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  • 1 week ago

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Transcript
00:00एक दिन हजरत इब्राहीम अपने बेटे हजरत इस्माईल अलईसलाम के घर तश्रीफ लाए। दर्वाजे पर दस्तत दी तो एक खातून
00:09बाहर आई। आपने नर्मी से पुछा इस्माईल कहा है। उसने कुछ बेजारी से जवाब दिया। वो शिकार पर गए है।
00:15हजरत इ�
00:27कुछ है न सुकून है। हर तरफ तंगी ही तंगी है। हजरत इब्राहीम अलईसलाम खामोशी से सुनते रहे। ना कोई
00:35नाराजी जाहिर की ना कोई बहस की। बस उठे और जाते हुए फरमाया। जब इसमाईल आएं तो मेरा सलाम कहना।
00:44और कहना कि अपने घर का दर्वा�
00:50बस आए तो उनकी बीवी ने सारी बात सुना दी। ये सुनते ही वो समझ गए कि ये आम जुमला
00:56नहीं बलके एक गहरा इशारा है। वो जान गए कि उनके वालिद को उस औरत का अंदाज और रवया पसंद
01:04नहीं आया। चुनाचे उन्होंने फौरण फैसला किया और उसे �
01:08तलाख दे दी। कुछ वक्त गुजरा जिन्दगी ने नया रुख लिया। फिर एक दिन हजरत इबराहीम अलई सलाम दोबारा उसी
01:15घर आये। इस बार दर्वाजा खुला तो एक दूसरी खातून सामने थी। उनके चेहरे पर सुकून था। लहजे में अदब।
01:24आपने प
01:38और गोश्ट पेश किया। उसकी हर बात में शुकर गुजरी थी। हर लवज में कनात और रजा जलक रही थी।
01:45हजरत इबराहीम अलई सलाम ये सब देखकर खुश हो गए। उनके दिल को सुकून मिला। उन्होंने इस खातून के लिए
01:52दूआ की और जाते हुए फरमाया।
02:08तो बीवी ने सारी बात बताई ये सुनकर उनके चेरे पर मुस्कुराहट आ गई। उन्होंने कहा ये मेरे वालित थे
02:15और तुम ही वो दर्वाजा हो जिसे उन्होंने पसंद फरमाया है। ये वाक्या बजाहर सादा है मगर इसमें एक गहरा
02:23सबक चुपा है। घर की असल ख
02:38जबके नाशुकरी आहस्ता आहस्ता खुशियों को खत्म कर देती है। असल में घर का दर्वाजा लकरी या लोहे का नहीं
02:45होता बलके वो दिल और अखलाक होता है जो उस घर को जन्नत या आजमाईश बना देता है।
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