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कैलाश पर्वत से जुड़े दावों और विश्वास की पड़ताल, देखें अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय
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00:27गर्प और प्रत्वी कहीं आई
00:30कर अगर बिलते प्रतीत होते हैं तो वो है कहला शुरु अने बावा सेलेक करते हैं कि किसको आना है
00:39यहाँ पे श्रद्दा के सिवाई कोई नहीं पहुंचेगा
00:42वो आप सील करते हो इस वरी डिफिकल्ट तो एक्स्प्रेस
00:47रम्हा की इंवानस से बनाए बान सरुष
00:51आत्मा से प्रमात्मा का मिलन यहीं होता है
00:56केरास की परक्रमा करने के मतलब है कि भगवान सिवकी साचाथ परक्रमा करने
01:04महादेव तो अद्भूत कल्पना से भी परी
01:13कैलाश है जिसे प्रम्हांड का केद्र कहा गया
01:16तो एक हमारा जीवन का सपना सच हो गया है
01:20सब कुछ मिल गया हुआ जाती है
01:23इससे अद्भूत इससे आविश्वस्तिय इससे अकल्पनिय जगय
01:27बला कहा हो सकती
01:38नमस्कार मैं श्वीता सिंग आपको लेकर आई हूँ
01:40प्रम्हांड की सबसे पवित्र माने जानी वाली जगय
01:43कैलाश
01:44हम कैलाश परवत की परिक्रमा इस समय कर रहे हैं
01:48और परिक्रमा करते हुए कैलाश परवत से जुड़े वो सभी रहस्या आपको बताएंगे
01:59क्या वेज्ञानिक कहते हैं क्या आम लोग कहते हैं
02:02क्या पंडित कहते हैं और इन सब के बीच तथे क्या कहते हैं
02:07हकीकत तो ये है कि आज तक कोई भी कैलाश परवत की चोटी तक नहीं चड़ पाया
02:11हशकिकwent तो ये भी है कि भी दुनिया के अलग अलग अलग देशों के पर्वता地 रोह होийकangs नहीं कहा है
02:16कि जम भी उन होने की कोशिश की तो डीकर प्रकी से पूरी तरीके से प्रतिवंधित है इसती No
02:30लेकिन सच्चाई ये भी है कि जब उससे पहले लोगों ने प्रयास किया तो बाउन तेवरिस तक कहुच गए पर
02:38कैलाश परवत तक नहीं
03:02हो तो आते के दिन्म का और देव जो आदी भी है और अंत महादेव जो स्विष्टी के स्रिजन करता
03:26भी है और संधारत
03:34महादेव जो नील कंट भी है और गंगाधर भी
03:44महादेव जो घट घट वासी भी है और कैलाशी
03:53क्या महादेव आज भी निराजते है कैलाश परवत्वन
04:00जहां पर भोले है वहां पर सब कुछ आदमी भोल जाता है केवल ओम नमस्षिवा ओम नमस्षिवा करते हुए यहां
04:08तक पहुच जाता है
04:19आज इन सभी पवित्र मान्यताओं को महसूस करने
04:22मेरे साथ चलिए उसी पवित्र कैलाश परवत की अद्भुत यात्रा पर
04:27जो दुनिया भर में करूडों की आस्था का केंद्र है
04:43चुकि कैलाश मान्सरोवर चीन में Autonomous Region of Tibet में स्थित है
04:48यहाँ पहुचना जटिल भी है और इसमें समय भी लगता है
04:53तीर थ्यात्रियों के लिए दो रास्ते हैं
04:56पहला लीपु लेख दर्रे का रास्ता जहां उत्तराखंड के धारचुला से शुरुआत होती है
05:01फिर गुंजी, नाभी, काला पानी होते हुए पुरांग और फिर कैलाश मान्सरोवर की परिक्रमा इसमें लगभग 22 दिन लगते हैं
05:09दूसरा रास्ता, नाथूला, जिसमें सिक्किम के गैंग टॉक से होते हुए शेराथांग, जोंगबा, दार्चेन और फिर कैलाश मान्सरोवर की परिक्रमा
05:20इसमें भी 22 से 23 दिन लग जाते हैं
05:26मेरी यात्रा इस से कम समय की थी, जिसमें चीन के शहर चेंगदू से शुरुआत करनी थी
05:31कैलाश मान्सरोवर यात्रा के लिए फिट होना भी बहुत आवश्चक है, क्योंकि इसमें 51 किलोमीटर की परिक्रमा शामिल है, वो
05:38भी लगभग 17,000 फीट की उचाई पर
05:43अभी चेंगदू में इसमें मौजूद हूँ, जो कि हमारा पहला पेस रहा है यहां पर चीन पहुचने के बाद, अलग
05:51-अलग रास्ते हैं कैलाश मान्सरोवर यात्रा जाने के लिए, और हमें जो रास्ते जिस रास्ते से ले जाया जा रहा
