00:08अक्सर हमारे समाच में एक धार्णा बन चुकी है कि बड़े सपने सिर्फ बड़े स्कूलों और अमीर घरों की चकाचौन
00:15में ही पलते हैं।
00:17लोग सोचते हैं कि गरीब का बच्चा सिर्फ मजदूरी या छोटे मोटे कामों के लिए पैदा हुआ है।
00:47एक अभूतपूर मोहिम शुरू की है जिनका नाम है मौनिका मलूत्रा कंधारी।
01:40मौनिका ने अपने स्वर्गे पिता की याद में एक ऐसा एतिहासिक
01:44संकल्प लिया है जो आज देश के हजारों परिवारों की उम्मीद बन गया है।
01:49पिता को श्रधांजली देने के तो कई तरीके होते हैं लेकिन मौनिका ने वह रास्ता चुना जो सीधे देश के
01:56भविश्य को उजबल बनाता है यानि बच्चों के शिक्षा।
02:00इस महा अभियान के तहट देश के अलग-अलग सरकारी और जरूरत मंद स्कूलों के पूरे 25,000 बच्चों को
02:07मुप्त साइंस किट बाटी जा रही है।
02:10यह सिर्फ एक आकड़ा नहीं है बलकि 25,000 नए बग्यानिक तयार करने की नीव है।
02:16अब तक जो बच्चे सिर्फ किताबों में छपे बग्यान के चित्रों को रटते थें, अब वे खुद अपने हाथों से
02:22प्राक्टिकल करेंगे।
02:23साल हम लोगों ने साइंस किट्स बांटने की योजना बनाई है, 25,000 बच्चों को सेलेट किया है।
02:32और इसी सेलेक्शन का बेस यह है कि जो स्कूल नहीं इसको अवेल कर पाते हैं क्योंकि उनके पास रिसोर्स
02:41नहीं हैं।
02:42तो वो एक्वालिटी लाने के लिए कि उनको भी यह इस तरह से पढ़ने का, टीचर्स को इस तरह से
02:49पढ़ाने का यह माध्यम मिले।
02:52इसलिए ना वो पीछे रह जाएं कि उनके परस रिसोर्स नहीं हैं।
02:55और यह science kids जो हैं यह बच्चे की hands-on training पे बहुत ज़्यादा effective रहती हैं।
03:03जो चीज हम अपने हाथ से करते हों कभी नहीं।
03:05इस मुहीं का सबसे बड़ा संदेश यही है।
03:08गरीब का बच्चा कल का scientist।
03:10मॉनिका मलूत्रा कंधारी किया पहल रटने वाली रदी शिक्षपणाली पर एक कड़ा प्रहार है।
03:17यह प्रयास उन बच्चों के लिए है जो पैसों की तंगी के कारण कभी बड़ी लैप्स या महंगे स्कूलों का
03:23मुन नहीं देख पाते।
03:25आज जो बच्चा दिये या लाल्टेन की मध्धम रौशनी में इस किट के साथ पहला प्रयोग कर रहा है।
03:31कौन जानता है कि कल वही इस रो में बैठ कर देश के लिए नया इतिहास रच रहा हो।
03:36उस रच्टे को तै करने के लिए हम पब्लिशर सारे गवर्मेंट हम एक ही डिरेक्शन में अगर देखेंगे तो यह
03:43रस्ता जल्दी तै होगा।
03:45जितने हाथ होंगे उतनी जल्दी यह रस्ता तै होगा।
03:47तो मेरा मानना यह है कि जैसे अब हमने स्किल डेवलप्र में बहुत जोर दिया है।
03:53हमने आउटपूट को किस तरह देखना शुरू किये कि इंपलॉइबल बच्चे निकले।
03:58सब्जेक्स को भी इस तरह से हम लोगों ने वराइटी दी है कि बच्चा अपनी अपनी रुजान से सब्जेक्स को
04:03उठा सके।
04:05फिक्सेट नहीं है कि साइंस ट्रीम में गया तो आर्ट सा कोई सब्जेक्स नहीं ले सकता।
04:09इसके पास choices एक तो increase हो गए हैं।
04:18वर्म आपका लैंचेप हैं। इंडिया लैंचेप नहीं है। पूरा खुला पड़ा है।
04:24तो कई तरह की ऐसी opportunities हैं जो पेक्उलर हैं।
04:27I have to choose particular studies and particular subjects differently choose to do.