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  • 29 minutes ago

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Transcript
00:01जै नागद्वार बाबा की! नागद्वारी पहुँच ही गए! अरे सांप!
00:06आराम से, आज तुम दर्शन करने आये हो!
00:08हाँ, और तुम?
00:10मैं तो ड्यूटी पर हूँ!
00:12ड्यूटी?
00:12हाँ, नागद्वारी मेले की सबसे पुरानी ड्यूटी!
00:16वो कैसी ड्यूटी?
00:30मतलब, तुम हर साल इतने लोगों से मिलते हो?
00:33हाँ, जैसे ही लोग कंधे पर बैग, हाथ में प्रशाद, और कपड़ों की गठरी लेकर आते दिखते हैं!
00:41समझ जाता हूँ!
00:42चलो, महमान आ गए!
00:44तो फिर तो तुम्हें मेला अच्छा लगता होगा?
00:46बहुत, लोगों की आस्था देखकर सच में अच्छा लगता है!
00:52बस, मेरी ड्यूटी का सबसे मुश्किल हिस्सा दर्शन के बाद शुरू होता है!
00:58मतलब, लोगों को ये समझाना कि जंगल दानपात्र नहीं है!
01:04पुराने कपड़े हो, प्लास्टिक हो, या कोई भी सामान, उसे जंगल में छोड़ना प्रकृती के लिए ठीक नहीं है!
01:12लेकिन कई लोग तो श्रद्धा से छोड़ते हैं!
01:15श्रद्धा मन में होती है! जंगल में छोड़े हुए कपड़ों या सामान में नहीं!
01:19अगर बाबा का आशिर्वाद लेकर लोट रहे हो, तो उनके बनाए इस जंगल का भी सम्मान करके जाओ!
01:26समझ गया! दर्शन के साथ ये भी मेरी जिम्मेदारी है! जो लेकर आया हूँ, उसे वापस भी लेकर जाओंगा!
01:34बस यही तो सुनना चाहता था, अब लगे सच्चे श्रद्धालू!
01:38नागदेव, आज समझ आया कि यह यात्रा सिर्फ दर्शन की नहीं, जिम्मेदारी की भी है!
01:45इस कठिन यात्रा को पूरा करने के साथ साथ, इस पवित्र देवस्थल की स्वच्छता का भी संकल्प लें!
01:52अपने पुराने कपड़े, प्लास्टिक और अन्य सामान जंगल में न छोड़ें, उन्हें अपने साथ वापस ले जाएं!
01:57यही सच्ची तीर्थ यात्रा है! मेरा आशीरवाद सदैव आपके साथ रहेगा!
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