05:58है, यहां सिर्थ अब इसके बा
06:11सदियों से किसी प्रकाश स्तंब की तरह निमंत्रण देता आ रहा है, उन धर्म जिग्यासूओं को, जिन्हें तलाश है मोक्ष
06:19की, जिन्हें तलाश है शान्ती की, जिन्हें तलाश है शिर्थ की
06:29गरीब दो घंटे पचास मिनिट की हवाई यात्रा के बाद, मैं पहुची लासा, यानि तिबबत, यानि वो भूमी जहां आधिकाल
06:38से रहते हैं महाले
06:45जिसके आगे फिर अब हम पुरांग की तरफ जाएंगे और पुरांग के बाद हम पवित्र परवत के दर्शन कर पाएंगे
06:54गये कैलाश परवत के ही नहीं, बलकि मानसरूवर जील के भी दर्शन कर पाएंगे
06:59ये मान्यताएं हैं कि आप वहां का जल लेकर आते हैं और आप क्या जीवन का उद्धार हो जाता है
07:07अगर आप ये दर्शन कर लेते हैं प्रत्यक्ष अगर महादीब के निवास को आप अपनी आखों से देख लेते हैं
07:11यहां से आगे जाएंगे धीरे धीरे ऑल्टिट्यूड �
07:13और आगे बढ़ेगा तो जब हम आते हैं जाएं किसी भी रास्ते में से आप भारत से आ रहे हो
07:18लेकिन आपको धीरे धीरे उस ऑल्टिट्यूड के लिए अपने शरीर को तैयार करना होता है अभी धीमे-धीमे हमें कदम
07:25अपने रखने हैं बहुत देजी से कोई काम नहीं कर
07:43मन में एक अद्बुत एहसास था कि महादेव के निवास की ओर बढ़ रहे हैं लासा से आगे की यात्रा
07:50का पल-पल आध्याक्मिक रोमांच से भरा था
07:54लासा में एक रात रुकने के बाद हम अगली सुबह अंतिम पड़ाओ की ओर निकल पड़े पुरांग काउंटी तिबबत के
08:03पश्चिम भाग में स्थित पुरांग काउंटी भारत, नेपाल और तिबबत की सीमा पर पड़ता है ये जगे 13200 फीट की
08:12उचाई पर स्थित है
08:23क्याकाश परवत यकीन मानगे कि जब तक आप दूसरों के दर्शित को अनुभग सुनते हैं तो आपको लगता है कि
08:30पदा नहीं आपको क्या नजर आएगा कई लोग इतने भी थागेशाली होते हैं कि कहते हैं कि हमें तो श्रीव
08:37जी पाट्रवी जी जाक्षात पहावर न�
08:53क्यालाश परवत के दूर से दिव्य दर्शन किये जा सकते हैं संपूर परवत की पैदल परिक्रमा की जा सकती है
08:59लेकिन कैलाश परवत के शिखर पर चढ़ा नहीं जा सकता वोई आज तक चढ़ भी नहीं सका है
09:10खैलाश मानसर ओवर एक बहुत ही इंपोर्टन प्लेस है स्पिरिचली बहुत सारे रिलिजिंस के लिए हिंदुविजम के लिए बुद्धिजम के
09:19लिए तो ये परवत जो है इस पे परमिशन नहीं होती चढ़ने के लिए चाइनी से ही नहीं लेकिन पहले
09:25से भी लोग उस �
09:28को बहुत ही मान देते हैं और बगवान का दर्जा देते हैं तो बगवान को हम सर्फ पैर चूते हैं
09:34कभी सिर के ऊपर ने चड़ते तो कभी कैलाश मानसर रोवर इसले ने चड़ा जाता एक रिलिजिजिस पॉइंट व्यू से
09:46दुनिया में जितनी भी उची चोटिया हैं उनमें से अधिकांश को इनसान जीट चुका है अपना जंडा गार चुका है
09:54उन चोटियों पर लेकिन कम उचाई वाले कैलाश परवत पर आज तक कोई नहीं चड़ सका आखिर क्यूँ
10:01पहाड़ों पर इनसानों की चड़ाई की पहली कोशिश 1492 में दर्ज हुई अठारा सो पचास में एक स्पोर्ट के तोर
10:10पर इसका विस्तार हुआ लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कैलाश परवत की चूटी तक कभी कोई परवतारोही नहीं पहुँच सका
10:20है
10:21तो क्या ये सच है कि कैलाश के उचाईयों पर विजए हासल कर पाना इनसान के बस की बात ही
10:28नहीं
10:28कि भगवान शिव का यहँं साच्छा निवास है
10:33इस पांच बखतवा शरीष भजप वहां की यात्रा से मवब नहीं है
10:38कि वहां सब सिद्धों का निवास है वह यहां सबस्त्वर कला झरते हैं
10:42इसलिए कोई सामान ने प्राणि वहां जा नहीं सकते
10:46इस पांचवत शरीष से कोई वहाँ पर जाकर के भगवार शुब के प्रतिश दर्शन नहीं कर सकता
10:51यह केई कारण है कि भगवार सुब के यहाँ निवास होने के कारण
