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00:00It's your time to solve your problems!
00:02You can't solve it!
00:04You can't solve it!
00:05If you have done this,
00:07then I will study you free
00:08and I will give you 50,000,000,000,000.
00:12Yes!
00:13I will solve it!
00:16In the morning,
00:17there was a whole new school
00:22in the city of Gyan Deep World School
00:24that was first started.
00:27Instead,
00:27there was one place of Gyan Deep World War.
00:30There was another place that drove away.
00:33In the morning,
00:35there was a blind fire!
00:35There was a connection with Gyan Deep World!
00:38But it was a small connection with Gyan Deep World.
00:43A knot was found like a He is a disponible.
00:46There was a Blackwoodauftragals in the city of Gyan Deep World!
00:50There was aبلifer,
00:51there was a deepening of Gyan Deep World War.
00:53There was a device to find a system
00:53which was found.
00:53He was found on Gyan Deep World as a team of Gyan Deep World War.
00:55और बाल ऐसे जैसे महीनों से कंगी न देखी हो
00:58आरियन कूडा बिनता था
01:01प्लास्टिक, लोहे के टुकडे, कभी-कभी फेंकी हुई किताबे
01:04लेकिन आज उसकी नजरें कूडे पर कम और स्कूल की खिड़कियों पर ज्यादा थी
01:09उसे स्कूल के अंदर से आती आवाजیں खींचती थी
01:13ब्लैक बोर्ड पर चलती चौक की आवाज
01:15बच्चों के जबाब टीचर का समझाना
01:18आरियन कभी स्कूल नहीं गया था
01:20उसके पिता रिक्षा चलाते थे
01:22मा घरों में बरतंद होती थी
01:24दो वक्त की रोटी जुटाना ही बड़ी बात थी
01:27पढ़ाई उनके लिए सपना नहीं
01:29विलासिता थी
01:30लेकिन आरियन अलग था
01:32जब उसे कूडे में पुरानी कौपिया मिलती
01:35तो वो उन्हें बेचता नहीं था
01:36वो उन्हें अपने पास रख लेता
01:38तूटी पेंसिल से दीवारों पर सवाल हल करता
01:41गाडियों के नमबर जोडता
01:43दुकान के बोर्ड से अंक निकाल कर समीकरन बनाता
01:46उसे संख्याए दोस्त लगती थी
01:48उस दिन जब वो स्कूल की दीवार के पास खड़ा था
01:52तभी अंदर से तेज आवाज आई
01:56ये सवाल पूरे शहर में कोई हल नहीं कर पाया
02:01आवाज थी स्कूल के प्रिंसिपल श्री अर्विंद चौहान की
02:04वो अपने घुस्से के लिए मशूर थे
02:06आरियन जाली के पास खिसकाया
02:09अंदर बार्वी की स्पेशल मैथ क्लास चल रही थी
02:12बोर्ड पर एक लंबा उल्जा हुआ गणितिय सवाल लिखा था
02:15इंटिक्रल लिमिट और कुछ ऐसे चिन जिन्हें आम छात्र देख कर ही घबरा जाए
02:21एक महिला टीचर बोली
02:24सर ये सवाल तो यूनिवर्सिटी लेवल का है
02:27बच्चे इसे नहीं कर पाएंगे
02:30अगर इस क्लास में कोई खुद को जीनियस समझता है
02:32तो आज अभी यहीं साबित करके दिखाए
02:35जो इस सवाल को हल कर देगा उसे मैं पूरे पचास लाख रुपे दूँगा
02:38क्लास में सननाटा च्छा गया
