00:00पहले एक विवस्था चलती थी कि माबाप समझते थे कि शरीर से हमने जन दे दिया है पर हम ऐसे
00:05नहीं है कि हम एक चैतन्य वयस्क युवा इस्त्री या पुरुष खड़ा कर पाएं तो वो उसको ले जाकर के
00:14गुरू को दे आते थे घर से बहुत दूर और पचीस साल तक वो �
00:21थोड़ी वे नमरता देखाई देती है कि माबाप ये स्विकार तो करते थे कि हम नहीं इसको बड़ा कर पाएंगे
00:26तो अभी तो चलता है माबाप ही गुरू है भगवान है गुरू तो गुरू भगवान है दुनिया भर की मा
00:33की बाब की कुंठाएं इनको जिन्दगी में को
00:37कोई इने सुनने वाला नहीं तुले देकर के घर में एक नन्ही सी जान इनको मिलती है जाके उसके उपर
00:42चड़ जाते है कि किसी पर हमारा बस नहीं चलता पर ये जो ये जो चार साल का है इस
00:47पर तो बस चलता है न इसको दबा कर रखेंगे और फिर दभी जाता है वो दभी �
00:52आपको कोई एकदम ही दमित, कुंठित, विक्तित तो दिखाई दे तो उसको गौर से देखिएगा और पने आपसे पूछिएगा इसकी
01:03परवरिश कैसी हुई होगी और तब आप में आकरोश उठेगा ऐसे अभिभावकों के लिए जिने पालना नहीं आता पर पैदा
01:12जट से क
01:14कुछी है कि कितना बड़ा अपराध है परवरिश की क्षमता रखे बिना पैदा कर देना
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