00:00आप कह रहे हो वो घर से बाहर नहीं निकल सकती शाम को, ठीक है?
00:03आप कह रहे हो कि वो जो बाहर जाकर के काम करा करती हो बाहर जाकर करें इससे अच्छा है
00:09कि अभर की देवी बन कर रहे
00:10डेवी बनाने में आपको कोई समस्या नहीं है
00:12पर इंसान उसको मानने में आपको बड़ी समस्या है
00:15आप उसको ना दुनिया देखने दे रहे ना नभो लेने दे रहे
00:19ना कमाने दे रहे ना जीने दे रहे
00:20उसके बाद आप कहते हो कि अब तू गूंगी गुडिया बन जा और अब मैं तुझे संसद में आरक्षन कित्रू
00:25बेठा दूगा
00:26तो पब्लिकली अगर आप एक कठकुतली को कहीं खड़ा कर दो इसमें तो कोई प्रॉब्लम है नहीं है न
00:31वो जो उसका प्राइवेट स्फियर है वो जो उसका घर है वो जो उसका चुला चौका है और वो जो
00:37उसका शेहन का अच्छे बेड्रूम है वहां तो आप उसको हक देने को तैयार नहीं है आप मेरिटल रेप को
00:43अपराद भी मानने को तैयार नहीं है आप ये तक मानने को तैय
00:46वो भी एक legislation की ही बात है वो legislation आप लाने को तयार नहीं है प्राइवेट स्फियर में जब
00:53तक महिला दबी हुई है और वो अपने दमन को स्विकार कर रही है और वो घुटनों पर गिरी हुई
00:58है तब तक आपको कोई समस्या नहीं है पब्लिकली उसको किसी मंच पर मूर्ती की �
01:02तरह खड़ा कर दो और बोल दो वंदन कर दिया आमने उसका असली जो लिबरेशन होता है वो घर से
01:08शुरू होता है और वहां पर तो यही पूरी विवस्था और यही समाच एकदम लगा हुआ है महिलाओं को दबागर
01:15रखने अपने विक्तियत क्षेत्र में अगर वो स्वत
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