00:00पुराने समय में जो ये शिखाधारी सब छात्र होते थे, शिखा जानते हो, चोटी, चुन्दईश, पीजे होती है, अब उनको
00:08पता है कि बैठे हैं पढ़ने के लिए, तो भीचर से कुछ ना कुछ उपद्रो तो उठे गई, और कुछ
00:13नहीं हो तो नीद आएगी, या तो य
00:29खिचेगा, तो ये उपाय करने पड़ते हैं, सबसे पहले तो अपने भीतर जो चोर और शैतान बैठा है, उससे परिचित
00:36होना पड़ता है, और उसका उपचार करना पड़ता है, उसका उपचार यही होता है, चोटी को बांदो, दिवाल से, भागने
00:43की संभावना नहीं, �
00:44अगर जपकी भी लोग है तो तुरंट आहाँ सीधे नीद खुल जाए गया बैटो पड़ो
00:49अपने उपर बंदिशें लगाना सीखो नहीं चाहते हो कि दुनिया तुम पर शासन करे तो आत्म अनुशासन सीखो
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