00:00दुनिया ऐसी हो जाए और जिन्दगी ऐसी हो जाए कि किसी विरोध की जरूरत ही न पड़े
00:05पर आज ऐसा नहीं है आज बहुत कुछ ऐसा है जिसे विरोध की जरूरत है
00:09तो मैं वो विरोध कर रहा हूँ
00:11पर वो मैं विरोध इसलिये कर रहा हूँ ताकि जो कुछ हटाया जाना है मैं उसको हटा दूँ
00:18और मेरे बाद, मेरे अलावा कम जरूरत पड़े किसी को उतना जूझने की
00:26लेकिन मान लो मैं काम नहीं कर पाता पूरा जिसकी बहुत संभावना है
00:30तो जूझने से डरना मत, ठीक है? जूझना कोई आखरी बात नहीं है
00:37किसी को पाओ की संघर्च नहीं कर रहा, मस्त मौज में है तो उसको नीचा मत मान लेना
00:42ये कोई नीची बात नहीं होती, नदी किनारे आप चुपचाब बैठे हो, इसमें कोई नीची बात नहीं हो गई
00:49लेकिन हाँ, पीछे गाओं में आग लगी हुई है, तब आप नदी किनारे चुपचाब बैठे हो, तो ये नीची बात
00:54है
00:55मैं चाहता हूँ गाउं की आग को मैं बुझा दूँ ताकि सब लोग नदी किनारे चुप चाप शांत बैठ पाएं
01:01किसी को संगर्ष न करना पड़े
01:03लेकिन आग जैसी है जैसा मैं देख पा रहा हूँ आग शायद इतनी आसानी से बुझेगी नहीं
01:12हम जानते हैं क्या है यह आग है जानते हो किसा आग की बात कर रहे हैं आप जानते हो
01:17उस आग को
01:18तो आग अगर नहीं बुझी है तो नदी किनारे मत बैठ जाना पानी ले लेके भागना दौर लगाना संगर्ष करना
01:25ठीक है लेकिन फिर भी याद रखना
01:28कि संघर्ष इसलिए है ताकि एक दिन संघर्ष ना करना पड़े
01:33हमारी सिंदगी भले भी बीच जाय करने में पर चलो हमारे बात किसी को ना करना पड़े
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