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यह वीडियो 16 जून 2026 को आयोजित "वेदांत संहिता" सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00हाथ दे रहे थे
00:03क्यों दे रहे थे हाथ?
00:04हाथ देने के लिए?
00:06तुम गलत जगों पर हाथ क्यों देते हो?
00:11आचार्य जी, कोई वैक्ती या मजला दुख में हो
00:13और दया के खातीर हाथ दू हाथ पकड़ने के लिए तो
00:16और पकड़ दी या
00:21शायरी मत करो
00:24थोड़ा सा अग्दम शायरी पतान लगे मैं हाथ दे रहा था उसने मेरा दुपट्टा पकड़ लिया
00:33यह कमपैशन है और मैं को और यह बिचारे का गलत होगे ज़र आई दर पिचे ज़र
00:40भवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राजकुमर और कुछ नहीं है
00:47सानुभूती चाहिए हाथ दे रहे थे क्यों दे रहे थे हाथ हाथ देने के लिए हाथ यूद देरने के लिए
01:00तुम गलत जगों पर हाथ क्यों देते हो
01:04बांथ कर रखो ऐसे हाथ को
01:08माफी, करुणा, संवेधना, सहानुभूती ये बड़ी-बड़ी बातें
01:13अक्कुल मिला के मामला कितना है? भाई को हाथ देना था वो
01:19अब देवदास बनना है
01:22करुणा का अर्थ है, दुखी को दिखा देना कि उसका दुख जूटा है
01:28हर दुख में कहानी होती है, ऐसा हुआ, फिर ऐसा हुआ, फिर ऐसा हुआ
01:32वो कहानी कभी भी सच्ची होती है क्या?
01:34अभी जिधर को हाथ बढ़ा रहे थे, अगर उधर से सवाल करूँ कि क्या था, तो हो सकता है, पता
01:38चले कि हाथ तो था पर हाथ में खंजर था
01:42तुम उसको करुणा की जगह दया या सहानुभूती दोगे
01:47हिम्मत रख यार, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा
01:50तुम उसको यही तो बता रहे हो कि तेरा दुख सच्चा है और दुख अगर सच्चा है तो दुख क्यों
01:55छूटे
01:56दुख तो एक ही दशा में छूटेगा कि तुम दिखा दो उसको कि तेरा दुख ही जूटा है
02:02लग रही है तो मामला वेटते गाते, भाई गुजरा है
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