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बांकीपुर उपचुनाव को प्रशांत किशोर और जन सुराज के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। आखिर यह सीट इतनी अहम क्यों है? अगर यहां हार होती है तो इसका जन सुराज और पीके की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? इस वीडियो में हम 5 बड़ी वजहों के जरिए समझाएंगे कि क्यों बांकीपुर का मुकाबला प्रशांत किशोर के लिए करो या मरो की लड़ाई बन गया है। बिहार की राजनीति, आगामी विधानसभा चुनाव और जन सुराज की रणनीति पर इस चुनाव के असर का पूरा विश्लेषण जानने के लिए वीडियो अंत तक जरूर देखें।

The Bankipur By-Election is being seen as the biggest political test for Prashant Kishor and his Jan Suraaj campaign. Why is this seat so crucial? What happens if PK loses? In this video, we explain the five biggest reasons why the Bankipur bypoll has become a do-or-die battle for Prashant Kishor ahead of the Bihar Assembly Elections. From political credibility and voter perception to Jan Suraaj's future strategy, every key factor is covered in detail. Watch the full analysis to understand why the Bankipur by-election could shape Bihar's political landscape in the coming months.

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~PR.540~HT.110~HT.178~GR.510~VG.HM~

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Transcript
00:05कभी कभी एक चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं होता बलकि किसी नेता की पूरी सियासी पहचान का फैसला भी
00:11बन जाता है
00:12बिहार की बाकी पुर्विधासभा सीट पर होने वाला उप चुनाव भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है
00:18ये मुकाबला सिर्फ भाजपा और जन सुराज के बीच नहीं है बलकि ये प्रशान किशोर की राजनीतिक विशरसनियता उनकी मेहनत
00:26और उनके भविश्य की सबसे बड़ी परिक्षा बन चुका है
00:29अगर इस चुनाव में वे अच्छा परदर्शन करते हैं तो उनकी राजनीती को नई ताकत मिलेगी लेकिन अगर नतीजा उम्मीद
00:36के उलट रहा तो उनके विरोधियों को बड़ा मुद्दा मिल जाएगा
00:39यही वज़ा है किस बार बाकीपुर की लड़ाई को प्रशांत किशोर के लिए करो या मरो की लड़ाई कहा जा
00:46रहा है
00:46बाकीपुर विधानसवा सीट पर 30 जुलाई को अप्चुना होना है जबकि 3 अगस्त को नतीजे घोशित किये जाएंगे
00:53यह सीट भाजपा के राष्टे अध्यक्ष नितिन नवीन के स्तीफे के बाद खाली हुई है
00:57पिछले करीब तीन दशक से यह सीट भाजपा के कबजे में रही है
01:02यानि यहां भाजपा की पकर इतनी मजबूत रही है कि कोई भी दल उससे हरा नहीं सका है
01:07यही कारण है कि सीट को भाजपा का सबसे सुरक्षित गड़ माना जाता रहा है
01:12भाजपा भी इस सीट को हलके में लेने के मूड में नहीं है
01:17पाटी ने उमिद्वार के चैन की त्यारी लगभग पूरी कर ली है
01:20चर्चा है कि नितिन नवीन के करीबी और उनके पिता
01:37कायस्त मद्दाता है ऐसे में भाजपा जातिये और संगठनात्मक
01:42दोनों अस्तर पर मजबूत रणिती के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है
01:47लेकिन इस चुनाव को अचानक सबसे ज़्यादा चर्चा तब मिली जब जनसुराज के सूतरधार
01:53प्रशानकिशोर ने खुद चुनाव लड़ने के संकेत दिये
01:56उन्होंने साथ कहा कि अगर उनके चुनाव लड़ने से भाजपा जैसी मजबूत पार्टी बाकिपूर में हार सकती है
02:03तो वे मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तयार है
