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Maulana Salman Husaini Nadwi Passes Away: मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मौलाना सलमान हुसैनी नदवी (Maulana Salman Husaini Nadwi) का 72 वर्ष की उम्र में लखनऊ में निधन हो गया है। वे लंबे समय से दारुल उलूम नदवतुल उलेमा से जुड़े रहे और देश-विदेश में अपनी विद्वता के लिए जाने जाते थे। अयोध्या विवाद को आपसी समझौते से सुलझाने की उनकी ऐतिहासिक पहल को हमेशा याद रखा जाएगा। इस वीडियो में जानिए उनके पूरे जीवन, उनकी महान विरासत और उनके सफर के बारे में। मौलाना जी को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि। पूरी जानकारी के लिए वीडियो को अंत तक देखें।

Maulana Salman Husaini Nadwi Passes Away: Renowned Islamic scholar and educator Maulana Salman Husaini Nadwi has passed away in Lucknow at the age of 72. Coming from a highly respected lineage of scholars, he dedicated his life to education and Islamic theology. He made headlines across the nation for his courageous and peaceful stance on the Ayodhya dispute. In this video, we pay tribute to his immense legacy and look back at his remarkable journey. Watch the full video to know more about his life and contributions. May his soul rest in peace.

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Transcript
00:03देश और दुनिया में मशूर इसलामिक स्कॉलर मौलाना सल्मान हुसैनी नद्वी का इंतकाल हो गया है।
00:301954 में लखनव में हुआ था उनके परिवार को पेगंबर मौम्मद के नवास इमाम हुसैन के वइंस से जुड़ा माना
00:36जाता है।
00:36उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दारुलूम नद्वत अलुमा लखनव से हासिल की है।
00:42सबसे खास बात ये है कि उन्होंने बहुत ही कम अमर में ही कुरान हिफ्स कर लिया था।
00:46इसके बाद मौलाना नद्वी ने शरीयत और दूसरे धार्मिक सबजेक्स की पढ़ाई की है।
00:50मौलाना नद्वी ने साल 1974 में नद्वत अलुमा से ग्राइजवेशन की डिगरी हासिल की थी।
00:56इसके बाद उन्होंने मुस्लिम नौजवानों को एक जुट करने के लिए जमियत शबाबुल इसलाम नाम का एक संगठन भी इस्थापित
01:03किया।
01:04बाद में उसी संस्था से हदीस में मास्टर डिगरी हासिल की। बाद में मौलाना नद्वी ने साओधी अरब की इमाम
01:09मुहमद इबने साओध इसलामे की युनिवरसिटी में पढ़ाई की थी।
01:12वहाँ उन्होंने मशूर इसलामिक स्कॉलर शेक अब्दुल फत्ताह अबू गुद्धा की देख रेक में हदीस की पढ़ाई की।
01:18और 1980 में मास्टर की डिगरी हासिल की इसके बाद वो भारत लोट गए। बारत लोटने के बाद नद्वी एक
01:24फैकल्टी सदस्य के तौर पर दारुलूम नदवत उलमा से जुड़े और दशकों तक फैकल्टी ओफ दावा एंड शरिया के दीन
01:32बने रहे।
01:33उन्हें भारत और विदेशों के छात्रों की कई पीडियों के लिए एक प्रभावशाली, शिक्षक और एक मार्ग दर्शक माना जाता
01:40था।
02:03मेडिकल कॉलिज और अस्पताल के अध्यक्ष दारुलूम सेद एहमद शहीद, कटॉली के चांसलर और जामियत शबाब लिस्लाम के अध्यक्ष के
02:10तौर पर काम किया है।
02:11मुलाना नद्वी कई मैडिकल इंजिनिरिंग और सूचना प्रदोगी की संस्थानों की स्थापना से बजूडे रहे।
02:16वो मुस्लिम देशों खासकर अरब राजशाहियों के मुखर आलोचक थे। उनका आरोप था कि ये देश सामराज्य वादी ताकतों की
02:23साज़िशों और हमलों के लिए बेहद कम आवाज उटाते थे और एकदम उदासीन बने रहते थे।
02:36मुलाना सल्मान हुसैनी नदवी का नाम देश की मुख्यधारा की मीडिया में तब सबसे ज़्यादा गूंजा जब आयोध्या का समवेधन
02:41शील, राम जन्म भूमी और बाबरी मजजित विवाद अपने चरम पर था। उस वक्त मुलाना सल्मान नदवी All India Muslim
02:47Personal Law Board के एक बहु
03:33जाया जाना चाहिए।
03:35बढ़ावा देने की बात की। फिलाल आप क्या कहना चाहिए। कॉमेंट सेक्षिन में हमें लिकर ज़रूर बताएं। वीडियो को लाइक
03:39करें, शुर्य करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें।
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