02:40आरियन की आखे चमक उठी
02:42उसे पैसे की कीमत पता थी
03:00और उसी इक्षण दीवार के इस पार खड़े एक कूडा बिनने वाले लड़के ने तै कर लिया
03:05कि वो इस सवाल को समझेगा चाहे कुछ भी हो
03:09क्लास के अंदर माहौल भारी था
03:11बोड पर लिखा सवाल किसी पहेली जैसा लग रहा था
03:14अंकों की लंबी शंखला, जटिल चिन और नीचे मोटे अक्षरों में लिखा
03:20सिद्ध करो कि ये समीकरन केवल शून्य पर संतुलित होता है
03:24प्रिंसिपल अर्विंद चौहान पूरे आत्म विश्वास से खड़े थे
03:28उनकी आखों में चुनौती थी
03:30मैंने ये सवाल देश के बड़े-बड़े प्रोफेसरों को भेजा है
03:34उन्होंने उंची आवाज में कहा
03:36अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं आया
03:47क्लास में फुसफुसाहट शुरू हो गई
03:49कुछ बच्चों की आँखों में लालच था
03:51कुछ के चहरे पर डर
03:52उसी समय गणित की सीनिय टीचर
03:55मीरा महरा मैडम कुर्सी से उठी
03:57वो सक्त स्वभाव की मानी जाती थी
03:59उन्होंने हलकी मुस्कान के साथ कहा
04:02सर ये सवाल प्रतिभाशाली रिसर्च स्कॉलर्स के लिए है
04:06हमारे बच्चे अभी उस तर पर नहीं है
04:08और बाहर खड़े किसी कूड़ा बिनने वाले को तो भूली जाईए
04:15क्लास में कुछ बच्चे हस पड़े
04:17जाली के बाहर खड़ा आरियन सब सुन रहा था
04:20कूड़ा बिनने वाला
04:22ये शब्द उसके कानों में गूंजने लगे
04:24उसे चोट लगी
04:25लेकिन खुस्सा नहीं आया
04:27अजीब बात थी
04:28अंदर कहीं एक शांती थी
04:30जैसे उसे पता हो कि जवाब शब्दों से नहीं
04:34काम से दिया जाता है
04:35घंटी बजी
04:36क्लास खत्म हुई
04:38बच्चे बाहर निकले
04:39कुछ बोड की फोटो खीच रहे थे
04:41कुछ सिर हिला रहे
04:43पचास लाग तो दूर
04:45ये सवाल ही समझ में नहीं आ रहा
04:48आरियन धीरे से पीछे की तरफ चला गया
04:50वो जानता था
04:51कि सामने से जाने पर गार्ड उसे भगा देगा
04:54उसे स्कूल का पिछला टूटा गेट मालूम था
04:57वही से वो कभी-कभी
04:59खाली बोतले उठा लेता था
05:01उस दिन उसने कूडा बिनना
05:03जल्दी खत्म किया
05:04बोरे में ज्यादा कुछ नहीं था
05:06लेकिन दिमाग में वही सवाल घूम रहा था
05:08घर पहुँचकर उसने बोरा एक कोने में फेंका
05:11मा खास रही थी
05:13पिता अभी लोटे नहीं थे
05:15आर्यन ने दिवार पर कोईले से
05:17वही चिन्ह बनाने शुरू किये
05:19जो उसने बोर्ड पर देखे थे
05:20उसने हर स्टेप याद करने की कोशिश की
05:23इंटिग्रल के नीचे की सीमा
05:25X का पावर, लॉगरिथम का चिन
05:28वो आँखे बंद कर लेता
05:30और बोर्ड उसकी आँखों के सामने आ जाता
05:32सिद्ध करो की केवल शून्य पर संतुलन है
05:36वो बुदबुदाया
05:37अगर सब कुछ शून्य पर टिकता है
05:40तो शुरुआत भी वहीं से होगी
05:41रात गहराती गई
05:43बाहर शहर सो गया
05:45लेकिन एक जुग्गी के भीतर
05:47एक कूडा बिनने वाला लड़का
05:49गनित से जूज रहा था
05:51उसे पचास लाग से ज्यादा
05:53अपनी इज़त जीतनी थी
05:55रात के करीब 12 बजे होंगे
