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Who are the Nihang Sikhs and why are they making headlines in Uttarakhand? This video explains the history of the Nihang Sikh community, why they are called the "Guru's Beloved Army," their connection with Guru Gobind Singh, Hemkund Sahib, and the recent controversy in Uttarakhand. Watch this detailed explainer to understand their traditions, identity, and the latest developments.

उत्तराखंड में निहंग सिखों को लेकर विवाद के बाद पूरे देश में इस समुदाय की चर्चा हो रही है। आखिर निहंग सिख कौन हैं? इन्हें 'गुरु की लाडली फौज' क्यों कहा जाता है? इस वीडियो में जानिए निहंग सिखों का 300 साल पुराना इतिहास, गुरु गोविंद सिंह से उनका संबंध, हेमकुंट साहिब से जुड़ा कनेक्शन और उत्तराखंड में हुए हालिया विवाद की पूरी जानकारी। पूरी रिपोर्ट देखें।

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Transcript
00:06हाथों में तलवारे, सिर पर मीली पगड़ी और उत्राखंड में बढ़ता तनाव
00:12आखिर कौन है ये निहंग सिक जिनके उत्राखंड पहुँचने से पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर आ गया
00:20क्यों इन्हें गुरू की लाडली पौच कहा जाता है
00:23क्या है इनका 300 साल पुराना इतिहास और आखिर क्यों आज देहरदून से लेकर पूरे देश में सर्फ इन ही
00:31की चर्चा हो रही है
00:32आईए जानते हैं उत्राखंड में इन निनों निहंग सिकों को लेकर विवाद लगा अत्तार सुर्खियों में है
00:39कंड प्रियाग में पार्किंग विवाद के बाद कुछ निहंगों की गिरफतारी हुई
00:43इसके बाद रूद्र प्रियाग के नगरासु गुरुद्वारे में कई दिनों तक कतिरोध बना रहा
00:49वही पंजाब से भी बड़ी संख्या में निहंग उत्राखंड की ओर रवाना हो जिसके बाद सुरक्षा एजन्सिया अलर्ट पर आ
00:56गई
00:56ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकर निहंग सिक कौन है
01:01दरसल निहंग सिक सिक दर्म का सबसे पुराना और पारंपरिक युद्धा समुदाय माना जाता है
01:08इन्हें गुरु की राटली फौज और अकाली भी कहा जाता है
01:12अकाली यानि वो जो केवल अकाल पुरुष यानि ईश्वर के अधीन हो
01:17माना जाता है कि साल 1699 में दस्वे सिक गुरु गुरु गोविन सिंग जी ने खालसा पंत की स्थापना के
01:25साथ इस वीर परंपरा को संगठित रूप दिया
01:28उनका उदेश ये ऐसे योध्ध तयार करना था जो धर्म नयाय और कमजोरों की रक्षा के लिए हर समय तयार
01:35रहे
01:36निहंग शद्ध की उत्पत्ती को लेकर अलग-अलग मत है
01:39कुछ इत्यासकार इसे फार्सी भाषा का शब्द मानते हैं जबकि कई विद्वान इसे संस्कृत के निशंक शब्द से जोडते हैं
01:48जिसका अर्थ है निर्भ है यानि एक ऐसा व्यक्ती जिसे किसी भी खत्रे या मृत्यों का भै ना हो
01:54यही निर्भीकता निहंगों की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है
01:58अगर आपने कभी किसी निहंग को देखा हो तो सबसे पहले उनकी नीली पोशाक, उची पगड़ी और हाथों में पारंपरिक
02:07शस्त्र आपकी नजर में आते हैं
02:09उनकी पगड़ी में लोहे के चक्र, कमर, बितलवार और हाथ में भाला सिर्फ उनकी पहचार नहीं बल्कि उनकी परंपरा का
02:17हिस्सा है
02:17वे आज भी घुड सवारी, गतका जैसी पारंपरिक युद्ध कला और शस्त्र संचालन का नियामित अभ्यास करते हैं
02:25इतिहास में निहंगों की भूमिका बेहत एहम रही है
02:29बुगल साशन के दरान जब सिक समुदाय पर लगातार हमले हो रहे थे तब यही युद्धा सबसे आगे खड़े हुए
02:36उन्होंने कई युद्धों में हिस्सा लिया और सिक धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुती तक दी
02:42बाद में महराजा रंजीत सिंग के शाशनकाल में भी निहंगों ने सिक समराज्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
02:50इसी वजह से उन्हें सिक इतिहास के सबसे बहादूर युद्धाओं में गिना जाता है
02:55अब बात उस उत्राखन करेक्षिन की जिसकी वजह से आज निहंग सिक चर्चा में है
03:01चबोली जिले में स्थेथ हिमकुण साहिर सिकों का एक बेहत पवित्र तीर्थ सल है
03:06जहां हर साल लाखो शद्धालू दर्शन के लिए पहुँशते है
03:10हाल ही में कर्ण प्रियाग में पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद हालात बिगड़े
03:15कुछ लोग घायल हुए और पुलिस ने कुछ निहंगों को गिरफतार किया
03:20इसके बाद नगरासु गुरुद्वारे में गतिरोध बना रहा और सुरक्षा विवस्था कड़ी कर दी गई
03:25यही वज़ा है कि धहरादून समेथ पूरे उत्राखंड में ये मामला चर्चा का विश्य बना हुआ है
03:30हाला कि यह समझना भी जरूरी है कि किसी एक विवादिया घटना के अधार पर पूरे निहंग समुदाय का आकलन
03:38नहीं किया जा सकता
03:39आज भी बड़ी संख्या में निहंग धारमिक सेवा, गुरुद्वारों की सुरक्षा, पारंपरिक युद्ध कला और सिख विरासत को जीवित रखने
03:47का काम कर रहे है
03:48फिरहाल उत्राखंड में इस मामले पर नजरे डिगी है
03:52इस पूरे विवाद पर आप क्या राय है
04:09अजरे बड़ी बड़ी आपने रहे है
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