00:02प्रधानमंत्री नरेंत्र मोदी इन दिनों इंडोनेशिया के दौरे पर हैं।
00:30यही बात अब चर्चा का विशय बनी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी ने नहरु का
00:36नाम क्यों लिया। दोनों नेताओं का ऐसा क्या योगदान था जिसने भारत और इंडोनेशिया के रिष्टों को नई दिशा दी।
00:43और आखिर क्यों दोनों �
00:56साल पुराने इतिहास में मिलती है। इंडोनेशिया में आज भी भारतिय संस्कृती की गहरी छाप देखने को मिलती है। वहां
01:04रामायन और महभारत की कहानिया सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं बलकिन रित्य नाटक और लोग कलाओं का एहम हिस्सा
01:11है। जावद वीप म
01:25और ब्रामही लिपी का प्रभाव भी वहां की संस्कृती और भाषा में साफ दिखाई देता है। यहां तक कि इंडोनेशिया
01:32नाम भी इंडस यानि भारत और नेसोस यानि द्वीप शब्दों से मिलकर बना माना जाता है। यही वज़ा है कि
01:38प्रधान मंत्री मोधी ने अ�
01:53भारत ने खुल कर उसका समर्थन किया। ततकालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नहरू ने अंतराष्ट्रिय मंचों पर इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की
02:01आवाज बुलंद की। इतना ही नहीं उन्होंने डच विमानों को भारतिय हवाईक शेत्र के इस्तिमाल की अनुमती
02:07नहीं दी ताकि इंडोनेशिया पर दबाव न बनाया जा सके। इसी दौर में एक बेहत सहसिक मिशन भी हुआ। नहरू
02:13के अनुरोद पर बीजू पटनायक ने अपनी जान जोखिम में डाल कर इंडोनेशिया के नेताहों सुतन शहरीर और मुहम्मद हट्टा
02:20को सुरक्षित
02:21बाहर निकाला। ये मिशन आज भी दोनों देशों की दोस्ती का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। भारत के इस
02:27सहयोग को इंडोनेशिया कभी नहीं भूला। यही वज़ा थी कि 1950 में भारत के पहले गंतंत्र दिवस समाहरों में राष्ट्रपती
02:35सुकर्णों मुख्य �
02:36इसके बाद 1951 में दोनों देशों के बीच मैत्री संधी पर हस्ताक्षर हुए और दोनों देशों ने साथ मिलकर एशिया
02:43और आफ्रिका के नव स्वतंत्र देशों की आवाज बुलंद करनी शुरू की। साल 1955 में इंडोनेशिया के शहर बांदुंग में
02:51एक एतिहासिक सम्म
02:52इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नहरू और राष्ट्रपती सुकर्णों ने मिलकर दुन्या को ये संदेश दिया कि नए स्वतंत्र देशों
03:01को किसी महाशक्ती के दबाव में नहीं बलकि अपने राष्ट्रिये हितों के अनुसार फैसले लेने चाहिए। यही �
03:19इंडोनेशिया ने भारत का खुल कर समर्थन नहीं किया। इसके बाद 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भी इंडोनेशिया पाकिस्तान
03:26के करीब दिखाई दिया। उस समय दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया और जकार्ता में भारतिये दूतावास पर
03:45ह
03:45हाला कि शीत युद्ध की राजनीती के कारण रिष्टों में पहले जैसी गर्म जोशी वापस आने में समय लगा।
04:15समुद्री सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य शिक्षा और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
04:45पुरानी दोस्ती को नई उचाईयों तक ले जाना चाहते हैं।
04:49हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत से लेकर आधुनिक रणनीतिक साझेदारी तक दोनों देशों का रिष्टा आज भी उतना ही मजबूत
04:57है जितना आजादी के शिरुवाती दिनों में था।
04:59अब देखना दिल्चस्प होगा कि आने वाले वर्षों में भारत और इंडोनेशिया की ये साझेदारी इंडो-पैसिफिक शेत्र और वैश्विक
05:06राजनीती में कितनी बड़ी भूमे का निभाती है।
05:11वन इंडिया को सब्सक्राइब करें और कोई भी अपटेट विज्जन करें। अभी वन इंडिया एप डाउनलोड करें।
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