05:57जुग्गी बस्ती में सन्नाटा था
05:59कहीं दूर कुत्तों के भौकने की आवाज आ रही थी
06:03आर्यन की आखों में नींद नहीं थी
06:05दिवार पर कोईले से लिखे समीकरन धुंद्रे हो चुके थे
06:08उसने बार-बार वही स्टेप दोहराया
06:11लेकिन बीच में कुछ अटक रहा था
06:13लगता है सीमा बदलनी होगी
06:15उसने खुद से कहा
06:17अचानक उसे याद आया
06:19बोर्ड पर एक छोटा सा टर्म था
06:21जिसे बाकी बच्चों ने शायद नजर अंदास किया होगा
06:24वही कुझी थी
06:25उसका दिल तेज धड़कने लगा
06:27वो उठ बैठा
06:29उसे महसूस हुआ कि जवाब करीब है
06:32बहुत करीब
06:33लेकिन उसे असली बोर्ड देखना होगा
06:35पूरा सवाल साफ अक्षरों में
06:37उसने मा की तरफ देखा
06:39वो सो रही थी
06:41पिता अभी तक लोटे नहीं थे
06:43आर्यन धीरे से बाहर निकला
06:45और स्कूल की तरफ दोड़ पड़ा
06:47ग्यान दीप वर्ल्ड स्कूल की इमारत
06:49रात में और भी भव्वे लग रही थी
06:51उची दीवारें
06:52चमकता गेट और सामने सोता हुआ गार्ड
06:56आर्यन चुपचा पीछे की तरफ गया
06:58जहां टूटी हुई जाली थी
06:59वो वहां से अंदर घुस गया
07:01उसके कदम हलके थे
07:03जैसे हवा में चल रहा हो
07:06क्लासरूम की खिडकी आधी खुली थी
07:07उसने अंदर जाका
07:10अंधेरा था लेकिन स्ट्रीट लाइट की
07:12हलकी रोशनी सीधे ब्लैक बोर्ड पर
07:14पड़ रही थी
07:15वहीं सवाल पूरा का पूरा
07:17उसका दिल भराया
07:18वो अंदर कूद गया
07:20कमरे में चौक की हलकी गंध थी
07:22लकडी की बेंचे सजी थी
07:24सामने विशाल बोर्ड जैसे
07:27किसी पहाड की चोटी
07:28आर्यन धीरे से
07:29टीचर की टेबल तक गया
07:31वहाँ एक छोटी चौक पड़ी थी
07:33उसने उसे उठाया
07:34पहली बार उसने असली ब्लैक बोर्ड पर
07:37चौक पकड़ी थी
07:38उसके हाथ काप रहे थे
07:40एक पल को डर आया
07:44लेकिन तुरंत दूसरा विचार आया
07:46अगर नहीं किया तो
07:47उसने बोर्ड के नीचे
07:48खाली जगह देखी और लिखना शुरू किया
07:51पहला स्टेप
07:52फिर दूसरा फिर तीसरा
07:54उसकी सांसे तेज थी
07:56लेकिन दिमाग शांत
07:57जैसे जैसे वो आगे बढ़ा
08:00सवाल खुलने लगा
08:01उसे समझा गया
08:03कि असली चाल
08:04इंटीग्रल के भीतर छिपी थी
08:05सीमा बदलने से
08:07पूरा समीकरन सिमट जाता था
08:09वो तेजी से लिखने लगा
08:11कमरे में सिर्फ चौक की
08:13खटखट की आवाज थी
08:14समय बीटता गया
08:16करीब दो घंटे बाद
08:18पूरा बोर्ड भर चुका था
08:20आखिर में उसने एक बॉक्स बनाया
08:22और उसमें जवाब लिखा
08:24शून्य
08:25वो पीछे हटा
08:27सवाल जो पहाड जैसा लग रहा था
08:29अब एक सीधी रेखा जैसा लग रहा था
08:32आर्यन की आँखों में चमक थी
08:34उसने चौक वापस रखी
08:36खिरकी से बाहर कूदा
08:37और अंधेरे में गुम हो गया
08:39उसे नहीं पता था कि सुबह क्या होगा
08:41बस इतना पता था
08:43उसने अपना काम कर दिया है
08:45सुबह ठीक आठ बजे
08:47प्रिंसिपल अर्विन चौहान तेज कदमों से
08:50क्लास में दाखिल हुए
08:51उनके पीछे मीरा महरा मैडम
