है तो इस climate change का जो असर है वो इस
30:00तरह से देखा जा सकता है कि पहले जो बारिश हुआ करती थी तो तीन से चार दिन तक लगातार
30:09बारिश होती थी रिमजिम बारिश होती थी जिससे की पानी जमीन में फिर से चला जाता था रि
30:24पर हो जाती है जिससे की पानी को निकासी नहीं मिल पाती और जल्वराब हो जाता है
30:32जानकार कहते हैं कि शहरी बाड़ के लिए कई कारण हैं सिर्फ आसमान से बरस्ता पानी नहीं जमीन पर बीची
30:37लापरवाही की परत बरबादी की सबसे बड़ी वज़ा है
30:43पहला कारण अन्योजित शहरी करण जीलों पर मॉल, नालों पर बिल्डिंग, हर खाली जमीन पर कबजा
30:49दूसरा कारण पुराना ड्रेनिज सिस्टम, कई शहरों में अंग्रेजों की काल की नालियां आज भी इस्तेमाल में है
30:55तीसरा कारण कच्रा प्रबंधन का ठीक ना होना, प्लास्टिक और कूडे से नालिबन बारिश का पानी निकल नहीं पाता
31:02चोथा कारण जलवायू परिवर्तन, बारिश अब अचानक और ज्यादा हो रही
31:06पाच्वा कारण गाउं से पलायन, शेहरों पर जनसंख्या का बोज बढ़ता जा रहा है
31:11छठा कारण कंक्रीट का जंगल, शेहर का विकास तो हो रहा है
31:15लेकिन इसके साथ जमीन पर मिट्टी की जगह कंक्रीट और तारकोल ने ले ली है
31:20जिससे जमीन से मिट्टी गाइब हो गई है, तो पानी सोखेगा कहा से
31:51और जो गुरुघराम है वो भी किसी नदी के उपर बना हुआ है
31:54तो ये सारे जो हमने जो एक तरह से अनप्लान डेवलप्मेंट किया है
31:59ये भी इसकी एक बज़े है कि जो जल भराब है वो जादा देखने को मिलता है
32:06भारत के हर महानगर का यही हाल है
32:08तेज बारिश और शहर जलमगन जब शहरों में नालियां ढग दी जाएं
32:11नदियां सिकुड जाएं और हर खाली जमीन कंक्रीट से पढ़ जाए तो बारिश का पानी कहां जाएगा
32:182021 में महराश की कोलापूर और पालगर में जबरदस्ट बाढ़ाई
32:222022 में असन, बिहार और यूपी के कुछ जिलों में भहनकर बार आई
32:272023 में हिमाचल प्रदेश, पंजाद, तिल्ली, हर्याना में लाखों लोग बार से प्रभावित हुए
32:32चिर नई में तो रिकॉर्ड तोड बारिश ने कई दिनों तप शहर को ब्लॉक कर दिया है
32:372024 में शहर का वाइनाड और गुजराद के 23 शहर बार से बुरित्र प्रभावित था
32:422025 में फ्लैश फ्लैश प्लैट की वज़े से जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बड़ा नुकसान हुआ था
32:49बार को पुरित्र रोकना शायद संभबना हो
32:52लेकिन वज्यानी की ओजना, मजबूट रेनेस सिस्टम, समय पर जेतावनी, नदियों के प्राकरतिक दास्तों की रक्षा और बेहतर आपदा प्रभंदन
33:00से इस नुकसान को जरूर कम किया जा सकता है
33:03सवाल अब सिर्फ राहत का नहीं, तैयारी का है
33:06क्योंकि अगर तैयारी नहीं बदली, तो हर बारिश के साथ सिर्फ नदिया ही नहीं, विकास के दावे भी पहते रहेंगे
33:17हर साल बाड आती है, हजार लोग की जिन्दगी पट्री से उतर जाती है
33:22और राहत बचाफ का वही पुराना सलसला शुरू हो जाता है
33:26लेकिन सवाल यही कि क्या हम सिर्फ बाड के बाड राहत पहुंचाने तक ही सीमे थे
33:31या फिर उससे पहले की तयारी कर रहे है
33:33देश का कुल भॉबोलिक शेतर करीब 32.9 करोड हेक्टेर है
33:37इन में से 4 करोड हेक्टेर से जादा इलाका बाड संभावे शेतर माना जाता है
33:43बाड की वज़ा से 2023 में करीब 27,337 करोड रुपे का नुकसान हुआ था
34:20आस्मान से पानी परसता है लेकिन कई जगों पर ये पानी सिर्फ खेतों को नहीं सीचता है
34:26बल्कि पूरे शहर, पूरे काउं और लाखों जिन्दियों को दुबो देता है
34:31कहीं पहाड पूरते हैं, कहीं नदियां किनारे तोड़ देती हैं
34:35तो कहीं कुछी घंतों की पारिश पूरी रस्था को बेनगाप करनेती हैं
34:41राहत शुवीर भर जाते, सरके नदियां बन जाती हैं
34:45और लोगों की पूरी उम्र की कमाई देखते ही देखते पानी में बह जाती हैं
34:54अगर पिछले पांच साल के आँकणों पर नज़र डालें तो तस्वीर बेहट धराने वाली हैं
34:592020 में बार से 1,474 लोगों की मौत हुई और देख को 11,536 करोड का नुकसान हुआ
35:082021 में दबाही और बढ़ी 1371 लोगों की जान गई लेकिन आर्थिक नुकसान बढ़कर 58,437 करोड तक पहुँच गया