10:55कोई व्यत्ति या परवता रोह आपर नहीं चड़पाया है
10:59साइट आगे भी कोई वाने जा पाई
11:02कैलाश परवत और कैलाश शेत्र पत गेहन रीसर्च करने वाले अंग्रेज परवता रोही यू रटलिच ने कैलाश पर परवता रोहन
11:12को बिल्कुल असंभव बताया
11:14उनके साथ करनल विल्सन और शेर्पा टी स्टेन भी थे
11:18विल्सन ने दावा किया कि शेर्पा ने उन्हें कहा था कि वो कैलाश पर चड़ सकते हैं
11:23विल्सन ने कहा कि जब उन्होंने कैलाश को दक्षन पूर्वी पहारी दिशा की तरफ से देखा
11:29तो लगा कि हाँ चड़ा जा सकता है लेकिन फिर जो अन्भव हुआ वो अद्भुत था
11:35विल्सन ने कहा
11:37जैसे ही मुझे लगा कि मैं एक सीधे रास्ते से कैलाश परवत के शिखर पर चड़ सकता हूँ
11:42भयानक बर्फ बारी ने रास्ता रोग दिया और चड़ाई को असंभव होना दिया
11:55कुछ परवतारोंयों ने माना कि कैलाश पर कभी नहीं चड़ा जा सकता
12:00तो कई ने ये माना कि कैलाश तक पहुँचने का एक सीधा रास्ता है
12:05विल्सन के अलावा रूस के परवतारों ही सरगे सिस्तियाकोव का अनुभव भी ऐसा ही रहा
12:14जब मैं परवत के बिल्कुल पास पहुँच गया मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा
12:18मैं उस परवत के बिल्कुल सामने था जिस पर आज तक कोई नहीं चड़ सका
12:23अचानक मुझे बहुत कमजोरी सी महसूस होने लगी
12:26और मन को यह खयाल तेजी से जगड़ने लगा
12:28कि मुझे यहां और नहीं रुकना चाहिए
12:31यहां से तुरंट वापस लोट जाना चाहिए
12:33जैसे जैसे हम नीचे आते गए
12:35मन हलका होता गया
12:37असरे लोगों ने कोशिश करी शुरू शुरू में जैसे पीड़ था
12:41कि बहुत लोगों ने उओपर जाने कोशिश करी
12:43और उन लोगों को नेक्षरल प्राब्लम से आई
12:47कि जैसे एक दम से तुपाना देगा
12:50कि एक दम से अब वहां के लाश तरी से डेज़ट रिदीस्तान है
12:56तो वहां पे एक दम से हर्ड्स ओफ एनिमल्स आजाते हैं
13:03तो किसी आत्मी के हाट में प्राब्लम हो जाते हैं
13:07तो यह जितने लोगों ने कोशिश करी उनको किसी न किसी वज़ा के कारण उसको कैंसेल करते हैं
13:17आज कैलाश परवत पर चड़ाई पे पाबंदी है
13:20लेकिन कैलाश पर चड़ाई की कोशिशें कोई आज की बात तो नहीं है
13:24यह 20 मी सदी की शुरुआत की बात है
13:27जब स्थानिये लोग इस स्थिती में ही नहीं थे कि अपनी आस्था के नाम पर पश्चिमी देशों के परवतारोहियों को
13:33रोक पाते तब भी परवतारोही कैलाश के रहस्य से अभिभूत थे
13:39आस्ट्रियन लेखक और मशूर परवतारोही हरबर्ड टिचे ने 1936 की एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि जब उन्होंने
13:49तिबबत के धर्मगुरू से सवाल किया कि क्या कैलाश पर चड़ा जा सकता है तो उन्हें अद्भूत जवाब मिला
14:02जो इनसान पूरी तरह पाप मुक्त हो वही कैलाश पर चड़ सकता है और ऐसा करने के लिए उसे बर्फ
14:08की दिवारों के रास्ते नहीं जाना होगा बलकि वो एक पक्षी की तरह सीधे परवत शिखर पर जा सकता है
14:19कैलाश पर चड़ने की आखरी कोशिश का रेकॉर्ड साल 2001 में मिलता है जब चीन ने अंतिम बार स्पेन की
14:26एक टीम को कैलाश पर चड़ने की अनुवती दी थी
14:29लेकिन दुनिया भर के लोगों की गड़ी प्रतिक्रिया मिलने लगी जो ये मानते थी कि कैलाश पवित्र स्थान है और
14:36उस पर चड़ाई नहीं करने देना चाहिए
14:38इन प्रतिक्रियाओं का परिणाम ये निकला कि कैलाश पर परवता रोहन को पूरी तरीके से प्रतिबंधित कर दिया गया
14:47लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 2001 में जब कैलाश पर चड़ाई पर प्रतिबंध लगा तब तक दुनिया की सबसे
14:57उंची चोटी माउंट एवरिस्ट पर 1500 परवतारोही चड़ाई कर चुके थे