08:53और कुछ सीनियर टीचर्स भी थे
08:55आज फैसला होना था
08:57तो बच्चों किसने जीते पचास लाक
09:04पूरी क्लास खामोश थी
09:05टौपर राघव खड़ा हुआ
09:09सर
09:09हमने कोशिश की
09:12पर यह सवाल हमारे स्थर से बाहर है
09:15मीरा मैडम ने सिर हिलाया
09:17जैसे उन्हें पहले से ही जवाब पता हो
09:20प्रिंसिपल बोड की तरफ मुरे
09:21और अगले ही पल उनके कदम रुख गए
09:24पूरा बोड भरा हुआ था
09:26नीचे से उपर तक साफ क्रमबध स्टेप्स
09:29हर परिवर्तन तारकिक
09:30हर लाइन जुड़ी हुई
09:32क्लास में हलचल मजगई
09:35यह किसने किया
09:37पूरी रात में किसने हल कर दिया
09:41प्रिंसिपल धीरे धीरे आगे बढ़े
09:43उन्होंने चश्मा ठीक किया
09:45एक-एक स्टेप पढ़ने लगे
09:47उनका चेहरा बदल रहा था
09:48ये ये तो
09:52मीरा मैडम भी पास आ गई
09:53उन्होंने पाँचवा स्टेप पढ़ा
09:55फिर साथवा फिर बारहवा
09:57उनकी भौहें सिकुड गई
10:07उन्होंने आखरी बॉक्स में लिखा हुआ
10:10शून्य देखा
10:10कुछ सेकंड सननाटा रहा
10:12फिर उन्होंने धीरे से कहा
10:15ये समाधान सही है
10:17क्लास में फुसफुसा हट टेज हो गई
10:21किसने किया
10:23प्रिंसिपल की आवाज अब सخت थी
10:25सच बताओ
10:26ये मजाक नहीं है
10:28सबने एक दूसरे को देखा
10:30कोई आगे नहीं आया
10:31तभी एक छात्र बोला
10:34सर कल जब हम निकले थे
10:36तब बोर्ड खाली था
10:37मीरा मैडम ने तुरंत कहा
10:39सर ये जरूर किसी भारी ने किया है
10:42हमारे बच्चों में इतनी समझ नहीं है
10:44और अगर किसी ने रात में घुसकर बोर्ड खराब किया है
10:47तो ये सुरक्षा की बड़ी चूक है
10:49सीसी टीवी चेक करो
10:52उन्होंने आदेश दिया
10:53कुछ ही मिनिटों में स्टाफ रूम में फुटेच चल रहा था
10:57स्क्रीन पर रात के दो बचकर 47 मिनिट पर
11:00एक छोटी सी परच्चाई खिरकी से अंदर कूत्ती दिखाई दी
11:17वो तेजी से लिख रहा था
11:19रुका नहीं, डरा नहीं
11:21फुटेच खत्म हुआ
11:22कमरे में खामोशी थी
11:31प्रिंसिपल की आँखे गहरी हो गई
11:33उसे ढूंडो उन्होंने कहा
11:35अभी और उसी पल
11:37एक कूडा बिनने वाले लड़के की
11:39किस्मत दर्वाजे पर दस्तक देने वाली थी
11:42करीब आधे घंटे बाद
11:43दो गार्ड आर्यन को लेकर स्कूल पहुँचे
11:46वो डरा हुआ था
11:47उसके हाथ में वही पुराना बोरा था
11:50साहब मैंने कुछ नहीं चुराया
11:52वो बार-बार कह रहा था
11:54स्टाफ रूम में सभी टीचर बैठे थे
11:57प्रिंसिपल अर्विंद चौहान सामने कुरसी पर थे
12:00मीरा महरा मैडम बगल में खड़ी थी
12:03चेहरे पर सकती साफ दिख रही थी
12:05नाम क्या है तुमारा?
12:08आरियन
12:10स्कूल में क्यों गुसे?
12:14आरियन चुप रहा
12:15बोलो!
12:16तुम जैसे बच्चे चोरी करने आते पढ़ाई नहीं
12:22आरियन की आँखों में आसू आ गए
12:24मैं चोरी करने नहीं आया था मैडम
12:26वो सवाल वो मुझे सोने नहीं दे रहा था
12:29मैं बस उसे देखना चाहता था
12:31फिर लिखने लगा
12:33मीरा मैडम हस पड़ी
12:35सर देखे कहानी बना रहा है
12:37इतना बड़ा सवाल और ये?