35:17पिछले पांच वर्षों में ये सबसे बड़ा नुकसान था
35:202022 में 1,673 लोगों की मौत हुई और नुकसान 27,337 करोड रुपे रहा
35:282023 में सबसे ज़्यादा 4,472 लोगों की जान गई
35:33हलाकि आर्थिक नुकसान 2,153 करोड रुपे दर्च किया गया
35:372024 में भी राहत नहीं मिली
35:401,549 लोगों की मौत करिब 4,474 पश्वों की मौत
35:46और 6,447 करोड रुपे से ज़्यादा का नुकसान दर्च किया गया
36:16जब ये पश्चिम से पूरफ से पश्चिम की तरफ आता है
36:20बंगाल की खाड़े से जब अंदर की तरफ आता है
36:22तो इसका जो असर है यो भरी-बारिश के रुप में दिखाई देता है
36:25बिशेशकर आपने देखा होगा कि ओडिसा में लगातार बारी बारिश हो रही थी
36:2936 गड़, बिधर्म, मद्य पर्देश उसके बाद गुजरात और राजस्थान में इसका असर होगा
36:41राश्टी तस्वीर देखने के बाद अब बात उन राज्यों की जहां बार सिर्फ एक मौस में आपदा नहीं
36:46बलकि हर साल लोटने वाली दरास्थी बन चुकी है अलग-अलग कारण, अलग-अलग हालाद, लेकिन नतीजा एक, जानमाल का
36:54भारी मुकसाद
36:57पिछले पांच वर्षों के आँक्रे बताते हैं कि किन राज्यों पर बार सबसे ज्यादा भारी पड़ी
37:11असम में 2022 में 205 लोगों की जान गई और करीब 2398 करोड रुपे का नुकसान हुआ
37:19बिहार में 2023 में 502 लोगों की मौत दर्ज की गई जो पिछले पांच वर्षों में राज्य का सबसे बड़ा
37:26अकड़ा रहा है
37:262024 में भी 327 करोड रुपे से ज्यादा का नुकसान हुआ
37:31पश्यम मंगाल में 2021 में बाड़ से 163 लोगों की मौत हुई और नुकसान 16,089 करोड रुपे से ज्यादा
37:39पहुच गया
37:40वही केरल में 2021 में 131 लोगों की जान गई और आर्थिक नुकसान 9,256 करोड रुपे दर्ज किया गया
37:48महराश्ट में 2022 की बाड़ ने 10,526 करोड रुपे से ज्यादा का नुकसान पहुचाया
37:55हिमाचल प्रदेश में 2023 में बादल फटने और भुस्कलन के बाद 1503 लोगों की मौत या लापता होने की मामले
38:03दर्ज हुए
38:03ये पिछले पांच वर्षों के सबसे गंभीर आपनों में शामिल है
38:07जो भारी बारिश हुई है बीच वीच पे और सास करके क्रेश्वेंट एरिया में जो बारिश हुई है
38:12अवणाचल प्रदेश में चाइना में जहां से ब्रहम कुत्र रधी आती है उसकी सायग नदिया है
38:17वो फान पर जमा आ जाती है तो असम में बार आम तो पर आ जाती है और नौर्थ इस्ट
38:22इंडिया में आपको मालू है कि बारिश अभी लगातार हो रही है और अच्छी बारिश हो रही है तो इसी
38:26लिए ये बार तीसलिदी बनी कोई है अब अगर हम यह देखें कि जो मालसूर
38:31है वो डेफिसेट है जब जोलाई खतम हुआ तो 13% के डेफिसेट का खतम हुआ रहा है लेकिन डिस्टिबुशन
38:38काफे अच्छा है उसके बाब जूद अपने देखा कि कुछ इलाके सुखे जैसे हाला जेल रहे है खासकर कि जो
38:43दक्षिन वारत वहां बारिश नहीं हो रही ह
38:46और गुजरात में मद्य परदेश, महाराष्टरा के कुछ इलाके और राइस्तान के कुछ इलाकों में मार जैसी इस्तिती बन गई
38:54थी तो उसका यही कारण है कि डिस्टिबुशन जो है वो फ्रसा स्क्यूड हो जाता है जब डिप्रेशन या डिप्रेशन
39:01एक ही दिशा में
39:02आगे बढ़ते हैं तो मद्य भारत और जो गुजरात और राइस्तार की दरब जाते हैं तो वहाँ पर इसका असर
39:07काफी ज़्यादा देखने को मिल जाते हैं
39:11या अकड़े सिर्फ मौत और नुकसान नहीं बताते हैं ये बताते हैं कि देख्ष का बड़ा हिस्सा हर साल एक
39:17जैसी आपदा से जूज रहा है
39:19बरबादी की वजहें अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन नतीजा हर जगह एक जैसा है
39:24विशेशक की मानते हैं कि अब सिर्फ राहत और मौावजे से काम नहीं चलेगा
39:28नदियों के प्राकृतिक बहाव को बचाना होगा
39:31फ्लड प्लेन पर अतिकर्मन रोकना होगा
39:34और समय रहते सठीक चेतावनी वियस्था को मजबूत करना होगा
39:38वरना हर मौनसून के साथ यही आकड़े बदलेंगे लेकिन तस्वीर नहीं
39:49फिलाल कहानी है मेरे साथ अभी के लिए बस इतना ही
39:51मुझे दीज़े अजासत अगले हफते फिर हाजर होंगे एक नई कहानी के साथ
39:54तब तक देश और दुनिया की तमाब खबरों के ले तिकते रहिए आज तक
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