00:00धर्म, आस्था, विश्वास
00:02जब ये शब्ध हमारे सामने आते हैं
00:04तो हमारा सरसमान से जुग जाता है
00:06लेकिन क्या हो जब धर्म की इसी आड में
00:09एक ऐसा भयानक शड़े अंतर रचा जाए
00:11जो बड़े-बड़े संतों की साख को
00:13मिट्टी में मिलाने की साजश हो
00:15एक ऐसा खेल जिसमें साम दाम डंड भेत
00:19सब कुछ जोग दिया गया
00:20नमस्कार, मैं हो जस्वी कौशिक
00:22प्रयागराच के माग मेले में
00:25संगम किनारे गूंचते मंतरों के बीच
00:28एक ऐसी कहानी लिखी जा रही थी
00:30जिसकी सचाई जानकर आपकी रूख आप जाएगी
00:32तो मासूम बटू, कोरे कागच, जूटी एफाईया
00:36और धरम के नाम पर एक बड़ा खेल
00:38हमारी इस रिपोर्ट के अनुसारा आजम
00:40आपके सामने खोलने जा रही है
00:42महीनों लंबी चली इस घहरी
00:44इन्वेस्टिगेशन की वो पड़ते
00:46जो खूफिया कैमरे पर बे नकाब ही है
00:48आखिर कैसे एक धरम गुरू ने
00:50दूसरे बड़े धरम गुरू को
00:52फसाने के लिए मासूम बच्चों को मौरा बना दिया
00:55चले साज़श के हर एक चाप्टर को
00:57गहराई से समझते हैं
00:58इस पूरी कहानी के सूत्रधार है
01:00शाखंबरी पीठा दीश्वर आशुतोष ब्रह्माचारी
01:04आरोप है कि उन्होंने शंक्राचारे
01:06अभी मुक्तेश्वर आनंद को
01:08योन शोषन के जूटे केस में
01:10फसाने का पूरा ताना बाना बुना
01:12लेकिन सवाल ये है कि इस गिनोंने खेल
01:15के लिए आशुतोष महराज ने आखिर
01:16इनी दो बटूपों को क्यों चुना
01:18इसके लिए हमें एक साल पीछे जाना होगा
01:20यूपी के दो अलग-अलग शेहरों में
01:22एक्यग्य हुआ था
01:23वहाँ ये दो मासूम बच्चे आए
01:25जिने 60-60,000 की दक्षणा मिली
01:28और यहीं से आशुतोष महराज के संपर्क में हां गए
01:31हमारे जाज की मुताबिक
01:33आशुतोष ने इन बच्चों को
01:35इस साज़श का हिस्सा बनाने के लिए
01:36चार मुख्य वज़ा सोची
01:38एक तो ये बहुती सधारण परिवार से थे
01:40दूसरा कमजोर आर्थिक स्तिती
01:43इनके आर्थिक स्तिती काफी कमजोर थी
01:45आमदनी का कोई स्थाई जरिया नहीं था
01:47धरम में आस्ताब
01:49धरम के प्रती इनका गहरा जुखाओ है
01:51जिसके नाम पर इनसे कुछ भी कराया जा सकता है
01:54और पुरानी पहचान आशुतोष इनने पहले से जानते थे
01:57और उन्हें लगा कि इनसे अपनी हर बात मनवाई जा सकती है
02:01इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा और चोकाने वाला मोड आता है
02:05वो इस पीडित बच्चे के बयानों से साफ होता है
02:08जब इस बटूख से खूफिया कैमरे पर बात की गई
02:11तो सत सामने आया और उसने सब को हिरान कर दिया
02:14उस मासूम बच्चे ने साफ साफ लफजों में ये कबूल किया
02:18कि वो शंक्राचार्यवी मुक्टेश्वर आनंद को जानता तक नहीं था
02:22ना ही वो उनसे कभी मिला था और ना ही कभी उनके आश्रम में पढ़ने क्या था
02:26जब उससे पूछा गया कि फिर ये पूरा मामला क्या है
02:29तो बच्चे ने साफ कहा कि उसे इसके बारे में पहले से कुछ भी मालूम नहीं था
02:34ये सब बाद में बता चला
02:36उसने सीधे तोर पर बताए कि आशुतोष ने उससे जूटा आरोप लगवाया था
02:40और असलियत में उसके साथ ऐसी कोई भी गलत हरकत या कूकर्म कभी हुआ ही नहीं था
02:45सोचिये जिस बच्चे ने शंक्राचारे को कभी देखा तक नहीं था
02:49उससे गंभीर और गिनोना आरोप लगवा दिया किया
02:53आशुतोष इन बच्चों को प्रयागराज बुला कर कहने लगे कि तुम्हें
02:56प्रिश्न जी की गवाई देनी होगी धरम का ऐसा चश्मा पहनाया गया
03:00कि बच्चे समझ ही नहीं पाए कि उनके साथ ये क्या खेल हो रहा है
03:03जब सिर्फ बात से काम नहीं चला तो आशुतोष महराज ने अपनी साज़श के दूसरे चरण को अंजाम दिया
03:10जिसे कहते हैं दाम यानी लालच इस बाचीत के बीच बटूक के चाचा कामरे पर आये
03:17बच्चो को किस तरह बहला फुसला कर पैसो के जाल में फसाया गया