12:39अगर तुमने लिखा है तो अभी सब के सामने समझाओ
12:42आरियन ने घबरा कर उनकी तरफ देखा
12:45मुझे
12:45मुझे कोशिश करने दीजिए
12:47उसने धीरे से कहा
12:49उसे क्लास रूम में ले जाया गया
12:51सारे बच्चे बैठे थे
12:53जैसे कोई तमाशा होने वाला हो
12:55कुछ फुस फुसा रहे थे
12:57यहीं है वो
12:58आरियन दर्वाजे पर ठिठक गया
13:00आओ
13:01प्रिंसिपल ने कहा
13:03वो बोर्ड के सामने खड़ा हुआ
13:05कल रात के लिखे स्टेप अभी भी साफ थे
13:08प्रिंसिपल ने चौक उसके हाथ में दी
13:12चौते स्टेप से शुरू करो
13:14यहीं से सवाल का में टर्निंग पॉइंट है
13:16मीरा मेहरा मैडम ने बाहें बांध ली
13:18देखते है
13:21अर्यन ने गहरी सास ली
13:23यहां इंटेग्रल की सीमा गलत दिशा में देखी गई थी
13:27उसने धीमे स्वर में कहा
13:29क्लास शान्त हो गई
13:31अगर हम एक्स को नेगिटिव अनंद से पॉजिटिव अनंद की जगा
13:35शून्य के आसपा समेट दे
13:36तो अंदर का पूरा भाव सिमट जाता है
13:39वो लिखता गया
13:41उसकी आवाज अब काप नहीं रही थी
13:43फिर ये टर्म ये खुद को कार देता है
13:46और यहां उसने अगला स्टेप लिखा
13:49प्रिंसिपल की आँखे फैल गई
13:51मीरा महरा मैडम का चेहरा
13:53सक्त से गंभीर हो गया
13:55आर्यन ने आखरी लाइन तक पहुँच कर कहा
13:58इस पूरा समीकर अंत में संतुलित होकर
14:04शून्य देता है
14:06चौक नीचे गिर गई
14:07क्लास में सन्नाटा था
14:09अब कोई नहीं हस रहा था
14:11चौक गिरने की हलकी सी आवाज
14:14पूरे कमरे में गूंज गई
14:16आर्यन ने सिर जुका लिया
14:18उसे लगा अब कोई बोलेगा
14:20घलत है
14:21लेकिन कुछ नहीं हुआ
14:24प्रिंसिपल अर्विंद चौहान
14:25धीरे धीरे आगे बढ़े
14:27उन्होंने बोड को दोबारा पढ़ा
14:29फिर आर्यन की तरफ देखा
14:33तुमने यह तरीका कहां से सीखा
14:37आर्यन ने हिचकते हुए कहा
14:39किताबों में पूरा नहीं मिलता था सर
14:41मैं अलग-अलग हिससे जोडता था
14:43कभी पुरानी गाइड मिल जाती थी
14:45कभी अकबार में पहली
14:46बाकी खुद सोचता था
14:51मीरा महरा मैडम अब तक चुप थी
14:53उन्होंने अचानक पूछा
14:56अगर हम यहाँ वैल्यू ए रख दे
14:59तो क्या होगा?
15:02यह ट्रिक सवाल था
15:04क्लास के कई छात्र इस मोर पर फस चुके थे
15:07आर्यन ने बिना बोर्ड देखे जवाब दिया
15:19मीरा महरा मैडम के चहरे का रंग बदल गया
15:22क्लास में बैठे छात्र एक दूसरे को देखने लगे
15:26प्रिंसिपल ने गहरी सास ली
15:28तुम्हें पता है मैंने क्या कहा था?
