00:00बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है
00:01इसका मतलब जानते हैं क्या होता है
00:06इसका मतलब होता है कि जुकना नहीं चाहिए
00:12वाही गुरु के लावा एक कहीं नहीं जुकेगा
00:20गुरु साब ने ये जो इंस्टिटूशन था
00:24वो शुरू भी किसलिए गया था पता है ना
00:30उने का तुम ये नहीं कर सकते कि गुरु के भी हो और डर के भी हो
00:35और सिखों की तादाद बड़ी कम थी
00:37और उस समय पर आकरांताओं का दिली से मुगलों का जुल्म बहुत ज्यादा था
00:42उने का मैं तुम्हें ऐसा कर दूँगा कि तुम छुपी नहीं सकते
00:45अब दूर से ही दिखाई पड़ोगे
00:48अब संघर्ष के अलावा तुम्हारे पास कोई मैंने तरीका ही नहीं छोड़ा
00:52अब तुम पीठ नहीं दिखा सकते
00:55बुजदिली अब तुम्हारे लिए संभावी नहीं रहेगी
00:57उतरो मैदान में लड़ो
00:58बात आ रही समझ में
01:00और यही समूचे अध्यात्म का संदेश है
01:06पीठ दिखाने को पैदा नहीं हुए हो
01:08सर जुकाने को पैदा नहीं हुए हो
01:10रेंगने को पैदा नहीं हुए हो
01:12यह रीड वैसे ही तनी रहे
01:15जैसे आकाश की ओर जाता हुआ तीर
01:18गगन की और निशाना यह रीढ जो है यह मेरुदंड यह सीधे ऐसा होना चाहिए कि आकाश को भेदेगा
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