00:00वास्कार अचार्थी मेरा फैश्ना था कि हम अगर उचा उठ जाए तो उसके बाद क्या होता है?
00:08मैं आता है
00:10चारर जी मेरा भी एक सवाल था
00:12फैस्पिरिशने ने गीता क्यों कही और आपको इतना क्यों बोलना पड़ता है?
00:21नहीं तो गड़ बड़ सवाल है कृष्ण ने गीता क्यों कही पिटा दबाव था
00:29जब दिखाई देता है कि नहीं कहेंगे तो बहुतों का बड़ा नुक्सान हो जाएगा
00:36बहुतों को बहुत दुख मिल जाएगा
00:39तब समझ लो की करुणा के दबाव में गीता कहनी पड़ती है
00:46नहीं तो क्यों कोई खुद को जन्जट में डालेगा
00:49क्यों कुरक्षेत्र में उतरेगा
00:52बड़े होगे धीरे-धीरे समझ में आएगा
00:57वो एक चार पंगतियां है ना वो जो लिखी है मैंने
01:01वेबसाइट पढ़नी है ऐसी कुंदल करतो हाँ ये हो गई ना
01:07एक कहानी शुरू होती है सूरज के ढलने के बाद
01:12अंधेरा कितना घोर घना है जाना दिया बनने के बाद
01:19चुकि तुम सवाल पूछ रहे हो
01:22आधी रात तुक्यों लो जली थी जानोगे तुम भी जलने के बाद
01:29तो वो चीज ऐसी होती है जो तभी पता चलती है जब आदमी
01:36खुद खुद जलना शुरू कर दे खुद जब रोशनी बन जाए
01:44जाजे हाग
01:51जाजे हाग
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