00:05कभी कभी एक चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं होता बलकि किसी नेता की पूरी सियासी पहचान का फैसला भी
00:11बन जाता है
00:12बिहार की बाकी पुर्विधासभा सीट पर होने वाला उप चुनाव भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है
00:18ये मुकाबला सिर्फ भाजपा और जन सुराज के बीच नहीं है बलकि ये प्रशान किशोर की राजनीतिक विशरसनियता उनकी मेहनत
00:26और उनके भविश्य की सबसे बड़ी परिक्षा बन चुका है
00:29अगर इस चुनाव में वे अच्छा परदर्शन करते हैं तो उनकी राजनीती को नई ताकत मिलेगी लेकिन अगर नतीजा उम्मीद
00:36के उलट रहा तो उनके विरोधियों को बड़ा मुद्दा मिल जाएगा
00:39यही वज़ा है किस बार बाकीपुर की लड़ाई को प्रशांत किशोर के लिए करो या मरो की लड़ाई कहा जा
00:46रहा है
00:46बाकीपुर विधानसवा सीट पर 30 जुलाई को अप्चुना होना है जबकि 3 अगस्त को नतीजे घोशित किये जाएंगे
00:53यह सीट भाजपा के राष्टे अध्यक्ष नितिन नवीन के स्तीफे के बाद खाली हुई है
00:57पिछले करीब तीन दशक से यह सीट भाजपा के कबजे में रही है
01:02यानि यहां भाजपा की पकर इतनी मजबूत रही है कि कोई भी दल उससे हरा नहीं सका है
01:07यही कारण है कि सीट को भाजपा का सबसे सुरक्षित गड़ माना जाता रहा है
01:12भाजपा भी इस सीट को हलके में लेने के मूड में नहीं है
01:17पाटी ने उमिद्वार के चैन की त्यारी लगभग पूरी कर ली है
01:20चर्चा है कि नितिन नवीन के करीबी और उनके पिता
01:37कायस्त मद्दाता है ऐसे में भाजपा जातिये और संगठनात्मक
01:42दोनों अस्तर पर मजबूत रणिती के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है
01:47लेकिन इस चुनाव को अचानक सबसे ज़्यादा चर्चा तब मिली जब जनसुराज के सूतरधार
01:53प्रशानकिशोर ने खुद चुनाव लड़ने के संकेत दिये
01:56उन्होंने साथ कहा कि अगर उनके चुनाव लड़ने से भाजपा जैसी मजबूत पार्टी बाकिपूर में हार सकती है
02:03तो वे मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तयार है
02:06इस एक बयान ने पूरे चुनाव का स्वरूप बदल दिया
02:10अब ये मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम जनसुराज नहीं बलकि भाजपा बनाम प्रशानकिशोर बनता हुआ दिख रहा है
02:17अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशानकिशोर ने बाकिपूर जैसी कठिन सीट क्यों चुनी
02:23ऐसी सीट जहां भाजपा 30 साल से नहीं हारी
02:26ऐसी सीट जहां संगठन मजबूत है, वोट बैंक स्थिर है और विपक्च हमेशा कमजोर रहा है
02:33इसका जवाब कई वजहों में छिपा हुआ है
02:35पहली और सबसे बड़ी वज़ा है अपनी पार्टी और अपनी विशुशनियता को मजबूत करना
02:41जनसुराज पार्टी का गठन 2 अक्टूबर 2024 को हुआ था
02:45इससे पहले प्रशान किशोर ने पूरे विहार में लंबी पदियात्रा की थी
02:49गाउं गाउं गए लोगों से मिले और एक नई राजनीती का सपना दिखाया
02:54इसके बाद विधान सबा चुनाओ में उन्होंने 243 में से 238 सीटों पर उमिद्वार उतार दिये
02:59उमीद थी कि नई राजनीती को जनता का समर्थन मिलेगा लेकिन चुनाओ परणाम उमीद के उलट रहे