15:31आर्यन ने धीरे से सिरह लाया
15:33जो यह सवाल हल करेगा
15:35उसे पचास लाक रुपए मिलेंगे
15:38क्लास में हलचल हुई
15:39मीरा महरा मैडम तुरंथ बोली
15:42सर एक मिनट ये बच्चा स्कूल का चहात्र नहीं है
15:45नियम नियम प्रतिभा से बड़े नहीं होते
15:48प्रिंसिपल ने सकती से कहा
15:50कमरे में सननाटा च्छा गया
15:52उन्होंने सब के सामने घोशना की
15:55आज से ये लड़का इस स्कूल का चहात्र है
15:58पूरी स्कॉलर्शिप पर
15:59और जहां तक इनाम की बात है
16:02वो कुछ पल रुके
16:04मैं अपना वादा निभाऊंगा
16:06आर्यन को विश्वास नहीं हुआ
16:07सर मुझे पैसे नहीं चाहिए
16:09उसने धीरे से कहा
16:11मुझे बस पढ़ना है
16:12प्रिंसिपल की आँखों में पहली बार नर्मी आई
16:15पढ़ाई भी होगी और तुम्हारे घर की जिम्मेदारी भी हम लेंगे
16:19क्लास में बैठे चात्रों के चेहरों पर
16:21अलग-अलग भाव थे
16:22कुछ शर्मिंदा थे, कुछ हैरान
16:25मीरा महरा मैडम ने धीमे स्वर में कहा
16:35उसकी मुसकान में अहंकार नहीं था
16:38सिर्फ सादगी थी
16:39और उसी पल ग्यानदीप वर्ल्ड स्कूल की सबसे बड़ी क्लास में
16:43सबसे छोटा लड़का सबसे बड़ा सावित हो चुका था
16:46घोशना के बाद भी बात वहीं खत्म नहीं हुई
16:49असली परीक्षा अभी बाकी थी
16:51अगले दिन स्कूल के ऑडिटोरियम में एक विशेश सभा रखी गई
16:55पूरे स्कूल के सामने आर्यन को आपचारिक रूप से छात्र घोशित किया जाना था
17:00छात्रों में उच्सुकता थी
17:02कुछ लोग अब भी फुस्फुसा रहे थे
17:04सच में एक कूडा बीनने वाला हमारे साथ पढ़ेगा
17:07यार यह कैसे हो सकता है
17:10स्टेज पर प्रिंसिपल अर्विंद चौहान खड़े थे
17:13उनके साथ मीरा महरा मैडम भी थी
17:15आज प्रिंसिपल ने माइक्रोफोन पर कहा
17:18हम सिर्फ एक छात्र का स्वागत नहीं कर रहे
17:20हम ये स्वीकार कर रहे हैं
17:22कि प्रतिभा किसी पहचान की मुहताज नहीं होती
17:25फिर उन्होंने आर्यन को मंच पर बुलाया
17:27आर्यन साफ यूनिफॉर्म में था
17:30बाल करीने से कटे हुए
17:32लेकिन उसकी आँखों की चमक वहीं थी
17:34तालियां बजी
17:35पहले धीमी फिर तेज
17:37प्रिंसिपल ने कहा
17:38मैंने 50 लाख रुपे देने का वादा किया था
17:41ये राशी आर्यन के नाम से
17:43एक ट्रस्ट में जमा की जाएगी
17:45उसकी पढ़ाई, उसके परिवार
17:47और भविश्य के लिए पूरा हॉल
17:49तालियों से गूंज उठा
17:50मीरा महरा मैडम आगे आई
17:52उन्होंने माइक्रोफोन लिया
17:54कल मैंने कहा था कि ये सवाल वो नहीं कर सकता
17:57मैं गलत थी
17:58एक शिक्षक होने के नाते
18:00मुझे ये स्विकार करना चाहिए
18:03तुमने हमें सिखाया है
18:04कि हम कभी भी किसी को
18:06उसके कपड़ों या हालात से नहीं आग सकते
18:10आरियन ने बस इतना कहा
18:12मैडम अगर मुझे बोर्ड देखने दिया जाता
18:15तो मैं पहले ही बता देता
18:17हॉल में हलकी हसी गुंजी
18:19लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं थी
18:21सभा के बाद कुछ चातर उसके पास आए
18:23राघव जो पहले टॉपर था बोला
