00:00मैं हूँ कौन में जिन्दा क्यों हूँ और मुझे आगे करना क्या है और उसे कोई जवाब नहीं मिलते अपने
00:04इन सवालों के
00:06जिसे कि मैं भीरादून में हूँ यहां के जो स्टुडेंट्स बिसिकली यूनिवर्स्टी की से बड़ी बड़ी पढ़ने आते हैं जिनके
00:12इंदर बहुत टैलेंट भी होता है लेकिन वो यहां आके बदलब नशा वगेरा में डूब जाते हैं
00:18खोश जब बुरा लगता है तो आदमी को नशा करना ही पड़ेगा अच्छा आपके साथ हुआ होगा कभी तनाव जब
00:26बहुत बढ़ जाता है तो आप कहते हो ना कि चलो सोने चले जाए जाए तो क्यों क्योंकि हमारी जिंदगी
00:35गड़बड है अब एक जवान आदमी है आ�
00:48और उस उर्जा का समय का जिंदगी का करना क्या है तो घबराता है उसे तनाव होता है उसे समझ
00:55में नहीं आता मैं हूं कौन मैं जिंदा क्यों हूं और मुझे आगे करना क्या है मैं अभी भी जो
00:59कर रहा हूं मैं क्यों कर रहा हूं और उसे कोई जवाब नहीं मिलते अपने �
01:03इन सवालों के, ये सवाल जो है उसको खोश में खाने लग जाते हैं, तब वो किसी तरह के नशे
01:09की और भागता है, जादा तर लोग नहीं करते हैं शराब वोयरा का नशा, जादा तर लोग दूसरे तरह का
01:14नशा कर लेते हैं, कि फोन खुमा दिया और दो घंटे किसी से बात क
01:16ये भी नशा है, या जब भूख नहीं लगी है तब भी खा रहे हो, ये भी नशा है, ये
01:23सारे नशे सिर्फ इसलिए हैं, क्योंकि ये जो जवानी हैं, उसे सही दिशा नहीं मिल रही है, उसे सही दिशा
01:31दे दो जिसमें वो अपनी उर्जा लगा सके, उसे किसी नशे की कोई
01:34ज़रूरत नहीं पड़ेगी
01:39इसी लिए
01:40स्कूलों में, कॉलेजों में
01:42education of the self होनी चाहिए
01:44कितने ही कॉलेजों शिगायत करते हैं
01:47कि हमारे कैमपस पर
01:48ड्रग मेनेस है, ड्रग अब्यूज है
01:50ड्रग की समस्या है, क्या करें, क्या करें
01:52उसका समधान करिकुलम में है
01:55इतनी चीज़े पढ़ाते हो
01:56मैं कौन हूँ, ये भी पढ़ाने लग जाओ
01:59कैमपस पर नशे की समस्या कम हो जाएगी
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