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पूरा वीडियो यूट्यूब पर : जब खेलने में ही मन लगता हो || आचार्य प्रशांत (2018)
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Transcript
00:00खेल रहो फुटवाल, कितनी जोर से दौर लगा दोगे, कोई बंदिश नहीं है, लगाओ जितनी जोर से लगा सकते हो,
00:06उनको पता अगर डट के खेलेंगे, तो उसी अनुसार फल भी मिल सकता है, खेल में कम से कम अपने
00:13मालिक तुम खुद हो जाते हैं, हमें पता है कि हमने अ
00:29कि खेल में कब कहा जाएगा कि तुमने फाल करा, दुनिया में तो तुम्हें पता भी नहीं चलता कि तुमने
00:36फाल कब कर दिया, दुनिया में तो कोई यूँँ आता है और बोल देता है फाल, अभाग खड़े हो, कि
00:41अब क्या गलती हो गई, घर से फोन आए और डाट पड़
00:45रही है। एं 15 मिलंतक तुम समझ भी नहीं पा रहे हो, कि मैंने बाप क्या किया है।
00:49क्रिकेट में तो अगर अम्पाइर की उठी है तो तुम जानते हो रिकром nude क्यों उठी तुमिया में तो अगर
00:54उठी है, तो आधी तो
01:16इसी लिए के उट
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