15:05माउंट एवरिस्ट की उंचाई 29,031 फीट है और कैलाश की उंचाई 21,778 फीट है अब तक माउंट एवरिस्ट
15:15पर लगभग 7,000 लोग चड़ चुके हैं लेकिन कैलाश पर आज तक कोई
15:24दुनिया भर के तमाम परवतारोहियों ने कैलाश को जीतने की कोशिश की लेकिन न केवल हार कर लोटे बलकि उन्होंने
15:31लोटने के बाद जो दुनिया को बताया वो और विश्वत्निय भी है और और कल्प्निय भी है
15:39क्या हर परवतारोही का अनुभव भ्रह्म था अगर नहीं तो कौन चीन लेता है परवतारोहियों से उनकी शक्ति ये रहस्य
15:51क्या है
15:55जो वहाँ पर एनर्जी थी वो एनर्जी इतनी ज़्यादा थी और इतनी शांत करने वाली है कि आप सब कुछ
16:04भूल जाते हैं डिटैच हो जाते हैं
16:06भूले नाथ की किर्पा जिस पर है उसको किसी प्रकार का कौई क्ष्ट नहीं है बागी तो जब अगर कष्ट
16:13नहीं होगा सब
16:14चीज सरल हो तो फिर भूले को कौन याद करें हमें जो सबसे बडा सारा मिला भगवान शिवजी का है
16:20वीयर हमें हमें
16:35का क्षेतर होता है ट्रांस हमालियन ट्रांस हिमालियन में जो केलाश रेंजे κάν़ लेंज में सबसे प्रमुख परवत कौन तो
16:43शिव का निवास केलाश ओघरदानी नील
16:49महादेव ने महलों को कभी नहीं चुना ओघरदानी शिव ने चुना कैलाश को कैलाश और काशी के वासी महादेव
17:09अगर ये माना कि आस्था का सम्मान करते हुए परवतारूहियों ने कैलाश पर पाउन नहीं रखा
17:15तो हमें उन परवतों से तुल्ना करनी होगी जो अपने क्षेत्र में इसी तरह से पवित्र माने जाते हैं
17:20जैसे कंचन जंगा, कंचन जंगा पर चढ़ाई पे प्रतिबंद 1955 में लगा, उससे दो साल पहन, 1953 ब्रिटिश परवतारूही चाल्स
17:31इवांस ने परवत पर चढ़ाई कर ले थी
17:33इसके अलावा माउंट ओलंपस, माउंट किना बालू सब अपने अपने इलागों में पूजनी हैं, पर परवतारूही ओं का दल वहां
17:41जाने से नहीं रुका
17:44किसी भी पहाड पर चढ़ने में सबसे ज्यादा दिक्कत आती है ऑक्सिजन की कमी की
17:49अलग-अलग उचाईयों पर शरीर को हवा में मौजूद ऑक्सिजन की मात्रा के हिसाब से खुद को ढालना होता है
17:55वातावरण में समुद्र स्तर पर 20 प्रतिशत ऑक्सिजन होती है, जैसे जैसे समुद्र स्तर से उचाई बढ़ती जाती है
18:02हवा का दबाव कम होता है और हवा में मौजूद ऑक्सिजन के साथ साथ दूसरी गैसों की मात्रा भी कम
18:08होती जाती है
18:09लेकिन प्रतिशत उतना ही रहता है, यानि हवा का दबाव कम होने के कारण ऐसा मैसूस होता है कि ऑक्सिजन
18:16की कमी है
18:17अब उंचाई पर पहुँचने में हर सांस के साथ शरीर में कम ऑक्सिजन जाती है
18:22करीब 3600 मीटर की उंचाई पर बैरोमेट्रिक प्रेशर या हवा का दबाव घट जाता है
18:28इस उंचाई पर सांस लेने के लिए 40% कम ऑक्सिजन के कणिया मॉलिक्यूल्स होते हैं
18:34जिसकी वज़े से शरीर को इस उंचाई पर कम ऑक्सिजन के आदर डालने होती है
18:40लोग जो ये हाई अल्टिट्यूट ट्रेक करते हैं के लाश मांसरोबर की तरह उन्हें AMS का ध्यान रखना पड़ता है
19:04बहुत सारा पानी पीना है और एलेक्ट्रोलाइट्स लेना है सिफ पानी पीने से आपके शडीर के अंदर जो सौल से
19:12वह वाश आउट हो जाती है तो वह भी एक प्रॉब्लम कडी कर सकती है
19:15आप उसके साथ एक पोर्टबल ऑक्सिजन सिलिंदर भी ले सकते हो और जाने के पहले अपने डॉक्टर से और एक
19:24मेडिकल कंसल्टेशन करने के बाद ही आप ऐसे ट्रेक्स पर जाएं
19:42आउट एवरिस्ट की उचाई पर ऑक्सिजन समुद्र स्तर पर मौजूद ऑक्सिजन से दो तिहाई कम है
19:48यह बिलकुल वैसा है जैसे आप सीड़ी चणे और तीन की बजाए एक बार सांस ले
19:55एक समान्य प्रक्रिया अपटिया है सुपर हाई ऑल्ट टूट्ट पर आप है गट और आपको चेक करना होता है
20:02अपना अक्सिजन
20:03काम एक ख्या को हमाच पट्रक्स पर?
