00:01केंद्र सरकार FCRA यानि Foreign Contribution Regulation Act में संशोधन की तयारी कर रही है
00:08लेकिन इस प्रिस्तावित बिल को लेकर विपक्ष, चर्ज संगठनों और कई सामाजिक संस्थाओं ने सवाल उठाए हैं
00:15सरकार का कहना है कि इसका मकसद विदेशी चंदे के इस्तमाल में पारदर्शिता लाना है
00:21जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि इससे सरकार को जरूरत से जादा अधिकार मिल जाएंगे
00:27तो आखिर FCRA Bill क्या है, विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है, आइए इसे विस्तार में समझते हैं.
00:35FCRA यानि Foreign Contribution Regulation Act भारत का वो कानून है जो विदेश से आने वाले चंदे या फंड को
00:43नियंत्रित करता है.
00:44अगर कोई NGO, ट्रस्ट, धार्मिक संस्था या सामाजिक संगठन विदेश से पैसा लेना चाहता है, तो उसे FCRA के तहट
00:54पंजी करन कराना बढ़ता है.
00:55सरकार का कहना है कि ये कानून इसलिए बनाये गया ताकि विदेशी फंड का इस्तिमाल देश की सुरक्षा और रास्टिय
01:03हितों के खिलाफ न हो.
01:05अब सरकार इस कानून में कुछ बदलाव करना चाहती है.
01:08सबसे जादा विवाद सेक्षन 16A को लेकर है. प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी संस्था का FCRA लाइसेंस खत्म हो जाता
01:17है, रद्ध हो जाता है या उसका नवीनी करण नहीं होता, तो विदेशी फंड से खरीदी गई उसकी संपत्ती अयस्थाई
01:25रूप से सरकार द्वार
01:27सबसे तै किये गए प्राधिकरन की नियंतरन में चली जाएगी. अगर बाद में संस्था को दोबारा FCRA पंजिकरन मिल जाता
01:35है, तो उसकी संपत्ती वापस कर दी जाएगी. लेकिन अगर पंजिकरन नहीं मिलता, तो सरकार उस संपत्ती को किसी अनिस
01:42सरकाली संस्था या सं�
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