00:00पढ़ना माचार जी मेरा नम खुस्बू है और हमारा प्रश्ण ये है कि हमारे भीतर एक डर होता है जिसको
00:06हम आंजाने में पकरके बैठे रहते हैं तो हमें अंदर ऐसे क्या करना चाहिए जो हम उस डर से बाहर
00:12निकल पाए
00:13डर के साथ सदा चलने वाली चीज क्या निकली स्वाथ पराश्रयता डिपेंडेंसी जिसने अपनी दिम्मेदारी से हट करके दूसरों पर
00:27आश्रित रहना स्वीकार कर लिया उसे डरना तो पढ़ेगा ना भई मेरे पास कुछ माल है कुछ सामगरी है जो
00:34दूसरों से आ रही है
00:35वो सामगरी भोतिक भी हो सकती है मानसिक भी हो सकती है पर आ दूसरों से रहिए अगर आपके पास
00:41कुछ ऐसा है जो दूसरों से आ रहा है तो आपको डरना पड़ेगा ना जाने दूसरे कब उसे वापस ले
00:46ले आपूरती रोग दें इस्तरी को या पुरुष को किसी भी मन�
00:51को यदि अपनी पूरी संभावना पानी है यदि सशक्त हो करके स्वतंत्र हो करके जीना है तो उसे जिम्मेदार बनना
01:01पड़ेगा वो यह नहीं कह सकता कि मेरी जिंदगी का दारोमदार किसी और पर है लेकिन फिर भी मैं स्वतंत्र
01:08हूं और जहां कहीं भी आप गुलामी अन�
01:20सोर्च कर रखी है तो आपको डर कर ही जीना पड़ेगा और आपको दबना भी पड़ेगा
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