00:00कि शेर दाड़ता है हाथी चंगाडता है कुट्ता भोगता है बातन हाथी पात है और बातन हाथी लाग आपको उसके
00:09पैर के नीचे डाले जाने वाला दंड मिलता है भाषा के उपर तो हमें निश्वत्रूप से ध्यां गटना चाहिए देखें
00:15यह कहीं न कहीं हमारे मानना है
00:18कि इसको जिसे आप प्रोटेस्ट कह रहे हैं उसे मैं यह मान के चलता हूंको वो अपनी इच्छाओं को गयत
00:23कर रहा है क्योंकि हमारे ही तो यवा है हमारे संपर्ग में आने वाले यवा है और हमारे यवा अगर
00:29हमसे ही अपनी कोई बात नहीं कहेंगे कि हमारा भविश्च �
00:32जो है उसे आप किस तरीके से आप जिस तरीके से देखते हैं उस तरीके से हम भी कहीं न
00:38कहीं अपने भर्ष को ज्वल बनाना चाहरे हैं
00:40तो मैं इसको आंदोलन और क्रांती में अंतर होता है आंदोलन विशेगत होता है कुछ समय के लिए होता है
00:48जो कहीं न कहीं घर में रहने वाले बड़े लोगों को सजक करता है, उन्हें चोकनना करता है और उन्हें
00:53उनकी तरफ देखने के लिए विवश्च करता है, तो मेरा अपना ये मानना है कि युवा जो भी है, वो
01:00आपका ही हमारे भारत परश का युवा है, जितनी मुहपत हमको
01:17विवस्था को लेकर आपको और माता पिता जी के बीच में मतबेद होते हैं के नहीं होते हैं, तो क्या
01:22हम माता पिता जी आपको कारिच करने लगेंगे, कि ये क्या बात कर रहा है, मेरा अपना ये मानना है,
01:29कि ये तो एक ऐसी चीज हमारे ही हुआ है, उन्हीं के हाथ में तो
01:46के बीच में विचारिक मद्वेद हैं नहीं वैचारिक मद्वेद
01:50नहीं होता। कि पीडीयों की अपनी अपनी समझ होती है उस समझ के इंदर
01:54सामझस से स्थाप्थ करने के लिए जब जो थोड़ा बहुत कही चरहा हूँ हूद वहम मेल के
02:06बॉल दिया हमने तरिके से ब्यान दिया कि बद सुरत और परस्ट है कैसे देख रहे हैं उन्टेज बयान देखिए
02:16मेरा अपना यह मानना है कि शेर दाड़ता है
02:38बातों से हाथी की सवारी का आपको सम्मान मिलता है और बातों के कारण ही आपको उसके पैर के नीचे
02:47डाले जाने वाला दंड मिलता है
02:49हमारे शब्द ही हमारे सम्मान के प्रतीक होते हैं
02:52और हमारे शब्द ही हमारे अपमान के कारक होते हैं
02:56तो निश्चित रूप से भाषा के उपर तो हमें निश्चित रूप से ध्यान लटना चाहिए
03:00किसी भी साथ रही
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