राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हालिया जांच से पता चला है कि भारत के खिलाफ काम कर रहे आतंकवादी संगठन अपनी भर्ती, कट्टरता और फंडिंग की गतिविधियों को तेजी से डिजिटल स्पेस में शिफ्ट कर रहे हैं. आतंकवादी संगठन सिक्योरिटी एजेंसियों से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN), गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं. जुलाई में देश भर में 20 जगहों पर एनआईए की कई रेड और हाल में हुई गिरफ्तारियों से पता चला है कि जांच करने वाले आतंकवाद का 'थ्री-ऐप मॉडल' बता रहे हैं. इस पैटर्न में पहले इंस्टाग्राम जैसे ओपन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कमजोर युवाओं से संपर्क किया जाता है, फिर उन्हें आइडिया सिखाने और ऑपरेशनल प्लानिंग के लिए टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लीकेशन पर भेजा जाता है, और आखिर में फंडिंग के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता है. जांच करने वालों ने पाया कि नए लोगों को धीरे-धीरे बंद टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़ा जाता था, जहां उन्हें शुरू में सोच से जुड़ी चीजें दिखाई जाती थीं, फिर उन्हें हिंसक कट्टरपंथी सामग्री दिया जाता था. जांच में यह भी पता चला है कि बाद में उन्हें नकली पहचान बनाने, हथियार खरीदने और कुछ मामलों में, विदेशी हैंडलर्स की देखरेख में टेरर ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान या अफगानिस्तान जाने के लिए कहा जाता था. एक सीनियर सुरक्षा अधिकारी ने बुधवार को ईटीवी भारत को बताया, "पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत के जवाब के बाद, बॉर्डर पार के आतंकी संगठनों ने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल करके युवाओं की भर्ती बढ़ा दी है. वीपीएन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनल और गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करके अपराधी अपनी पहचान छिपाने, अधिकार क्षेत्र की चुनौतियों का फायदा उठाने और ज्यादा पहुंच और कम पहचाने जाने के जोखिम के साथ कट्टरपंथी कंटेंट फैलाने में मदद करते हैं."
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