00:00पगला खोड़ा है बाइदल सरकार का, उसमें चार लोग बैठे हुए हैं, वहाँ लाश जल रही है एक रड़की की,
00:05चारों बैठ करके ताश खेल रहे हैं और शराप के रहे हैं, शम्शान का द्रिश्य है, जाड़े की रात है,
00:10बड़ी ठंडे कोरा हुँ रहा है और ही चार �
00:12बैठे हुए हैं और बस इंतदार कर रहे हैं, ये चिता बुझ जाए, तो अपने अपने घर जाए, फिर पूछना
00:17शुरू करते हैं, दूसरे को जानते नहीं जादा, पता जलता है कि सब की अपनी अपनी प्रेम कथाई थी, तो
00:23अपना अपना दर्द लिए वहाँ बैठे ह
00:26पिररा मेंते तीन अपनी अपनी कथा सोनाते हैं, तो ओझ जो चौथा है, वो उन पर बड़ी निर्मामता से हसा
00:32है, प्रेम्यम कुछ नहीं होता है, तुम पागल हो, अपना जो भी अपना किस्सा सोनाता है उसका मजाग उडाता है,
00:38अपते खेलता है, शराब पीता और कु�
00:53तुर बैटा हुआ था और बहार निकलती है बोलती है मुझे पता यह तुम क्या करना रहे ह। नहीं करना
00:58है।
00:58बुलता है तुम मरचुकी है तुम आपस जा। तुम एकनी जेब से ऐसे निकालता है।
01:02दर्शकों को सपश्ट हो जाता हूँ जहर है वो पीछे से चिता से चला रही है नहीं नहीं नहीं यह
01:06मत करना मत करना मत करना लिखक ने फुड़ी सी छूट दे रखी है कि अब देख लो क्या करना
01:12है जिन्दगी का क्योंकि यह दुख तो अब बंध गया जीवन मतलब ऐसा द�
01:27टुबी और नौट टुबी तुख इतना है इतना है इसके साथ जीएं भी कि न जीएं पर कामू इसका उत्तर
01:35देते हैं बोलते हैं जीना तो ऐसे ही पड़ेगा बस अपनी हालत पर हसके जीओ
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