20:2586 वेरी गुड यह बहुत अच्छे कि श्रिणी में आता है यह सूपर हाई ऑल्टिट्यूड है 12,000 फीट की
20:35एक्लेमिटाइजेशन से शुरुआत होती है 12,000 फीट एक दिन नहीं लेकिन मतलब जादर दिन आपको रुखना पड़ता है लेकिन
20:42उसके बाद हम आगे बढ़े हैं
20:47कैलाज परवत की उचाई 6639 मीटर है पर शरीर पर ऑल्टिट्यूड का असर कहीं ज्यादा महसूस होता है इतना तो
20:56सपष्ट है कि माउंट एवरेस्ट के मुकाबले बहतर ऑक्सिजन लेवल होता है पर फिर भी लोग इस पर नहीं चड़
21:02पाए और जिसने कोशिश की उनको �
21:05तिशा अब्रहम वुआ क्या यहां मौजूद ऑक्सिजन खून में आसानी से नहीं मिलती जिसकी वज़े से इस पर जाने वालों
21:11को सास लेने में दूसरे उंचे पहाड़ों के मुकाबले ज्यादा दिक्कत होती है सवाल कही है जवाब शायद कैलाश की
21:20बुलंदियों में छ
21:33नजर आएगा अभी तो बादलों के पीछे बाबा केलाश शिपे हुए ऐसा नहीं निकाए कि पूरे समय आपको दर्शन होता
21:40है अभी वो बादलों के पीछे नजर आ रहे हैं लेकिन एक पिरमिट की तरह एक रूसी वैज्यानिक ने तो
21:47यहां तक कह दिया था कि बिलकुल �
21:52आपकेश्यानिक और प्रकृति द्वारा निर्मित नहीं लगता ये मानव निर्मिट एक परवत लगता है लेकिन चीनी वैज्यानिकों ने कहा कि
22:02ऐसा नहीं है एसा सही नहीं है उन्होंने अपनी तरफ से इसे नकारा पर देखें चार तरफ से इसको आप
22:09देख सकते हैं इस
22:21क्या वाकई कैलाश पर आकर सारी दिशाएं एक हो जाती है।
22:27क्या वाकई कैलाश यह फिर्मिट जिसे विज्ञान धर्ती की नाभी कहता है।
22:37कैलाश परवत के महत्व को उचाई की वज़े से नहीं बलकि इसके विशेश आकार की वज़े से समझा जाता है।
22:44इसका चौबुखी आकार दिशा बताने वाले कंपस के चार बिंदुओं जैसा माना जाता है।
22:50एक अवधारणा के अनुसार सतलुज, सिंदु, ब्रह्मपुत्र और घागरा चारू नदिया इस पूरे क्षेत्र को चार अलग हिस्सों में बाटती
22:57हैं जो पूरे विश्व के चार भागों को दर्शाता है।
23:01कैलाश पर्वत इसके केंद्र में है लिहाजा कैलाश को केंद्र बिंदु माना जाता है।
23:14एक शुद के अनुसार कैलाश पर्वत ही वो आक्सिस मुंडी है जिसे «Cosmic Axis», «World Axis» या «World Pillar» कहा
23:21जाता है।
23:22Axis Mundi लाटिन का शब्द है जिसका अर्थ होता है पृत्वी का केंद।
23:28पुराने जितने शास्त्र हैं हमारे उन सब शास्त्रों में लिखा हुआ है कि किलाश जो है उन पृत्वी के धूरी
23:34है।
23:35रशियन जो इसको Axis Mundi बोलते हैं।
23:39शास्त्र ये कहते हैं कि किलाश एक ऐसा परवत है कि जो पाटाल में भी है, तर्टी पर भी है
23:45और स्वर्गों तर्टी बोलते हैं।
23:50इसका वर्णन सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं है, बलकि अलग-अलग धर्मों और मानेताओं में अलग-अलग तरीके से
23:55माना गया है।
23:56हर सभ्यता ने अपने रहने की जगे को Axis Mundi माना है।
24:00मिसाल के तोर पर चीन का पुराना नाम Middle Kingdom इसी लिए पड़ा, क्योंकि उनका मानना था कि चीन पृत्वी
24:06के एकदम बीचों बीच है।
24:07फिर किसी पहाड या पेड जैसी उंची प्राकृतिक चीज को Axis Mundi मान लिया जाता था, जिसको आकाश और धर्ती
24:14के बीच के संपर्क का माध्यम माना जाता था।
24:17जिपन ने माउंट फूजी, चीन ने माउंट कुनलून, नेटिव अमेरिकंज ने ब्लाक हिल्स, और भारत और तिबपत ने कैलाश पर्वत
24:25को केंद्र माना,
24:26जूडाइजम में माउंट सिनाई, इसाई धर्म में माउंट ओलिव्स और इसलाम में मक्का को पृत्वी का केंद्र माना गया
24:43कैलाश्ट को प्रभ्मांड का केंद्र माना गया तो इसके कई पहलू है
24:47पहला कैलाश्ट परवत में पृत्वी का भौगोलिक केंद्र होना, दूसरा आस्मान और धर्ती का मिलन बिन्दू होना, तीसरा चारों दिशाओं
24:55का केंद्र बिन्दू होना
24:56और चौथा इश्वर और उनकी बनाई स्रिष्टी के बीच समबाद का केंद्र बिन्दू होना
25:17नियत है वो विज्ञान को नहीं सज किया तब भी माना आए कि कोई भूकम पाए कोई कुछ आए उसको
25:23केलास को कोई अश्तर नहीं कर पाता है क्योंकि वो इस्तंब्य के रूप में कार कर रहा है इसलिए उसे
25:28प्रकृति का मूलाधार माना जाता है