02:06इस एक बयान ने पूरे चुनाव का स्वरूप बदल दिया
02:10अब ये मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम जनसुराज नहीं बलकि भाजपा बनाम प्रशानकिशोर बनता हुआ दिख रहा है
02:17अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशानकिशोर ने बाकिपूर जैसी कठिन सीट क्यों चुनी
02:23ऐसी सीट जहां भाजपा 30 साल से नहीं हारी
02:26ऐसी सीट जहां संगठन मजबूत है, वोट बैंक स्थिर है और विपक्च हमेशा कमजोर रहा है
02:33इसका जवाब कई वजहों में छिपा हुआ है
02:35पहली और सबसे बड़ी वज़ा है अपनी पार्टी और अपनी विशुशनियता को मजबूत करना
02:41जनसुराज पार्टी का गठन 2 अक्टूबर 2024 को हुआ था
02:45इससे पहले प्रशान किशोर ने पूरे विहार में लंबी पदियात्रा की थी
02:49गाउं गाउं गए लोगों से मिले और एक नई राजनीती का सपना दिखाया
02:54इसके बाद विधान सबा चुनाओ में उन्होंने 243 में से 238 सीटों पर उमिद्वार उतार दिये
02:59उमीद थी कि नई राजनीती को जनता का समर्थन मिलेगा लेकिन चुनाओ परणाम उमीद के उलट रहे
03:06जनसुराज एक भी सीट नहीं जी सकी सिर्फ मढ़वरा सीट पर पार्टी दूसरे अस्थान पर रही
03:12पूरे राज में पार्टी का वोट शेर करीब 3.4 प्रतिशट के करीब रहा और लगभग 16 लाग से जादा
03:19वोट मिले
03:20वोट तो मिल गए लेकिन सीट एक भी नहीं मिली राजनीती में सीट ही असली ताकत मानी जाती है
03:26इसलिए चुनाव के बाद सवार उठने लगे कि क्या जनसुराज सिर्फ चर्चा तक सीमित पार्टी है या वास्तों में जमीन
03:33पर भी वो मजबूत हो पाएगी
03:35यहीं से प्रशान किशोर की चुनावती शुरू होती है विरोधियों ने कहना शुरू कर दिया कि जो व्यक्ति पूरे देश
03:41में चुनावी रणिती बनाता रहा वो खुद चुनाव जीतने की स्थिती में नहीं है
03:46इससे पहले भी उन्होंने रागोपूर से टेस्वी आदों के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान किया था लेकिन बाद में वे
03:52पीछे हट गए थे
03:53इस फैसले पर भी उनकी काफी आलोचना हुई थी लोगों ने कहा कि वे चुनावी रणिती तो बनाते हैं लेकिन
04:00खुद मैदान में उतरने से बचने लगते हैं
04:03अब बाकी पुर का फैसला इस छवी को बदलने की कोशिश माना जा रहा है अगर प्रशान किशोर खुद चुनाव
04:09लड़ते हैं तो वे ये संदेश देना चाहेंगे कि अब वे सिर्फ सलाह देने वाले लड़निती कार नहीं बलकि जनता
04:16के बीच जाकर लड़ाई लड़ने
04:31प्रशान किशोर लंबे समय से कहते रहे हैं कि बिहार की राजनिती जात्य और धर्म से उपर उठनी चाहिए वे
04:39शिक्षा, रोजगार और बेहतर व्योस्था की बात करते हैं उनकी पूरी पद्यात्रा इसी सोच पर आधारित रही लेकिन सवाल हमेशा
04:48यही रहा कि क्या बि
05:00परिक जाती गोलबंदी उतनी मजबूत नहीं मानी जाती है यहां पढ़े लिखे मद्दातों की संख्या जादा है डॉक्टर, वकील, चार्टेड
05:08अकाउंटेंट, व्यापारी, नौकरी पेशा लोग और उच्च मध्यम वर्ग बड़ी संख्या में रहता है ऐसे मद्दात
05:14विकास, विवस्था और प्रशासन जैसे मुद्दों पर वोट करते आए हैं यानि अगर प्रशांत किशोर यहां अच्छा पदर्शन करते हैं
05:22तो वे ये दावा कर सकेंगे कि उनकी नई राजनीती को भी सोविकार किया जा रहा है लेकिन अगर यहां
05:29भी उन्मीत के मुता�
05:30विक समर्थन नहीं मिलता तो उनकी पूरी राजनीतिक सोच पर सवाल उठ सकते हैं यही वजा है कि बाकीपुर का
05:36यह चुनाओ सिर्फ एक सीट का चुनाओ नहीं रह गया है यह प्रशांत किशोर की पूरी राजनीतिक यात्रा का सबसे
05:43बड़ा इम्तिहान बन चुका है अ�
