00:00मैं भी गेट के तैयरी कर रहा हूं और मैं जिम भी जाता हूं तो उन दोनों ही चीज़ों में
00:04consistency और discipline की बहुत अबशकता है
00:06बट मैं ये पाता हूं कि discipline हमेशा follow नहीं हो पाती मुझसे जिसे अगर मुझे शुगर नहीं खाना पड़
00:11फिर भीरा मीठा खा लेता हूं
00:14तो मेरा बेसिकली प्रशन है कि मैं सही कर्म को पैचानूंगा कैसे
00:18आप बस ये देखो कि मैं अभी जो कर रहा हूं कहीं वो तो नकली काम नहीं है
00:24उधारण दू ये चार लोग नहीं हो यहां मंच पर आप अकेले बैठे हो आप हो मैं हो और यहां
00:30आगे ये सब शोता लोग नहीं हो
00:32तो क्या तब भी वही सवाल पूछोंगे जो अभी पूछा और ये कैमरे न लगे हो रिकॉर्डिंग का कोई खतरा
00:38नहीं हो
00:38तो क्या तब भी वही बात करोगे जो अभी करी और जैसे अभी करी वैसे ही करोगे
00:43और अगर पाओ कि इन लोगों की उपस्तिति से या दर्शकों की उपस्तिति से या कैमरों के होने से
00:50तुम्हारा शब्द, सवाल, तुम्हारा वचन, माने तुम्हारा कर्म बदल गया है
00:56तो मतलब तुम्हारा सवाल फर्जी था
00:58ऐसे देखा जाता है
01:00कि मैं जो कर रहा हूँ, क्या वो सच-मुच मेरा है
01:03या उसको किसी बाहर से इंफ्लुएंस कर रखा है
01:09और हमारा तो सब कुछ influence नहीं होता है
01:12कुछ भी तुम्हारा अपना नहीं
01:14ऐसे पहचाना जाता है फरजी कर्म को
01:17मेरा प्यार भी नकली, मेरी नीद भी नकली
01:20मेरा यार भी नकली, मेरा व्यवार भी नकली
01:22मेरे सवाल भी नकली, मेरे जवाब भी नकली
01:25क्योंकि इन में से कुछ भी मेरा अपना नहीं है
01:27सब किसी सहियोग का है, किसी भीड का है
01:30जिस हद तक तुम भीड से, समाज से, शरीर से आजाद होते जाते हो
01:37तब जो बच्चता है वो सही कर्म होता है
01:40पहले से उसके बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है
01:45तुम्हारा काम आजादी की छवी बनाना नहीं है
01:48तुम्हारा काम है इमानदारी से अपनी बेडियों को पहचानना
01:52और जान लगा करके उन्हें काट डालना
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