00:06हाथों में तलवारे, सिर पर मीली पगड़ी और उत्राखंड में बढ़ता तनाव
00:12आखिर कौन है ये निहंग सिक जिनके उत्राखंड पहुँचने से पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर आ गया
00:20क्यों इन्हें गुरू की लाडली पौच कहा जाता है
00:23क्या है इनका 300 साल पुराना इतिहास और आखिर क्यों आज देहरदून से लेकर पूरे देश में सर्फ इन ही
00:31की चर्चा हो रही है
00:32आईए जानते हैं उत्राखंड में इन निनों निहंग सिकों को लेकर विवाद लगा अत्तार सुर्खियों में है
00:39कंड प्रियाग में पार्किंग विवाद के बाद कुछ निहंगों की गिरफतारी हुई
00:43इसके बाद रूद्र प्रियाग के नगरासु गुरुद्वारे में कई दिनों तक कतिरोध बना रहा
00:49वही पंजाब से भी बड़ी संख्या में निहंग उत्राखंड की ओर रवाना हो जिसके बाद सुरक्षा एजन्सिया अलर्ट पर आ
00:56गई
00:56ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकर निहंग सिक कौन है
01:01दरसल निहंग सिक सिक दर्म का सबसे पुराना और पारंपरिक युद्धा समुदाय माना जाता है
01:08इन्हें गुरु की राटली फौज और अकाली भी कहा जाता है
01:12अकाली यानि वो जो केवल अकाल पुरुष यानि ईश्वर के अधीन हो
01:17माना जाता है कि साल 1699 में दस्वे सिक गुरु गुरु गोविन सिंग जी ने खालसा पंत की स्थापना के
01:25साथ इस वीर परंपरा को संगठित रूप दिया
01:28उनका उदेश ये ऐसे योध्ध तयार करना था जो धर्म नयाय और कमजोरों की रक्षा के लिए हर समय तयार
01:35रहे
01:36निहंग शद्ध की उत्पत्ती को लेकर अलग-अलग मत है
01:39कुछ इत्यासकार इसे फार्सी भाषा का शब्द मानते हैं जबकि कई विद्वान इसे संस्कृत के निशंक शब्द से जोडते हैं
01:48जिसका अर्थ है निर्भ है यानि एक ऐसा व्यक्ती जिसे किसी भी खत्रे या मृत्यों का भै ना हो
01:54यही निर्भीकता निहंगों की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है
01:58अगर आपने कभी किसी निहंग को देखा हो तो सबसे पहले उनकी नीली पोशाक, उची पगड़ी और हाथों में पारंपरिक
02:07शस्त्र आपकी नजर में आते हैं
02:09उनकी पगड़ी में लोहे के चक्र, कमर, बितलवार और हाथ में भाला सिर्फ उनकी पहचार नहीं बल्कि उनकी परंपरा का
02:17हिस्सा है
02:17वे आज भी घुड सवारी, गतका जैसी पारंपरिक युद्ध कला और शस्त्र संचालन का नियामित अभ्यास करते हैं
02:25इतिहास में निहंगों की भूमिका बेहत एहम रही है
02:29बुगल साशन के दरान जब सिक समुदाय पर लगातार हमले हो रहे थे तब यही युद्धा सबसे आगे खड़े हुए
02:36उन्होंने कई युद्धों में हिस्सा लिया और सिक धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुती तक दी
02:42बाद में महराजा रंजीत सिंग के शाशनकाल में भी निहंगों ने सिक समराज्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
02:50इसी वजह से उन्हें सिक इतिहास के सबसे बहादूर युद्धाओं में गिना जाता है
02:55अब बात उस उत्राखन करेक्षिन की जिसकी वजह से आज निहंग सिक चर्चा में है
03:01चबोली जिले में स्थेथ हिमकुण साहिर सिकों का एक बेहत पवित्र तीर्थ सल है
03:06जहां हर साल लाखो शद्धालू दर्शन के लिए पहुँशते है
03:10हाल ही में कर्ण प्रियाग में पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद हालात बिगड़े
03:15कुछ लोग घायल हुए और पुलिस ने कुछ निहंगों को गिरफतार किया
03:20इसके बाद नगरासु गुरुद्वारे में गतिरोध बना रहा और सुरक्षा विवस्था कड़ी कर दी गई
03:25यही वज़ा है कि धहरादून समेथ पूरे उत्राखंड में ये मामला चर्चा का विश्य बना हुआ है
03:30हाला कि यह समझना भी जरूरी है कि किसी एक विवादिया घटना के अधार पर पूरे निहंग समुदाय का आकलन
03:38नहीं किया जा सकता
03:39आज भी बड़ी संख्या में निहंग धारमिक सेवा, गुरुद्वारों की सुरक्षा, पारंपरिक युद्ध कला और सिख विरासत को जीवित रखने
03:47का काम कर रहे है
03:48फिरहाल उत्राखंड में इस मामले पर नजरे डिगी है
03:52इस पूरे विवाद पर आप क्या राय है
04:09अजरे बड़ी बड़ी आपने रहे है
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