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यह वीडियो 26.07.2026 को आयोजित "भगवद्गीता" सत्र से लिया गया है।

वीडियो जानकारी : 26.07.2026, श्रीमद्भगवद्गीता

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Transcript
00:00आप देवस्थल पर जाते हैं, तो परंपरा क्या अनुमती देती है कि वहीं पर लेट जाएं? देती है क्या? नहीं
00:08न? तो हमें फिर समझना होगा कि उसका एक मनोवैज्ञानिक कारण है. अब यही परंपरा कहती हो कि आप देवस्थल
00:15पर जाएं और जाती के आधार पर अल�
00:29जिवाज या रवायत नहीं है. इसमें एक सूचना है, इसमें एक सतरकता है. चपल भी क्या है? बहुत एक है
00:36और यह देह भी क्या है? आप तरक कर सकते हो कि जब मैं देह लेकर के भीतर जा रहा
00:40हूँ तो चपल लेकर काई नहीं भीतर जा सकता. चपल लेकर जा सकते हो भीतर
00:56से कोई समस्या है आप चपल नहीं आप जूतों का पूरा ट्रक ले करके चले जाएए सत्य पराहच नहीं आने
01:04की लेकिन आपने अपने आपको तैयार कर दिया आप थे किसी मधोशी में आप वहाँ पहुंचे आपने अपने जूते चपल
01:11उतारे आपने अपने आपको याद द
01:26वो चपल उतारें के नहीं उतारें उन पर ये सब बातें लागू नहीं होती पर हम पर ये बात लागू
01:33होती है तो बहुत आधुनिकिया लिबरल बनने के नाते परमपरा के उन सुत्रों को भी मत्त्याग दीजिएगा जो वास्तव में
01:44उपयोगी है हम यहां अंध विश्वा
01:47पास हटाने बैठे हैं अहंकार जमाने नहीं बैठे
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