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FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट का मुद्दा गरम है। केंद्र सरकार FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट में संशोधन की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद विदेशी चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि इससे सरकार को जरूरत से ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे। इस मामले पर अमेरिका तक में सवाल खड़े हुए। अमेरिका के एक सांसद ने इस बिल पर आपत्ति जताई थी। जिस पर अब भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर कहा है।

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00:35This is the case of America.
01:00विदेशी फंड के प्रवा को नियंत्रत करते हैं। बता दें कि अमेरिका के एक सांसद राइली एम मोरे ने अपने
01:07एक्स पोस्ट में कहा था भारत की संसद फोरन कंट्रिबिशन रेगुलेशन अमेंडमिन नियमों में बदलाफ करने पर विचार कर रही
01:15है। और धार्मिक च
01:29चिंता का विशह बन जाएगा। FCRA यानि Foreign Contribution Regulation Act भारत का वो कानून है जो विदेश से आने
01:37वाले चंदे या फंड को नियंत्रत करता है। अगर कोई NGO, ट्रस्ट, धार्मिक संस्था या सामाजिक संगठन विदेश से पैसा
01:46लेना चाहता है तो उसे FCRA की तहत पंजीकरन करा
01:50परता है। सरकार का कहना है कि ये कानून इसलिए बनाये गया ताकि विदेशी फंड का इस्तमाल देश की सुरक्षा
01:57और राष्ट हितों के खिलाफ ना हो।
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