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भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। आज हम आपको उसी रथयात्रा से जुड़ी एक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं। आज भी रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ अपने एक भक्त की समाधि के सामने जरूर रुकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का क्या है रहस्य
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00:05भगवान जगन्नात की रथ्यात्रा को लेकर भगतों का उत्साह देखते ही बनता है
00:11आज हम आपको उसी रथ्यात्रा से जुड़े एक रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं
00:17भगवान जगन्नात का रथ आज भी अपने एक भगत की समाधी के सामने रुख जाता है
00:23आईए जानते हैं इसके पीछे का क्या रहस्य है उड़ीसा के पूरी में भगवान जगनात की रथ यात्रा का उत्साहद
00:38देखते ही बनता है
00:39सुला जुलाई वा खास दिन है जब भगवान जगनात अपने भाई बलभद्र बहन्सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर नगर
00:48भ्रमण के लिए निकले
00:49भगवान जगनात की महिमा से जुड़ी अनेक कथाएं और लोक मानिताएं आज भी श्रद्धालों के बीच जीवन्त हैं इन्ही में
00:58से सबसे प्रसिद्ध खत्धा भगत सालवेक की है
01:05या कहानी किवल भक्ती की शक्ती का वणन नहीं बलकि यहाँ भी बताती है कि भगवान की सच्ची श्रद्धा ही
01:12सबसे बड़ा परिचे है
01:14उडिसा के पुरी में वार्सिक रथ्यात्रा के दौरान भगवान जगनात का रथ भक्त सालवेक की समाधी के सामने कुछ समय
01:23के लिए रुखता है
01:26क्यों समाधी के सामने रुखता है भगवान का रथ
01:29लोकमानिता के अनुसार एक बार भगवान जगनात की भवरत्यात्रा श्री मंदिर से गुणिचा मंदिर की ओर बढ़ रही थी
01:38चारो ओर जगनात का जएगोश हो रहा था और हजारो स्रद्धालू रत को खीच रहे थे
01:45तबी कुछ दूरी तय करने के बाद रत अचानक एक जगे पर आकर ठहर गया
01:51रत को आगे बढ़ाने के लिए श्रद्धालू ने काफी प्रयास किया लेकिन सभी कोशिसें असफल रही
01:57किसी को कुछ भी समझ नहीं आया
02:00लोग इसे भगवान का संकेत समझ रहे थे
02:03इस बीच एक वरद्ध व्यक्ति भीड के बीच पहुचा
02:07और उसने सभी का ध्यान वहाँ सामने इस्थित सालबेक की समाधिकी ओर दिलाया
02:13इसके बाद रधालू ने भगवान जगनात के जैगोश के साथ भक्त सालबेक का भी जैगोश किया
02:21कहा जाता है कि जैजगनात के साथ जैसे ही जैभक्त सालबेक का जैगोश हुआ वैसे ही रुका हुआ रध दो
02:30बारा चल पड़ा
02:31इस घटना के बाद यहमानिता और मजबूत हुई कि भगवान अपने प्रिभक्त के सम्मान में उसकी समाधि स्थल पर अवस्थे
02:39ठहरते हैं
02:42कौन थे भक्त सालबेक
02:44लोग कथाओं के अनुसार सालबेक का जीवन मुगलकाल से चुड़ा है
02:48उनके पिता मुसलिम और माता हिंडू थी
02:51एक युद्ध में घैल होने के बाद उनकी माता ने उन्हें भगवान जगनात की सरंड लेने की सलाह दी
02:58माता से भगवान की महिमा सुन कर उनके मन में प्रभू की श्रधा जागी
03:03वे पूरी पहुचें लेकिन उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मल सका
03:07इसके बाद उन्होंने मंदिर के बाहर रहकर भगवान जगनात का निरंतर इस्मरण और भजन किया
03:13धीरे धीरे उनकी भक्ती इतनी प्रगार हो गई कि वे भगवान जगनात के महान भगतों में गिने जाने लगें
03:20कहते हैं कि जीवन के अंतिम समय में सालबेक की एक ही इच्छा थी कि वह भगवान जगनात के दर्शन
03:27करें
03:28शद्धालों के बीच प्रतिलित कथाओं के अनुसार भगवान ने उन्हें आस्वाशन दिया कि भविश में उनकी रत्यात्रा भक्त सालबेक के
03:36स्थान पर रुके बिना आगे नहीं बढ़ेगी
03:39इसी विश्वास के कारण आज भी पूरी में रत्यात्रा के दौरान भक्त सालबेक की समाधी के सामने रत के ठहरने
03:48की परंपरा है
04:12पर बीज़ विश्वास के बात्रा भक्त सालबेक की समाने रत्यात्रा भक्त सालबेक के सालबेक के सालबेगी
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