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  • 2 weeks ago

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Transcript
00:00क्या सोच रहे हो पुद्र ?
00:01महादेव, आपको सावन इतना प्रिये क्यों है ?
00:06क्योंकि जब मैंने संसार की रंक्षा के लिए
00:09हलाहल विश अपने गंठ में धारन किया
00:12तब देवताओं ने जल से मेरा अविशेग किया
00:15तब ही से सावन का हर जलाविशेग केवल जल नहीं
00:20वह मेरे भक्तों की श्रध्धा का प्रतीक है
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