00:00ये मत बोलिए कि हमारी संस्कृति महिलाओं का अपमान करती है
00:03हमारी संस्कृति तो कहती है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है वहां देवताओं का वास होता है
00:07अच्छा तो फिर तो निश्यद रूप से भारतिये घरों में देवताओं का वास नहीं होता होगा
00:12यहां कौन सा महिलाओं का सम्मान हो रहा है
00:14जितना domestic violence, घरेलू हिंसा, भारत में उतनी कहीं और है
00:18यहां फिर कौन से देवता बस रहे होंगे घर में
00:20मुझे बताईए वेद और वेदान्त में वो संस्कृति कहा हैं
00:23जिसका आज आज आप पालन कर रहे हो
00:24क्यों इसको अपनी संस्कृति बोलते हो
00:25क्यों अपनी ही महिलाओं पर इतना अत्याचार करते हो
00:28और अत्याचार ऐसे ही नहीं होता कि उनको डंडा लेके मारा जाए
00:31तुम उन्हें जीवन की तमाम संभावनाओं से वंचित कर दो
00:36यह कोई छोटा अत्याचार है बोलो एकिन बस थोड़ी भहती शेश है
00:39अधिकांश्ता तो हमारे लिए महिला बस पाउं की जूती है
00:42भोग का साधन है भोगो उसको भोगो
00:45तो महिलाओं को अपमान से देखने की संस्कृति भारत की नहीं थी
00:50भारत पर आक्रमण करने वालों की थी
00:52जो महिलाओं को माल की तरह और जानवर की तरह देखते थी
00:55लेकिन हमने उनी की संस्कृति अपना ली
00:57हमने भी अपनी महिलाओं को एक नीची दृष्टी से देखना शुरू कर दिया
01:01बताईए आप इसको अपनी संस्कृति कहना चाहेंगे
01:04भारती ये संस्कृति कैसी थी ये जाकर के देखो न अपने पुराने ग्रंथों में
01:09वहाँ तुमको ऐसी ऐसी महिलाओं मिलेंगी कि अगर वो आज हो जाएं
01:12तो आप उनको जीने न दो आपको ये गंदी औरत है
01:15बहुत सम्मान था महिला के लिए ये रही है आपकी संस्कृति
01:19और आप इससे बहुत दूर आ चुके हैं
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