00:00बहुत लोग आते हैं कहते हैं, नहीज साव हमारे तो घर की गाय हैं, हम डेरी से नी लेते हैं
00:03तम्हें एक दिन भी कई बान्थ के खड़ा कर दें, तुम्हारी क्या हालत होगी...'
00:14और वो भी कैसे खड़ा किया है, गले से रस्सा बान्थ के खड़ा किया है
00:18कोई लोहे की बानता है. कुछ लोग ज्यादा दाया लुह可能 होते हैं, वे लोहे की नहीं मानते हैं.
00:22आप अपने आपको वेजटेरियन क्यों बोल रहा है हो अगर आप दूथपीते हो. दूथ कौन से पेड़ पर उकता है?
00:30दूद कॉन सा वेजटेबल है कि अपने आपको वेजटेरियन बोल रहे हो
00:33इतनी कॉमन सेंस की बात है पर हमें नहीं दिखाई देते है
00:48कोई आप बिलकुल ले लो छोटा बच्चा वो ये सारे सवाल करेगा
00:51वो पूछेगा लेकिन हमारी संस्कृत और हमारी शिक्षा उसके सवालों का गला घोट देते हैं
00:58उसकी सोचने की ताकत खत्म हो जाती है
01:00वो बस एक सोखने वाली मशीन बन जाता है कि जो बता दिया गया हो सोख लो
01:03और जो किताब में लिखा उसको रट लो
01:05फिर हमारे सामने बड़े से बड़ा जल्म होता रहे हमें दिखाईगी नहीं देता कि जल्म हो रहा है
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