18:26क्या तुम मुझे वो इंटीग्रल वाला हिस्सा
18:28दुबारा समझा सकते हो
18:29आरियन मुस्कुराया
18:31चलो अभी समझाते हैं
18:33वो अब कक्षा के बीच में खड़ा था
18:35लेकिन इस बार मजाग का पातर नहीं
18:38मार्क दर्शक की तरह
18:40शाम को जब वो घर लोटा
18:41तो बस्ती के लोग उसे घेर कर खड़े हो गए
18:43क्या तु सच में स्कूल में पढ़ेगा
18:48उसने मा का हाथ पकड़ा और बोला
18:51अम्मा अब मैं सिर्फ कुडा नहीं चुनूँगा
18:54मैं सवाल चुनूँगा
18:56मा की आखों से आसू निकल पड़े
18:58उस राद जुग्गी की छट के नीचे पहली बार डर नहीं
19:01उम्मीद सोई
19:02लेकिन जिंदगी की असली लड़ाई अभी शुरू हुई थी
19:05और आर्यन तयार था
19:07कुछ महीने बीद गए
19:09ग्यान दीप वर्ल्ड स्कूल की वही क्लास
19:11वही ब्लैक पोर्ड
19:12लेकिन अब एक फर्क था
19:14पहली बेंच पर बैठा एक लड़का
19:16जो कभी दीवार के बाहर खड़ा रहता था
19:18आर्यन अब नियमिच छात्र था
19:21शुरू में उसे अंग्रेजी में दिक्कत हुई
19:39और वो खड़ा हो जाता
19:40एक दिन मीरा महरा मैडम ने
19:42पूरी क्लास से कहा
19:43आज का सवाल आर्यन समझाएगा
19:46ये वही मैडम थी जिन्होंने कहा था
19:49कि वो नहीं कर सकता
19:50आर्यन बोर्ड के सामने खड़ा हुआ
19:52उसने सवाल हल किया
19:54लेकिन इस बार उसने सिर्फ जवाब नहीं दिया
19:57उसने हर स्टेप समझाया
19:59अगर आप डरेंगे तो सवाल बड़ा लगेगा
20:02अगर उसे टुकडों में तोडेंगे
20:04तो वही आसान हो जाएगा
20:07प्रिंसिपल अर्विंद चोहान पीछे खड़े थे
20:10उनके चहरे पर संतोश था
20:11कुछ ही समय में आर्यन ने
20:14राज्य स्तरिय गनित प्रतियोगिता जीती
20:16अखबारों में खबर छपी
20:18जुकी से निकला गनित का सितारा
20:20लेकिन जब पत्रकार ने पूछा
20:22तुम्हें 50 लाख मिलने पर कैसा लगा
20:24आर्यन ने जवाब दिया
20:26मुझे सबसे बड़ी दौलत स्कूल का
20:29वो बोर्ड मिला जिस पर मैं लिख सकता हूँ
20:32धीरे धीरे उसकी बस्ती के और बच्चों को भी
20:35स्कूल में दाखिला मिलने लगा
20:36प्रिंसिपल ने एक नई पहल चुरू की
20:39जरूरत मंद प्रतिभाशाली बच्चों के लिए
20:41विशेश स्कूलर्शिप
20:43मीरा मैडम अकसर कहती
20:45हमें हर बच्चे में संभावना देखनी चाहिए
20:48कमी नहीं
20:50एक शाम आर्यन स्कूल की छट पर खड़ा था
20:53सूरज डूब रहा था
20:54उसे अपना पुराना बोरा याद आया
20:56जो उसने कूरे दान में फेंक दिया था
20:59वो मुस्कराया
21:00वरीबी ने उसे रोका नहीं
21:02लोगों के शब्द उसे तोड़ नहीं पाए
21:04उसने समझ लिया था
21:06असली अमीरी पैसे से नहीं आती
21:08असली अमीरी दिमाग और होसले से आती है
21:12और उस दिन जब उसने फिर एक मुश्किल सवाल हल किया
21:16तो उसे पचास लाग से ज्यादा खुशी मिली
21:19क्योंकि अब वो सिर्फ सवाल नहीं सुलजा रहा था
21:21वो सोच बदल रहा था
21:23और शायद यही किसी भी इंसान की सबसे बड़ी जीत होती है
21:28अगर आपको ये कहानी दिल से चुगई हो
21:31तो इसे लाइक जरूर करें
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