Skip to playerSkip to main content
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान उन्होंने जकार्ता की संसद में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो का उल्लेख किया। आखिर पीएम मोदी ने नेहरू का जिक्र क्यों किया? भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों का इतिहास कितना पुराना है? रामायण, महाभारत, बांदुंग सम्मेलन, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और आज के रणनीतिक संबंधों तक की पूरी कहानी इस वीडियो में जानिए।

Prime Minister Narendra Modi, during his visit to Indonesia, recalled India's first Prime Minister Jawaharlal Nehru while addressing the Indonesian Parliament. But why did PM Modi mention Nehru? What is the history behind India-Indonesia relations? From the Ramayana and Mahabharata to the Bandung Conference, the Non-Aligned Movement, and today's strategic partnership, this video explains the complete story.

#PMModi #NarendraModi #Indonesia #IndiaIndonesia #JawaharlalNehru #BandungConference #Sukarno #PrabowoSubianto #India #Jakarta #ASEAN #ForeignPolicy #Diplomacy #ModiSpeech #WorldNews

~ED.106~HT.178~GR.122~VG.HM~

Category

🗞
News
Transcript
00:02प्रधानमंत्री नरेंत्र मोदी इन दिनों इंडोनेशिया के दौरे पर हैं।
00:30यही बात अब चर्चा का विशय बनी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने नहरु का
00:36नाम क्यों लिया। दोनों नेताओं का ऐसा क्या योगदान था जिसने भारत और इंडोनेशिया के रिष्टों को नई दिशा दी।
00:43और आखिर क्यों दोनों �
00:56साल पुराने इतिहास में मिलती है। इंडोनेशिया में आज भी भारतिय संस्कृती की गहरी छाप देखने को मिलती है। वहां
01:04रामायन और महभारत की कहानिया सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं बलकिन रित्य नाटक और लोग कलाओं का एहम हिस्सा
01:11है। जावद वीप म
01:25और ब्रामही लिपी का प्रभाव भी वहां की संस्कृती और भाषा में साफ दिखाई देता है। यहां तक कि इंडोनेशिया
01:32नाम भी इंडस यानि भारत और नेसोस यानि द्वीप शब्दों से मिलकर बना माना जाता है। यही वज़ा है कि
01:38प्रधान मंत्री मोधी ने अ�
01:53भारत ने खुल कर उसका समर्थन किया। ततकालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नहरू ने अंतराष्ट्रिय मंचों पर इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की
02:01आवाज बुलंद की। इतना ही नहीं उन्होंने डच विमानों को भारतिय हवाईक शेत्र के इस्तिमाल की अनुमती
02:07नहीं दी ताकि इंडोनेशिया पर दबाव न बनाया जा सके। इसी दौर में एक बेहत सहसिक मिशन भी हुआ। नहरू
02:13के अनुरोद पर बीजू पटनायक ने अपनी जान जोखिम में डाल कर इंडोनेशिया के नेताहों सुतन शहरीर और मुहम्मद हट्टा
02:20को सुरक्षित
02:21बाहर निकाला। ये मिशन आज भी दोनों देशों की दोस्ती का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। भारत के इस
02:27सहयोग को इंडोनेशिया कभी नहीं भूला। यही वज़ा थी कि 1950 में भारत के पहले गंतंत्र दिवस समाहरों में राष्ट्रपती
02:35सुकर्णों मुख्य �
02:36इसके बाद 1951 में दोनों देशों के बीच मैत्री संधी पर हस्ताक्षर हुए और दोनों देशों ने साथ मिलकर एशिया
02:43और आफ्रिका के नव स्वतंत्र देशों की आवाज बुलंद करनी शुरू की। साल 1955 में इंडोनेशिया के शहर बांदुंग में
02:51एक एतिहासिक सम्म
02:52इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नहरू और राष्ट्रपती सुकर्णों ने मिलकर दुन्या को ये संदेश दिया कि नए स्वतंत्र देशों
03:01को किसी महाशक्ती के दबाव में नहीं बलकि अपने राष्ट्रिये हितों के अनुसार फैसले लेने चाहिए। यही �
03:19इंडोनेशिया ने भारत का खुल कर समर्थन नहीं किया। इसके बाद 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भी इंडोनेशिया पाकिस्तान
03:26के करीब दिखाई दिया। उस समय दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया और जकार्ता में भारतिये दूतावास पर
03:45
03:45हाला कि शीत युद्ध की राजनीती के कारण रिष्टों में पहले जैसी गर्म जोशी वापस आने में समय लगा।
04:15समुद्री सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य शिक्षा और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
04:45पुरानी दोस्ती को नई उचाईयों तक ले जाना चाहते हैं।
04:49हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत से लेकर आधुनिक रणनीतिक साझेदारी तक दोनों देशों का रिष्टा आज भी उतना ही मजबूत
04:57है जितना आजादी के शिरुवाती दिनों में था।
04:59अब देखना दिल्चस्प होगा कि आने वाले वर्षों में भारत और इंडोनेशिया की ये साझेदारी इंडो-पैसिफिक शेत्र और वैश्विक
05:06राजनीती में कितनी बड़ी भूमे का निभाती है।
05:11वन इंडिया को सब्सक्राइब करें और कोई भी अपटेट विज्जन करें। अभी वन इंडिया एप डाउनलोड करें।
Comments

Recommended