05:58इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणिती चपी हुई है दरसल इसकी तीसरी चौथी और पांचवी वजा ही इस पूरे चुनाओ
06:05को खास बनाती है तीसरी बड़ी वजा है भाजपा के सबसे मजबूत किले में सेंध लगा कर खुद को तीसरे
06:12विकल्प के रूप में स्
06:27जनसुराज भी इसी चुनाओती से जूज रही है प्रशान किशोर अच्छी तरह जानते हैं कि अगर वे किसी ऐसी सीट
06:33से चुनाओ लड़ते हैं जहां राजत का मजबूत या जदियू का परंपरागत आधार बहुत मजबूत हो वहां जातिय समीकरण उनके
06:43रास्ते की सब
06:44से बड़ी दिवार बन जाते हैं लेकिन बाकी पूर की तस्वीर थोड़ी अलग है यह सीट शहरी है यहां जात
06:51का असर पूरी तरह खत्म तो नहीं है लेकिन गाओं की तुल्ला में कम माना जाता है यहां पढ़े लिखे
06:57और नोकरी पेशा मद्दाता बड़ी संख्या में है
07:00व्यापारियों, पेशेवर लोगों और मध्यमवर की अच्छी मौजूदगी है ऐसे में प्रशांत किशोर को लगता है कि विकास, प्रशाशन और
07:08नई राजिती का संदेश यहां जादा असर छोड़ सकता है
07:11सबसे एहम बात यह है कि अगर भाज़पा के कुछ परंपरागत मद्दाता अस्थानी अस्तर पर किसी वज़ा से नाराज हैं
07:19तो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल होगा कि वोट किसे दें? ऐसे में राज़त की बजाए जन सुराज एक अच्छा
07:26विकल्प बन सकती है
07:27यही सोच पुरशान किशोर को इस सीट पर दाव लगाने के लिए प्रेरित करती रही है अगर वे भाज़पा को
07:34कड़ी चुनोती देते हैं या मुकाबला बेहत करीबी बना देते हैं तो पूरे बिहार में यह संदेश चायेगा कि जन
07:40सुराज अब सिर्फ वोट काटने वा
07:55अब बात चौती बड़ी वज़ा की यह वज़ा सीधे सीधे 2025 के विधानसवा चुनाओ से जुड़ी हुई है बिहार में
08:02अगले विधानसवा चुनाओ में जन सुराज को सभी 243 सीटों पर मजबूती से उतरना है चुनाओ में करीब करीब 4
08:08.5 साल का वक्त बचा हुआ है ल
08:25जैसा कि मैंने बताया पिछले चुनाओ में एक भी सीट नहीं मिलने के बाद कई कारकरताओं के भीतर निराशा आई
08:31थी ऐसे समय में अगर प्रशांति सोर खुद मैदान में उतरते हैं तो ये उनके समर्थकों के लिए बड़ा संदेश
08:37होगा इससे पार्टी कारकरताओं को
08:54तरीका अगर प्रशांति सोर पूरी ताकत के साथ चुनाओ लड़ते हैं और भाजपा को कड़ी टकर देते हैं तो पार्टी
09:01के कारकरताओं का विश्वास कई गुना बढ़ जाएगा इसका सीधा असर अगले विधान सभा चुनाओ पर दिखाई देगा यानि ये
09:07उक चुन
09:21प्रशांति सोर को लोग एक चुनाओ रणितिकार के तौर पर जादा जानते हैं ना कि एक नेता के तौर पर
09:27उन्होंने कई बड़े नेताओं के लिए चुनाओ रणिती बनाई कई राज्यों में चुनाओ जिताने का श्रे भी उन्हें मिला लेकिन
09:34जब बात खुद की रा�
09:47प्रशांति सोर चुनाओ जीत जाते हैं तो उनकी पहचान हमेशा के लिए बदल जाएगी फिर उन्हें सिर्फ चुनाओी सलाकार नहीं
09:55बलकि जनादेश हासिल करने वाला नेता भी माना जाएगा लेकिन अगर वे हारते हैं तो विरोधियों को ये कहने का
10:02मौका मिल जाएग
10:03कि जनता ने उन्हें नेता के रूप में स्वविकार नहीं किया है यानि ये चुनाओ उनकी व्यक्तिगत साख के लिए
10:10भी काफी एहम है ये उससे भी जुड़ चुका है अब बात करते हैं बाकी पुर के राधनीतिक गड़ित की
10:16ये सीट पटना शहर के सबसे चर्चित वि�
10:31अदाता इसी समाच से आते हैं यही वजा है भाजपा नील रतन घोष के नाम पर काफी गंभीरता से विचार
10:37कर रही है वे कायस समाच से आते हैं और लंबे वक्त से संगठन से जुड़े रहे हैं दूसरी तरफ
10:43अगर पशांत किशोर मैदान में उतरते हैं तो वे जातिये स
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