00:00अजैरिकिए आप ऑंकार लोट-लोट के आएगा
00:18क्या होते है थिक्षी कोई मंजिल नहीं होती बार-बार बंधनों को काटना
00:27काटते ही चलना जीवन भर, ये मुक्ति की यात्रा है, हाँ, मुक्ति की यात्रा, कोई आप मुक्ति बोलना चाहो तो
00:33कोई बात नहीं, लेकिन मुक्ति ऐसा नहीं होता कि आप enlightened हो, मने आप कहीं पहुच गए, enlightened हो गए,
00:38आप हो न, जब तक ये शरीर खड़ा है, तब तक कोई �
00:41आखरी मुक्ति नहीं हो सकती, जब तक ये शरीर खड़ा है, कोई आखरी मुक्ष मुक्ति निर्वान कुछ नहीं होता, हाँ,
00:48इमानदारी की जिंदगी हो सकती है, प्रेम की जिंदगी हो सकती है, बंधनों को पहचानो, उन्हें काटो, आगे बढ़ो, आगे
00:54बढ़ो कि त�
01:08यात्रा काई नाम मुक्ति है, एनलाइटनमेंट को कोई बिंदू, पढ़ाव, दिवस, घटना, इवेंट मत समझ लेना, कि इस दिन इस
01:17जगह पर एनलाइटनमेंट हो गया, यह सब बेकार की बात नहीं, यह सब कुछ नहीं होता है, ठीक है, यात्रा
01:21में लगे रहो, यात्रा �
01:23मुलादी दो हुआ, शसी में मज़ा आए, भाजी, जटने और दूसलो इस दूसरे है, परन भिजूवजर लगे को सवरी खाव
01:28गात्यूनी इस एनलाइटनमेंट हो गया, और फिमस्थ्याओनमेंटक।
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