03:21बटूक के चाचा ने बताया कि मात मेले के दुरान बच्चो को बुलाने के लिए
03:25देवी किशोर जो की एक बदला हुआ नाम है कि एक व्यक्ति का इस्तमाल किया गया
03:31उसने फोन करके कहा कि हमारे साथ चलो तुम्हें अच्छा कासा पैसा दिलाएंगे
03:36गरी परिवार इस लालच में आ गया इतना ही नहीं
03:39आशुतोष खुद बड़े लड़ू गोपाल की मूर्ती लेकर उनके घर आये
03:44और कहा कि लड़ू गोपाल का एक केस चल रहा है तुम्हें चलकर गवाही देनी होगी
03:48मासूम बच्चो और अनपर घरवालों को क्या पता था कि लड़ू गोपाल के नाम पर किसी
03:53जीते जाकते संथ की प्रतिष्टा को ठेस पहुचाई जा रही है
03:57बटूक ने खूफिया कैमरे पर ये भी कबूल किया कि आशुतोष ने उससे वादा किया था कि मतुरा में हम
04:04तुम्हें मंदिर और मकान देंगे अराम से रहना
04:06बस तुम क्रिश्न जी के नाम पर गवाही दे तो
04:08लेकिन हकीकत में दक्षना के नाम पर केवल 6,000 थमाए गए
04:12अब कहानी का सबसे खौफनाक मोड आता है
04:15साम और दाम के बाद बारी दी डंड और भेत की
04:18जब F.I.R. लिखवाने और बयान दर्च कराने का वक्त आया
04:21तो डर था कि कहीं ये गरीब लोग पलट ना जाए
04:24इसलिए जवरदस्ती का सहरा लिया गया
04:26बटूक उसके पिता और चाचा ने अपनी आबीती सुनाई
04:30वो किसी त्रिलर फिल्म की तरह लगती है
04:32बटूक ने बताया हम स्कूल में पेपर दे रहे थे
04:35आशुतोष ने स्कूल के भाहर दो लड़के भेच दिये
04:38वो मेरे से और मेरे पापा से जवरदस्ती करने लगे
04:41और हमें मोटर साइकल पर बिठा दिया गया
04:44फिर एक होटल था वहां स्कॉर्पियो आई और हमें लखनाउ ले गए
04:48बटूक के चाचा ने इसे सीधे तौर पर
04:50चार से पाच दिनों के गिटनापिंग बताया
04:53वहीं बच्चों के पिता ने पहली बार चुपी तोड़ते हुए कहा
04:56कि हमारा मुबाइल फोन ले लिया
04:58कमरे के अंदर बंद कर दिया
04:59हम रोते रहे
05:00मा पुलिस वाले थे उन्ही के पास जाकर
05:03रोए कि बाबुजी हमें जाने दीजे और नहम पासी लगा लेंगे
05:05जब जाकर उन्होंने हमें हमारे घर भेजा
05:09जला सोचिए प्रयागराज के मागमेले में
05:12आशुतोज भ्रमचारी ने इन बच्चों के सिर पर हाथ रखकर आशिरवाद दिया था
05:16दक्षना कार्ड बनाने के बहाने इनके अधार कार्ड लिये गए और धोके से
05:20कोरे कागजों पर साइन करा लिया गया
05:22बाद में उनी कोरे कागजों पर शंकरा चारे के खिलाफ योन प्रतार्णा की एक जूटी और मनगरट स्क्रिप्ट लिखी गई
05:30इस पूरी खोज परताल से ये तो साफ हो गया कि धरम और आस्ता की आड में रची गई ये
05:36साजश
05:36कितनी घहरी और खौफनात थी
05:38मासूमों की गरीबी और उनकी धारमिक आस्ता का ऐसा घिनोना इस्तमाल शायद ही पहले कभी देखा गया होगा
05:44इस एक्स्लूसिफ रिपोर्ट ने सच को पूरी दुनिया के सामने लाकर खड़ा कर दिया है
05:49जहां खुद पीडित और उसका परिवार चीक-चीक कर कह रहा है कि वे निर्दोश है और उन्हें मौरा बनाया
05:55गया है
05:55लेकिन इस सच के सामने आने के बाद कई बड़े सवाल खड़े होते हैं
05:59क्या धरम के नाम पर ऐसा शर्यंत रचने वालों को समाज और कानून कभी माफ करेगा
06:05क्या मासूम बच्चों के भविश्य और संतों की गरिमक के साथ खिलवार करने वाले ये चेहरे कानून की गिरफ्ट में
06:12आएंगे
06:12और सबसे बड़ा सवाल क्या आप और हम अगली बार किसी भी ऐसी संसनी खेस खबर पर आख मूंत कर
06:19भरोसा करने से पहले दो बार सोचेंगे
06:22अपने राए नीचे कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं इस वीडियो को जादा से जादा शेयर करें ताकि आस्ता के
06:28नाम पर चल रहा ये खेल हर किसी के सामने बे नकाब हो से
06:32देखते रहिए हमारे साथ देश और समाज की हर कड़वी सचाई आप देख रहे हैं पन इंडिया हिंदी
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