00:01ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
00:34पूर्णिया के वद्वान पंडित विद्यानंद ज्ञा वर्षों से इन अमूल्य पांडूलीपियों को सहेचने में जुटे हुए हैं
00:41अब देख रहे हैं इसमें इसमें गांठ पड़ा है इसलिए पुस्तक का नाम ग्रंथ होता है
00:47जो गांठ देखर के पुस्तक बांधा जाता था उसमें में देख रहे हैं आप जो इसलिए इसको ग्रंथ भी कायाता
00:56है
00:56तो अलग-अलग काल में इसका जो लेखन सामिग्री है इसका स्याही बगेरा जो बनता था उभी जड़ी बुटी से
01:05बनाया जाता था
01:06और ऐसे रस में घोला जाता था उस जड़ी बुटी को जला के उसके राख को जो अक्षून रहे हैं
01:12अमीत रहे हम उनीस पिढ़ी से यह काम कर रहे हैं उपलब्ल जो है यह लग-बग मेरे एकारभी पिढ़ी
01:19का दस्मी पिढ़ी का नौमी पिढ़ी का और उसके बाद के लो
01:36उसे मेरे पास पुष्टक उपलब्द है उनका रेफरेंस है पुराना लग-बग आपको साड़े चार से इसमी से करीब 500
01:43वर्ष पुराने इंताड़ पत्रों का संग्रक्षन आसान नहीं है नमी धूल और समय के प्रभाव से यह धीरे-धीरे शतिगरस्त
01:51हो सकते हैं इसलि�
01:53विद्यानंद ज्हाव विशेश साफ्थानी के साथ इनकी सफाई सुरक्षित रख रखाव और डिजिटली गरण कर रहे हैं उनका उदेश्य है
02:01कि आने वाली पीडियां भी अपनी एतिहासिक और सांस्रितिक विरासत से जुड़ी रहें उनके इस कारे के लिए जिला प्र�
02:19उसे ज्यादा वर्स्म से उसे संदक्षित करके रखा है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह जितनी भी पॉंडू
02:31लीपियां है या किसी सामाने कालज पर नहीं लिखी गई है यह सारी की सारी पॉंडू लीपियां तार का जो
02:38पत्ता होता है तार की पेर का जो पत्ता होता है
02:44digital
02:46yoke
02:46digital yoke
02:46digital yoke
02:46digital yoke
02:48digital yoke
02:50digital yoke
02:52digital yoke
02:54digital yoke
02:55digital yoke
02:59digital yoke
03:01digital yoke
03:10पूर्णिया से ETV भारत के लिए अभैकुमार सनहा की रिपोर्ट
Comments