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पूरा वीडियो : भगवान और भगवान में अंतर होता है || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2023)
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Transcript
00:00रामकृष्ण थे विवेकानंद थे विवेकानंद के बड़े दिन चल रहे थे उन दिनों पिता की मृत्ति हो गई थी घर
00:05में अचानाकार्थिक विपन्नता आ गई थी ये कुछ कामधाम अभी करते नहीं थे पढ़ते थे पढ़ने में इनका बड़ा जोर
00:12था बड़े मिधा�
00:13भी थे तो कई तरह की तकलीफ हैं घर में आ गई थी पर रामकृष्ण समझ गए तो इनको बलाया
00:18एक दिन बोले जो चाहते हो अंदर चले जाओ मां के पास मांगलों मिलेगा वह भेजा वह अंदर गए थोड़े
00:24दिर में बाहर आ गए तो पूछा मांग लिया जो मांसे मां
00:37अजल जाता हो तो मनोकामना याद है तो आप मंदिर नहीं पहुच़े ओ बाजार पूंचे हो
00:57मन की कामना ही मन का रोग है
01:01जो बाहर वाला भगवान होता है
01:03वो मनो कामनाओं की पूर्ति के लिए होता है
01:05और जो भीतर वाला भगवान होता है
01:06वो मनो कामनाओं से मुक्ति के लिए होता है
01:09तो कामना इसलिए उठती है कि कामना मिट जाए
01:11प्यास इसलिए उठती है कि प्यास मिट जाए
01:14तो उच्छतम कामना यही है कि कामना मिट जाए
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