00:00फलानी बदन दिखाती घूमती है गंदे चरितर की है अच्छा तुमने कपड़ों से उसका चरितर भी निकाल लिया बहुत बड़ी
00:07है
00:07माए बेटियों को ऐसे जा रही है तू तेरा देख पीठ देख गई तेरी तो पीठी तो है सब के
00:13होती है आपके नहीं है
00:14कोई बिरली चीज मिली है मुझे पीठ पीठ में क्या होता है पीठ तो कुछ नहीं कदे के भी पीठ
00:18होती है
00:20महिलाओं पर तो जो इसका अनिष्टकारी असर पड़ा है तो पड़ाई है पुरुषों पर भी पड़ा है पूरा समाज ही
00:25बीमार हो गया है
00:26शरीर को इतना बड़ा बना लिया है कि हर आदमी हर समय बस शरीरी शरीर के बारे में सोच रहा
00:31है
00:31और विशेश कर महिला का शरीर पुरुष महिला के शरीर के बारे में सोची जा रहा है
00:36महिला अपने शरीर के बारे में सोची जा रही है
00:39तो लड़कियां ग्यान, कौशल, प्रतिभा, संगर, इस ज़्यादा महत्युक इसको देने लग जाती हैं फिर
00:45कि मैं सुन्दर दिखूँ, आकरशक दिखूँ, सेक्सी दिखूँ
00:48अगर आप एक महिला हैं, या आप एक अभिभावक हैं और आपके घर में बच्चा है चोटा, या आपकी बहन
00:56है, कोई है
00:56तो इतना करिए कि उनको उनकी देह ही मत बन जाने दीजिए, इतना उन पर एहसान कर दीजिएगा
01:03चोटे बच्चों में लड़के और लड़की कपड़ों में अंतर क्यों करते हो भाई, अभी तो दोनों का शरीरेक जैसे ही
01:07है न, आट-दस साल तक एगी जैसा रहता है, तो उनके कपड़ों में अंतर क्यों करते हो, एक से
01:11कपड़े पहनाओ, बच्ची अभी छोटी है, अ�
01:24को इंसान बनाओ नारी नहीं
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