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  • 2 days ago
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतों और बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चिंता जताई है. रिजर्व में लगभग 200 बाघों की मौजूदगी के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों के स्वेच्छा से विस्थापन के बाद मिलने वाली भूमि पर नए 'ग्रासलैंड' विकसित किए जाने चाहिए. इससे शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ेगी और बाघों को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा, जिससे वे आबादी वाले क्षेत्रों का रुख नहीं करेंगे. फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय और वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे के अनुसार, इस संघर्ष को रोकने के लिए प्रशासन, जिला परिषद और स्थानीय पंचायतों के बीच बेहतर समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है.

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Transcript
00:03मद्धिवर्देश की बांधवगण टाइगर रिजर्व में कई बागों की मौतों की खबरों के बाद बाद और इंसानों के बीच टकराओ
00:09एक बढ़ती हुई चिंता का सबब बन गया है
00:13अंतराश्चिय बाग दिवस के मौके पर बुद्वार को अधिकारियों और वन्यजी विशेशग्यों ने टकराओ को बहतर ढंक से सम्हालने की
00:20जरूरत पर जोर दिया जोकि रिजर्व में बागों की आवादी लगातार बढ़ रही है
00:25उनका सुझाव है कि शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाने और बागों के लिए शिकार की उपलब्धता बहतर करने के लिए
00:33और ज़्यादा घास के मैदान विक्सित किये जाएं जिससे इनसानों और बागों के भी टकराओं को कम करने में मदद
00:39मिल सके
00:41विस्थापन के बाद से जब कोई ग्राम विस्थापी दो जाता है तो जो जमीन मुक्त हो करके मिलती है उसके
00:47हम लोग ग्रासलेंड डेवलप करते हैं
00:49अभी बांदोगर टाइगर इजर्प के खितौली वन पच्छेतर का गड़पूरी गाउं विस्थापन की प्रक्रिया में हैं और जैसे हमें वह
00:56भूमी प्राप्त होगी हम लोग उसको ग्रासलेंड में करेंगे
00:58साथ ही पतोर रेंज के दो गाउं बगया और बढ़वाही उसको भी हम लोगों ने गाउवालों से संपर्ग कर लिया
01:04है और विस्थापन की प्रक्रिया हम लोगों ने प्रारम की है अने गाउं में भी बात चल रही है ग्राम
01:09वासिव को हम लोग इस प्रकार से विस्थापन
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01:40in order to get the target
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