00:00दिल्ली तग्गा मामले में R.O.P. उमर खालिद महीनों से जेल में बंद है
00:03खालिद को गैर कानूनि गतिविधी रोक्ठाम कानून U.A.P.A. के तहट आरोपी बनाया गया था
00:08और लम्बे समय से जेल में बंद उमर खालिद को जबानत भी नहीं मिल रही है
00:12उस पर कई सारे सवाल उठाय जा रहे थे
00:14कि अभारत में यूए पीए जैसे गंभीर मामलों में
00:17सालों तक जेल में रहना ही सबसे बड़ी सजा बनता जा रहा है
00:20आखिर क्यों कई आरोपी वर्षों तक ट्रायल पूरा होने का इंतजार करते रहते हैं
00:24लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिलती जुसके बाद
00:26CGI Justice सूर्यकांत ने इन तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी
00:31नमस्कार मेरा नाम हरिचा पराशर और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:41गैर कानूनी गतिविधियां रोख थाम अधिनियम
00:44यानि UAPA के तहट दर्ज मामलों में लंबे समय तक सुनवाई और जमानत को लेकर एक बार फिर बहस देज
00:50हो गई
00:50खासकर दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद समय तक कई विचार आधीन कैदियों के लंबे समय से
00:57जेल में रहने को लेकर लगतार सवाल उठते रहे हैं इसे बीच भारत के प्रधार नियाधीश जस्टिस सुर्यकांत ने ऐसे
01:03मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर चुनता जताई है
01:06उन्होंने कहा कि इस समस्या का सबसे प्रभावी समधान मामलों का शिग्र निपचारा है
01:12एक कारिक्रेम के दोरान अपनी बात रखते हुए CGI ने किसी विशेश व्यक्ति या मामले का नाम लिये भीना कहा
01:18कि नियाई पालिका को ये सुनिश्यत करना होगा कि गंभीर मामलों की सुनवाई अनवश्यक रूप से वर्चों तक लंबित ना
01:25रहे
01:25जरसल यूए पिये के तहट दर्ज मामलों में जमानत के प्रावधान सामाने अपराधिक मामलों की तुल्ला में काफी सख्त है
01:32ऐसे में कई आरोपी लंबे समय तक वुचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहते हैं जबकि मुकदमे की सुनवाई
01:38जारी रहती है
01:39CGI सूरेकान ने बताया कि न्याईक प्रक्रिया के माध्हम से केंद्र सरकार को सुझाव दिया गया है
01:44कि UAPA, धन शोधन निवारन अधिनियम यानि की PMLA और NDPS कानून जैसे मामलों के सुनवाई के लिए विशेश अदालते
01:52स्थापित की जाएं
01:53उन्हेंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमती भी जताई है और इन विशेश अदालतों की स्थापना की
01:59प्रक्रिया शुरू हो चुकी है
02:01प्रधान नियाधिश के मताबिक यदि इन अदालतों के जरिये ऐसे मामलों का निप्चारा एक वर्ष के भीतर या फिर जितना
02:07जल्दी संभव हो सके किया जाता है तो लंबे समय तक विचाराधिन कैद और जमानत से जुड़े अधिकांश विवाद स्था
02:15समाप्त हो जाए
02:21सुप्रिम कोट, हाई कोट और निचली अदालतों में लाखों मुकदमे वर्षों से लंबीद हैं इसका असर केवल यूए पीए जैसे
02:28मामलों पर नहीं बलकि आम नागरी को को नियाय मिलने के प्रत्रिया पर भी पड़ता है कानूनी विशशग्यों का भी
02:34मानना है कि गंभ
03:15पर नियायाले जमानत और सुनवाई से जुड़े पैसले लेते हैं।
03:19इस विशव से जुड़े हर अपडेट के लिए हमारे साथ देखते रहिए वन इंडिया है।
Comments