03:06जनसुराज एक भी सीट नहीं जी सकी सिर्फ मढ़वरा सीट पर पार्टी दूसरे अस्थान पर रही
03:12पूरे राज में पार्टी का वोट शेर करीब 3.4 प्रतिशट के करीब रहा और लगभग 16 लाग से जादा
03:19वोट मिले
03:20वोट तो मिल गए लेकिन सीट एक भी नहीं मिली राजनीती में सीट ही असली ताकत मानी जाती है
03:26इसलिए चुनाव के बाद सवार उठने लगे कि क्या जनसुराज सिर्फ चर्चा तक सीमित पार्टी है या वास्तों में जमीन
03:33पर भी वो मजबूत हो पाएगी
03:35यहीं से प्रशान किशोर की चुनावती शुरू होती है विरोधियों ने कहना शुरू कर दिया कि जो व्यक्ति पूरे देश
03:41में चुनावी रणिती बनाता रहा वो खुद चुनाव जीतने की स्थिती में नहीं है
03:46इससे पहले भी उन्होंने रागोपूर से टेस्वी आदों के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान किया था लेकिन बाद में वे
03:52पीछे हट गए थे
03:53इस फैसले पर भी उनकी काफी आलोचना हुई थी लोगों ने कहा कि वे चुनावी रणिती तो बनाते हैं लेकिन
04:00खुद मैदान में उतरने से बचने लगते हैं
04:03अब बाकी पुर का फैसला इस छवी को बदलने की कोशिश माना जा रहा है अगर प्रशान किशोर खुद चुनाव
04:09लड़ते हैं तो वे ये संदेश देना चाहेंगे कि अब वे सिर्फ सलाह देने वाले लड़निती कार नहीं बलकि जनता
04:16के बीच जाकर लड़ाई लड़ने
04:31प्रशान किशोर लंबे समय से कहते रहे हैं कि बिहार की राजनिती जात्य और धर्म से उपर उठनी चाहिए वे
04:39शिक्षा, रोजगार और बेहतर व्योस्था की बात करते हैं उनकी पूरी पद्यात्रा इसी सोच पर आधारित रही लेकिन सवाल हमेशा
04:48यही रहा कि क्या बि
05:00परिक जाती गोलबंदी उतनी मजबूत नहीं मानी जाती है यहां पढ़े लिखे मद्दातों की संख्या जादा है डॉक्टर, वकील, चार्टेड
05:08अकाउंटेंट, व्यापारी, नौकरी पेशा लोग और उच्च मध्यम वर्ग बड़ी संख्या में रहता है ऐसे मद्दात
05:14विकास, विवस्था और प्रशासन जैसे मुद्दों पर वोट करते आए हैं यानि अगर प्रशांत किशोर यहां अच्छा पदर्शन करते हैं
05:22तो वे ये दावा कर सकेंगे कि उनकी नई राजनीती को भी सोविकार किया जा रहा है लेकिन अगर यहां
05:29भी उन्मीत के मुता�
05:30विक समर्थन नहीं मिलता तो उनकी पूरी राजनीतिक सोच पर सवाल उठ सकते हैं यही वजा है कि बाकीपुर का
05:36यह चुनाओ सिर्फ एक सीट का चुनाओ नहीं रह गया है यह प्रशांत किशोर की पूरी राजनीतिक यात्रा का सबसे
05:43बड़ा इम्तिहान बन चुका है अ�
05:58इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणिती चपी हुई है दरसल इसकी तीसरी चौथी और पांचवी वजा ही इस पूरे चुनाओ
06:05को खास बनाती है तीसरी बड़ी वजा है भाजपा के सबसे मजबूत किले में सेंध लगा कर खुद को तीसरे
06:12विकल्प के रूप में स्
06:27जनसुराज भी इसी चुनाओती से जूज रही है प्रशान किशोर अच्छी तरह जानते हैं कि अगर वे किसी ऐसी सीट
06:33से चुनाओ लड़ते हैं जहां राजत का मजबूत या जदियू का परंपरागत आधार बहुत मजबूत हो वहां जातिय समीकरण उनके
06:43रास्ते की सब
