00:00परिवार के कई सिदस और इस्तानी लोग छज्जे और छट पर खड़े होकर महरम के जुलूस देख रहते हैं
00:04अचानक छज्जा गिर गया भार नहीं सैसे का रहते हैं
00:08और दो मासुमों की मासुमों दस लोग गायल बताए जा रहे हैं
00:13भायलों की हलत भी कंबीर है लक्नों मैं महरम जुलूस के दोरान ये चज्जा गिर गया
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