25:33सनातन व्यवस्था में जिसका इलाश परवत को भगवान शिव का निवास थान मानकर परिक्रमा की परंपरा है उसी तरह तिब्बत
25:41में परिक्रमा को कोरा कहा जाता है और इस परवत के परिक्रमा की परंपरा है
25:47अवधारणा है कि पूर जन्मों के पाप से मुक्ति मिल जाती
25:52साथ ही ये भी कि शिखर पर रहने वाली शक्तियों का आशिरवाद लिलता है
26:03केलाश परवत बहुत ही पवित्र जगे हैं
26:05तिबबती तूरिजम के लिए लोगों का यहां आना बहुत अच्छा है
26:08हम चाहते हैं दुनिया भर से परेटक यहां आए
26:15बौन धर्म जो की बौध धर्म से पहले का धर्म माना जाता है
26:19उसके अनुसार केलाश के इर्दगिर्द का पूरा क्षेत्र और नौ मन्जिला स्वास्तिक पहाड आध्यात्मिक शक्तियों का प्रमुक स्थान है
26:27जहां से आध्यात्मिक उर्जा मिलती है
26:37इसके अलावा भी केलाश परवत को लेकर अलग-अलग पंथ और धर्म में अलग-अलग मान्यताएं है
26:45बौध अनुआई केलाश को ब्रम्भांड की धुरी मानते है
26:49उनकी मानेताओं के अनुसार यही वो स्थान है जहां बौध गुरू रिम्पोचे ने सादवी आठवी सदी वे तांत्रिक क्रियाई की
26:56थी
26:56जिसके बाद दिबबत का मुख्य धर्म बौध धर्म बना
26:59वो ये भी मानते हैं कि ये भगवान बुद्ध के देम्चौक रूप का ग्रे स्थान है जिसे धर्म पाल भी
27:05कहा जाता है
27:06जैन अनुआई ये मानते हैं कि इस्थान को प्रथम तीर्थांकर ने आठ पगू में नाप दिया था
27:12जिसके कारण से अश्ट पद भी कहा जाता है
27:17इस पूरी परिक्रमा मार्ग पे दरसल हिंदूओं बौध जैन बौन सबकी आस्ता होती है
27:24इसलिए ये जो प्रार्थना के पहिये होते हैं प्रेयर वील्स जिने कहा जाता है
27:29इन पर मंत्र लिखे होते हैं और अगर आप इन्हें इस तरीके से खिला देते हैं तो आपकी प्रार्थनाए उस
27:39ईश्वर की पास पहुचती है
27:43क्योंकि मान्यता ये है कि जब इस तरीके से आप इस प्रेयर वील्स को घुमाते हैं तो वो हवाओं के
27:53साथ उपरवाले तक पहुच जाते हैं
28:05सवाल पड़ा है एक ही परवत के बारे में अलग-अलग धर्मों में एक ही तरह की मान्यता आखिर कैसे
28:13है
28:18कुछ तो अद्भुत होगा कोई तो अविश्वसनिये कड़ी होगी कहीं तो अकल्पनिये रिष्टा जूर्ता होगा
28:25और केवल कैलाश परवत ही नहीं ये संपूर्ण क्षेत्र अद्भुत है
28:32कि आए इस अकल्पनिये संसार के रहस्यों के बारे में समझते हुए हम आपको मान सरूबर लिए चले
28:43दूर मेरे पीछे देखिए कैलाश परवत और मेरे ठीक पीछे मान सरूबर रामायन में उनलेक मिलता है कि प्रभु श्री
28:53राम को महर्शी विश्वामित्र ने बताया कि उत्तर से एक ऐसा सरूबर है
28:58जो प्रम्हा के मानस से यानि भगवान प्रम्हा के मन से बना है उसे कहते हैं मान सरूबर और वहीं
29:06से निकलती है वो नदी सर्यू जो पहुचती है अयोध्या केवल सर्यू नदी ही नहीं बलकि सर्यू नदी के साथ
29:15साथ सतलुज, सिंधु, प्रम्ह पुत्र ये सभी नदिय
29:23पर स्थित है ये सरूवर इसकी उचाई लगभग 15100 फीत बताई जाती है और इस उचाई पर ये एक मीठे
29:33पानी का कीजील है मीठे पानी का सरूवर है बहुत अलग-अलग स्त्रोथ है इसके यानि कि जब बर्फबारी होती
29:40है बारिश होती है वो तो स्त्रोथ है ही इस सरूव
29:52पर है उसमें पानी आता है लेकिन मुख्य तोर पर जो मान सरोवर है उसका स्त्रोथ है कैलाश और इसलिए
30:01आप जब यहाँ पर तस्वीरों को देखेंगे उस सिधाई में देखेंगे तो आप समझ सकते हैं कि इसके जल को
30:06इतना पवित्र क्यूं माना जाता है जैसे गंगा जल
30:24इस उचाई पर मीठे पानी का सरोवर असामान्य नहीं है बर जो अध्भूत है वो है इस सरोवर के ठीक
30:34बगल में स्थित एक दूसरा ताल क्या कल्पना कर सकते हैं कि एक ही क्षेत्र में दो ऐसे ताल हूँ
30:42जिनके गुण धर्म बिलकुल अलब हूँ
30:44वो दोनों एक चानूल से जुड़ते हों लेकिन एक शुद्धता के साथ साथ जीवन का प्रतीक और दूसरा जीवन से
30:53रहित
30:57क्यलाश के दक्षण में सूर्य जैसी सनरचना वाला गोल ताल पवित्र मान सरोबर हैं
31:03जिसे ब्रह्म ताल भी कहते हैं और जिसके दर्शन करने दुनिया भर से शद्धा लुआते हैं
31:11क्यालाश के दक्षण पश्चिम में आधे चंद्रमा जैसा दिखने वाला ताल राक्ष्रस ताल जहां कोई नहीं जाना चाहता
