00:00फास्टिंग कर रहे हैं, डाइटिंग, दिन की सत्रा ही सो कैलोरी लेनी हैं, अब सत्रा सो पूरी हो गई हैं,
00:05तभी लेकिन कोई बढ़िया सा माल लेके आ गया रात में नौदस बजे बोला है, खालो खालो, अच्छा आज खा
00:10लेते हैं, कल बारा सो पे रुख जाएंगे, आ�
00:26क्या करता, मैं फिसल गया, बात खाने की नहीं थी, खाने से तो मुझे व्याराग्य है, मैं तो पैदा ही
00:33हुआ था अन्नत्यागी, पर वो अपने नाजुक और हसीन हाथों से लेकर के आई, कुछ भी बहाने बना रहा है
00:38कि देखिए, कोई इतने जजबात से खिलाने लाया ह
00:42उसकी कोमल भावनाएं कैसे तोड़ दूँ, जब खाना होता है, तो बहाना होता है, खाने के लिए सौ बहाने खड़े
00:49हो जाते हैं, ना खाने का एक ही कारण होता है, इमानदारी, वो एक पल होता है फैसले का, जब
00:56आपके पास ताकत होती है, कि जो हो रहा है इसको रोक द�
01:00आप उस पर को गुजर जाने देते हो, मत गुजर जाने दो
01:03उस अधिकार का इस्तेमाल करो, खुद को ना बोलना सीखो
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