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  • 3 months ago
बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 20 साल बाद एक बार फिर कोलकाता लौटेंगी. आगामी एक अगस्त को वो कोलकाता में एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी. कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता स्थित रवींद्र ऑडिटोरियम में रखा गया है. कार्यक्रम का आयोजन सेक्युलर मिशन, पश्चिमबंगेर जोन्नो और ह्यूमन राइट्स बियॉन्ड फ्रंटियर्स नाम की तीन संस्थाओं ने मिलकर किया है. उस कार्यक्रम में सीएम सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.  बांग्लादेश में जन्मी तस्लीमा नसरीन ने बांग्ला भाषा में 40 से ज्यादा किताबें लिखीं. 1993 में प्रकाशित उपन्यास लज्जा ने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई, लेकिन इसी पुस्तक की वजह से उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. 1994 के बाद से वह भारत, यूरोप और अमेरिका में जिंदगी बिताती रहीं. साल 2004 में भारत ने उन्हें एक अस्थायी रेजिडेंस परमिट जारी किया था और वह कोलकाता में रहने लगीं.  2006 में कोलकाता के एक ईमान ने उन्हें धमकी दी. इमाम ने कहा कि जो कोई भी तस्लीमा नसरीन का चेहरा काला करेगा, वह उसे बड़ा इनाम देंगे. फिर, 2007 में उनके खिलाफ कोलकाता के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैल गई थी. उस समय पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी. स्थिति संभालने के लिए सरकार को सेना की मदद लेनी पड़ी थी. इसके बाद नसरीन ने कोलकाता छोड़ दिया. मार्च 2008 में देश छोड़ने से पहले वह नई दिल्ली में रहती थीं.  तस्लीमा नसरीन की पुस्तक "द्विखंडितो" को पश्चिम बंगाल सरकार ने 2003 में मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में बैन कर दिया था. हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने इस बैन को गैरकानूनी बता दिया.  2011 में बंगाल में लेफ्ट का शासन खत्म हुआ, जिसके बाद ममता बनर्जी सत्ता में आईं, लेकिन तस्लीमा के लिए कोलकाता आने का रास्ता नहीं खुला. अब जब 2026 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आई तो वो कोलकाता आ रही हैं. इसे कट्टरपंथ के खिलाफ सरकार के सख्त संदेश से जोड़कर देखा रहा है. हालांकि तस्लीमा के दौरे को लेकर कई लोग बीजेपी सरकार पर हमलावर हैं.  

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00:11अगामी एक अगस्त को वो कोलकता में एक साहितिक कारीकरम में हिस्सा लेंगी
00:16कार्यकरम का आयोजन कोलकता इस्थित रविंद्र ओडिटोरियम में रखा गया है
00:21कार्यकरम का आयोजन सेकुलर मिशन पस्चिम बांगेर जोनू और Human Rights Beyond Frontier नाम की तीन संस्थाओं ने मिलकर किया
00:30उस कार्यकरम में CM सुवेंदू अधिकारी भी मौजूद रहेंगे
01:04बांगलादेश में जन्मी तस्लीमा नस्रीन ने बांगला भाशा में 40 से ज्यादा किताबे लिंखी
01:101993 में प्रकाशित उपन्यास लज्या ने उन्हें अंतराष्ट्रिय ख्याती दिलाई लेकिन इसी पुस्तक की वजह से उन्हें बांगलादेश छोड़ना परा
01:211994 के बाद वह भारत, यूरोप और अमेरिका में जिन्दगी बिताती रही
01:262004 में भारत ने उन्हें एक अस्थाई रेजिडेंस परमीट जारी किया था और वह कोलकता में रहने लगी
01:33साल 2006 में कोलकता के एक इमाम ने उन्हें धम की दी
01:38इमाम ने कहा कि जो कोई भी तसलीमा नसरीन का चेहरा काला करेगा उसे बड़ा इनाम देंगे
01:45फिर 2007 में उनके खिलाप कोलकता के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए
01:51प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैल गई थी
01:54उस समय पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी
01:57इस्थिति को संभालने के लिए सरकार को सेना की मदद लेनी पड़ी थी
02:01इसके बाद तसलीमा नसरीन ने कोलकता छोड़ दिया
02:06मार्च दोहजार आठ में देश छोड़ने से पहले वह दिल्ली में रहती थी
02:11तसलीमा नसरीन की किताब दुई खंडितों को पश्चिम बंगाल सरकार ने
02:162003 में मुसलिम समदाय की भावनाओं को ठेस पहुचाने के आरोप में बेन कर दिया था
02:22हालाकि बाद में कोट ने इस बेन को गैर कानूनी बता दिया
02:262011 में बंगाल में लेट का शाषन खत्म हुआ जिसके बाद ममता बेनरजी सत्ता में आई
02:33लेकिन तसलीमा के लिए कोलकता आने का रास्ता नहीं खुला
02:37अब जब 2026 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई तो वो कलकता आ रही हैं
02:45हालाकि तसलीमा के दौरे को लेकर कई लोग बीजेपी सरकार पर हमलावर हैं
02:50कि तसलीमा रस्त्रीन जो आएगा आके क्या बोलेगा
03:132007 के बाद तसलीमा बार बार कोलकता आने की कोशिश करती रही
03:18लेकिन वो लेप्ट और टीमसी की सियासत में फसकर आहत होती रही
03:23अब जब उन्हें कोलकता आने का मौका मिला है तो वो इससे खुश है
03:28बिरो रिपोर्ट ETV भारत

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