31:25प्रम्भ ताल का शान्त पानी मीठा है जीवन दाए और इसी वज़े से इसमें जीव जन्तू प्राकृतिक वनस्पतियां पाई जाती
31:34है
31:34जब कि राक्ष्रस ताल का पानी इतना खारा है कि वहां कुछ भी नहीं पनप सहता
31:42मान्यताएं बताती हैं कि ब्रम्भ सरूवर सकरात्मक उज़्जा का केंद्र है जब कि राक्ष्रस ताल नकरात्मक उज़्जा का स्थ्रोथ
31:52क्या भौगोलिक तौर पर ये मुम्किन है कि चंद फीट के फासले पर दो इतने अलग-अलग जल स्ट्रोथ हैं
32:04कुल नजदिक नजदिक होते हुए भी एक्दम खारा और एक्दम मिशा पानी है
32:08ये शिप जी की महिमाई ही है ये की जगा से अपकी आरा है स्ट्रोथ
32:23संगर अगर आप कहो सत्ट्रोवर और उससे लगता हुआ राक्षय स्ताल यहाँ स्धानिया भाषा
32:37में अगर आप देखेंगे तो उसका मतलब यहीं होता है एक ऐसी छी जो नकराट्म ≃षर चाहानिया जो दोनों हें
32:45वोर्हवणosse जोड़ई हैं और इसे नार्य Sh 뒤에
32:48में नहीं नहीं नियुक्त हिन्दू मानिता है उसके अनुसार जो कता है वह यह है कि रावन यहां पर आया
32:59यहां आपको यह भी बता है कि यह एक चंद्राकार जील है यह वह यहां पर आया
33:08और उसने महादेव को खुश करने के लिए
33:11शिव जी को खुश करने के लिए
33:13एक-एक कर अपने दसों सरों की बली देनी शुरू की
33:17कहते हैं कि जब तक दसवे सर पर वो पहुंचा
33:20शिव जी जो की बेल पत्र के चड़ावे से भी खुश हो जाते है
33:24वो रावण के इस बलिदान से खुश हुए और उसे शक्तियों का वर्दान दिया तिबती मानेता की अनुसार रावण चाहता
33:31था कि शिवजी उसके साथ चले जाए और लंका में वास करें अब रावण ने यहां पर डूपकी लगाई तपस्या
33:40की शिवजी की लेकिन शिवज
33:51हो गए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर उसके अंग्ठे को ही वहां पर कुचल दिया कैलाश परवत के नीचे अपनी
33:58कुचले हुए अंग्ठे को निकालने के लिए कहते हैं कि रावण ने तब शिवजी दांडव स्त्रोध का पात किया और
34:06आखिरकार शिवजी ने �
34:08से एक शिरली भेट स्वरूप दिया और जाने दिया यहां से दुनिया भर के शोध करताओं ने इस बात को
34:21माना कि कैलाश परवत और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र आलोकिक शक्तियों का केंद्र है जो इस क्षेत्र में प्रवेश
34:29करता है वो इन शक्तियों को महसूस कर स
34:38अगर केवल महसूस करने तक ही होती तो इसे कछ लोगों के मन का भ्रम मान कर टाला जा सकता
34:43था वर लोगों के अनुभव तो तु कोई और ही बाद कहते हैं
34:50केला श्मान सरोर की यात्रे पर जाते हैं तो यात्रा एक बड़ा लोनली प्लेस है तो उसमें आप जाते हैं
34:57तो आप भगवान का ध्यान करते हैं आपने आपको देखते हैं तो आदमी शायद
35:01से नोटिस ज्यादा लेता है कि मेरे नाकून तेजी से बढ़ रहे हैं मेरे हैर करते हैं लिकिन ऐसा नहीं
35:07होता है नॉर्मल जब होते हैं तो लोग कितने दिन को बाल तो अपने बढ़ाता नहीं है शेव डेली करते
35:12हैं तो कोई नोटिस नहीं करता कितने दिन बाद बढ़ रह
35:15रहा है दूसरा नेल हम काटते हैं और नेल घिशते भी हैं जो हम काम कर रहे होते हैं तो
35:21आपके नेल लगेगा तो घिशेगा
35:25सनातन धर्म में कैलाश पर्वत को योगी, सन्यासी और तंत्र के महादेव, भगवान शंकर का निवास थान तो माना ही
35:33गया है
35:33विश्णु पुरान में कैलाश का वरणन कुछ इस प्रकार है
35:39कैलाश एक तरफ इस्फटिक, दूसरी तरफ मानिक, तीसरी तरफ सोना और चौथी और नीलम से बना है
35:45कैलाश पर्वत विश्णु का एक ऐसा इस्तंभ है तो छे पर्वत शंकलाओं के बीच कमल के फूल जैसा दिखता है
35:57कैलाश पर्वत अगर हर दिशा से अलग रत्म के चमत का अनुभव कराता है तो भगवान शिव के पंच मुखी
36:02रूप से भी जोड़ता है
36:05भगवान शिव के पांच मुख माने गए
36:07जिनमें सद्योजात मुख पश्चिमी दिशा का प्रतिनिधित्व करता है ये प्रित्वी तत्व का आधिपती है इसे स्रिष्टी के रचना का
36:16प्रतीक मानते है
36:17वामदेव मुख ये उत्तरी दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, ये जल तत्व का अधिपती है, इसे स्रिष्टी के पालन का
36:24प्रतीक माना गया है
36:25तत्पुरुष मुख ये पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और वायू तत्व का अधिपती है
36:30ये एक शरीर से दूसरे शरीर में आत्मा के स्थानांत्रण का प्रतीक है।