06:44से बड़ी दिवार बन जाते हैं लेकिन बाकी पूर की तस्वीर थोड़ी अलग है यह सीट शहरी है यहां जात
06:51का असर पूरी तरह खत्म तो नहीं है लेकिन गाओं की तुल्ला में कम माना जाता है यहां पढ़े लिखे
06:57और नोकरी पेशा मद्दाता बड़ी संख्या में है
07:00व्यापारियों, पेशेवर लोगों और मध्यमवर की अच्छी मौजूदगी है ऐसे में प्रशांत किशोर को लगता है कि विकास, प्रशाशन और
07:08नई राजिती का संदेश यहां जादा असर छोड़ सकता है
07:11सबसे एहम बात यह है कि अगर भाज़पा के कुछ परंपरागत मद्दाता अस्थानी अस्तर पर किसी वज़ा से नाराज हैं
07:19तो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल होगा कि वोट किसे दें? ऐसे में राज़त की बजाए जन सुराज एक अच्छा
07:26विकल्प बन सकती है
07:27यही सोच पुरशान किशोर को इस सीट पर दाव लगाने के लिए प्रेरित करती रही है अगर वे भाज़पा को
07:34कड़ी चुनोती देते हैं या मुकाबला बेहत करीबी बना देते हैं तो पूरे बिहार में यह संदेश चायेगा कि जन
07:40सुराज अब सिर्फ वोट काटने वा
07:55अब बात चौती बड़ी वज़ा की यह वज़ा सीधे सीधे 2025 के विधानसवा चुनाओ से जुड़ी हुई है बिहार में
08:02अगले विधानसवा चुनाओ में जन सुराज को सभी 243 सीटों पर मजबूती से उतरना है चुनाओ में करीब करीब 4
08:08.5 साल का वक्त बचा हुआ है ल
08:25जैसा कि मैंने बताया पिछले चुनाओ में एक भी सीट नहीं मिलने के बाद कई कारकरताओं के भीतर निराशा आई
08:31थी ऐसे समय में अगर प्रशांति सोर खुद मैदान में उतरते हैं तो ये उनके समर्थकों के लिए बड़ा संदेश
08:37होगा इससे पार्टी कारकरताओं को
08:54तरीका अगर प्रशांति सोर पूरी ताकत के साथ चुनाओ लड़ते हैं और भाजपा को कड़ी टकर देते हैं तो पार्टी
09:01के कारकरताओं का विश्वास कई गुना बढ़ जाएगा इसका सीधा असर अगले विधान सभा चुनाओ पर दिखाई देगा यानि ये
09:07उक चुन
09:21प्रशांति सोर को लोग एक चुनाओ रणितिकार के तौर पर जादा जानते हैं ना कि एक नेता के तौर पर
09:27उन्होंने कई बड़े नेताओं के लिए चुनाओ रणिती बनाई कई राज्यों में चुनाओ जिताने का श्रे भी उन्हें मिला लेकिन
09:34जब बात खुद की रा�
09:47प्रशांति सोर चुनाओ जीत जाते हैं तो उनकी पहचान हमेशा के लिए बदल जाएगी फिर उन्हें सिर्फ चुनाओी सलाकार नहीं
09:55बलकि जनादेश हासिल करने वाला नेता भी माना जाएगा लेकिन अगर वे हारते हैं तो विरोधियों को ये कहने का
10:02मौका मिल जाएग
10:03कि जनता ने उन्हें नेता के रूप में स्वविकार नहीं किया है यानि ये चुनाओ उनकी व्यक्तिगत साख के लिए
10:10भी काफी एहम है ये उससे भी जुड़ चुका है अब बात करते हैं बाकी पुर के राधनीतिक गड़ित की
10:16ये सीट पटना शहर के सबसे चर्चित वि�
10:31अदाता इसी समाच से आते हैं यही वजा है भाजपा नील रतन घोष के नाम पर काफी गंभीरता से विचार
10:37कर रही है वे कायस समाच से आते हैं और लंबे वक्त से संगठन से जुड़े रहे हैं दूसरी तरफ
10:43अगर पशांत किशोर मैदान में उतरते हैं तो वे जातिये स
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