00:00इस तरह से मेरे पेरेंस ने मुझे बड़ा किया, वो ये कहा कि फिल्में नहीं देखनी है, गाने नहीं सुनना
00:06है, काफी स्ट्रिक्ट हमारे घर में महाल था, अभी मेरी बेटी वे तो मैंने ये सुचा कि मैं उसको ऐसे
00:11नहीं करूँगी, मैं उसको फुल फ्रीडम दोँगी.
00:15ये बात सही है आपकी, आज से 35 साल पहले ऐसा बहुत घरों में होता था, सब घरों में नहीं,
00:20बहुत होता था, हवाई कुछ ऐसी थी, कि अच्छे मावाब वो होते हैं, जो बच्चों को डाट डबटके रखते हैं,
00:27तो घर में महमान आये नहीं कि बच्चे तुरंत एकदम
00:43लेना, गाने आने भी सुनने हैं, तो इधर उधर चुप खोपके सुनने हैं, दो चार नहीं, तो घरों में ये
00:49समने ही बजेगा, तो एक वो महाल था, उसमें एक अतिन नहित थी, तो इन दोनों ही अतियों से बचिये,
00:57कि अंधा दुन्द उसको दबाई हुए हैं, दबाई
01:13उधारवाद है, कि हमने तो सहाब बच्चों को टोटल फ्रीडम दे रखी है, हम तो बड़े प्रगतिशी, उधारवादी, लिबरल, प्रोग्रेसिव
01:20मावाप है, आपका ये उधारवाद बच्चे को बरबाद कर देगा, और वो छोटू है, उसो कुछ पता नहीं, तो मु
01:43पूरी जान लगागे, पूरी फ्रीडम से खेलो, नहीं तो अफार होगे, फ्रीडम बहुत प्यारी चीज है, लेकिन मुफ्त चीज नहीं
01:51है, अर्जित करनी पड़ती है,
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