36:35इशान मुख ये उर्द्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और आकाश तत्व का अधिपती है।
36:40ये जीवों के मोक्ष का प्रतीक माना गया।
36:43पांचवा मुख है अगोर मुख ये दक्षन दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और अगनी तत्व का अधिपती है।
36:50ये स्रिष्टी के संघार का प्रतीक माना गया।
36:57मानसरोवर के ठीक सामने से भगवान शिव का दक्षनी मुख दिखता है।
37:01ये मुख उनके रौद्रो रूप का प्रतीक है जो संघारक माना गया है।
37:05मानसरोवर आने वाले तीर्थ यात्री जब मानसरोवर से कैलाश की पूझा करते हैं,
37:10तो वो उनके इसी रूप की पूझा करते हैं, जिससे अकाल मृत्यू या संकट मिठ जाने की माननेता है।
37:18यहां ऐसा माना जाता है कि देवी देवता सुबह आके स्नान करते हैं।
37:22इस जीन में हम जब नाते हैं तो हमारे जितने भी पाप कर्म है वो दूल जाते हैं।
37:40या आप अपन खड़े हैं पीचलेस। यह अभी तक हमने सुना था देखा था पढ़ा था अपनी आँखों से इसको
37:47साक्षा दक्रशन करना एक अलगी अनुवती है।
38:00जब भी शगधालू कैलाश परवत की परिक्रमा प्रारंब करते हैं तो उनकी पहली 10 किलोमीटर की परिक्रमा भगवान शिव के
38:08इसी दक्षणी मुखी रूप में होती है जिसकी शुरुवात के द्वार को यम द्वार कहा जाता है।
38:16पारहों महीने सफेद बर्फ की दुशाला ओड़े कैलाश के शिखर पर जब सूरज की किरने पड़ती है और चोटी स्वनिम
38:23आभा से चमक उठती है तब एक विश्वास और मजबूत होता है कि कैलाश सत्य है, सत्य शिव है, शिव
38:33ही सुन्दर है।
38:44भदवान शिव ने कैलाश परवत को ही अपना स्थान क्यों चुना, इसको लेकर भी अलग-अलग ग्रंथों में अलग-अलग
38:50माननेताएं मिलती हैं।
38:51कुछ माननेताओं की अनुसार भदवान शिव ने समुद्र मंधन के बाद जब विश्पान किया, तो उसके बाद वो कैलाश पर
39:00चले गए। और वही तपस्या में लीन हो गए। उनका पूर्ण ज्यान यही सनरक्षित माना जाता है।
39:08कुछ का मानना है कि मानसोरुवर स्रिजन का प्रतीक है, तो संगहारक रूप लेकर महादेव कैलाश पर निवास बना कर
39:16रहने लगे और जग में कैलाश पती के नाम से जाने गए।
39:19कुछ माननेताओं के अनुसार ब्रह्मान्ड का केंद्र होने के कारण ये स्थान आध्यात्मिक रूप से अधिक सम्रिद्ध है किसी लिए
39:28महादेव ने इसे तपस्या के लिए चुना।
39:31एक विश्वास ये भी है कि पृत्वी पर जब हिम युग था तब भगवान विश्णू ने रहने के लिए समुद्र
39:37चुना।
39:38ब्रह्मा जी ने नभी और महादेव ने कैलाश की उचाईयों पर अपना डेरा जमाया।
39:43जब विवाह माता पार्वान विश्णू ने रहने के लिए समुद्र चुना।
40:09पौरानिक कथाओं के अनुसार भगमान शिव का जब विवाह माता पार्वती से हुआ तो वो कैलाश से नीचे उत्रे और
40:16ऐसे स्थान के तलाश की जो आध्यात्मिक रूप से पवित्र हो इसी तलाश के चलते वो काशी गए।
40:28श्रद्धालू जब कैलाश की यात्रा पर होते हैं तो अक्सर उन्हें अलग-अलग तरह का अनुभव होता है।
40:37क्या आस्था का ये अद्भुद विश्वास केवल मन का वहम हो सकते हैं।
40:43वैज्यानिक दृष्टिकोन से इसके कई जवाब दिये जा सकते हैं।
40:47कई वैज्यानिक ये भी कहते हैं कि कई दिनों की ठकान की वज़े से कुछ रधालूओं को भ्रम हो जाता
40:53है।
40:53या ऑक्सिजन की कमी की वज़े से मन कालपरिक तस्वीरें देखने या आवाजें सुनने लगा।
41:05है या अधिट्व पर जाते हैं तो रेरीफाइ हो जाती है जो आपकी एयर है वो थिन हो जाती है
41:13और एयर प्रेशर कम हो जाता है उससे ब्रेड अधिमा बढ़ जाता है
41:17स्वेलिंग होने से हैलूसिनेशन होने लगते हैं ब्लैक आउट होने लगते हैं वोमेटिंग हैडेक फिंट हो जाता आदमी और अगर
41:26ट्रीटमेंट ना मिले तो मिर्ति हो सकती है
41:29सब्यों का विश्वास ये कहता है कि कैलाश शिखर भोले शंकर का साधना स्थल है जिसकी शक्ति को पीड़ियों ने
41:37महसूस किया और यहां वही होता है जो महादेव की मजी होती है
41:45अद्भूत और विश्वसनिये और कल्पनिये में आज के लिए इतना ही देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप
41:50देखते रहिए आज तक
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