00:00दस साल पहले मेरे संयोग से मेरी एक लड़के से मित्रता हो गई थी और हम अच्छे मित्र थे कुछ
00:06ऐसी घटना हुई कि मडर के इलजाम में बोच जेल चला गया और मैं सालों तक उससे जेल में मिलने
00:12जाती रही एक महीने पहले ही उसको उम्र कैद हो गई अब मैं खुद को �
00:16बहुत असमंजस में पाती हो समझ नहीं आता कि मैं उससे मिलने जाती रहूं मिलने जाने में क्या समस्या हो
00:23गई ये प्रशन क्यों है इतना बड़ा मैं स्टक हो गई हूँ किस अर्थ में स्टक हो गई हूँ यह
00:28पहले उम्मीद थी कि हो सकता है कि कुछ सही फैसला हो जाए�
00:37आप कई सालों से इस उमीद में थी कि शाद चूट जाए ठीक है नहीं चूटेगा अभी बहुत साल तक
00:42जेल में रहना है तो इसी बात का थोड़ा सा अंदर से दुख रहता है यह यह था कि अगर
00:48चूट जाएगा तो विवाह वगरा हो जाएगा और अब लग रहा है कि अ�
00:55कुछ नहीं था यह तो नहीं है कि उमीद यह थी कि वो मेरे लिए कुछ कर सकता है और
01:00अब वो कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि वो जेल में है नहीं ऐसी कोई उमीद नहीं है तो अपने दस
01:06दिन में से अपने एक दो खंटे देने में क्या जाता है दे दो अब आपकी समस्य
01:10यह हो रही है कि समाज
01:12जो चार-पांश तरीके के रिष्टे बताता है
01:14इस्तरी और पुरुष के बीच में
01:16आप उन में से कोई भी रिष्टा आप नहीं रख सकते हो
01:18तो आपको लग रहा है जब वो चार-पांश तरीके
01:20के नहीं हो सकते तो फिर कुछ
01:22रखो ही मत
01:40ना ग्रहस्थी जमेगी ना घर जमेगा
01:42ना वो कुछ भी होगा जो आम रिष्टों में होता है
01:45तो मन कहता जब वो सब होई नहीं सकता
01:48तो रिष्टा रखने के क्या मतलब है
01:49रिष्टा ही तोड़ दो
01:51प्रश्नी है कि वो सब होना जरूरी है
01:53यह आपको किसने बताया था
01:54समाज नहीं तो बताया था ना
01:56समाज
01:58रिष्टों की अंगिनत संभावनाओं को हटा करके
02:01आपको दो या चार प्रोटोटाइप दे देता है
02:03बड़ा सुन्दर लगा था मुझे
02:05गुलदार है कभी उनकी पंक्तिया
02:07कि प्यार को प्यार ही रहने दो
02:09कोई नाम न दो
02:10हाथ से छूक के इसे रिष्टों का इलजाम न दो
02:15क्यों उस रिष्टे को कोई नाम देना है
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