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यह वीडियो 16 जून 2026 को आयोजित "वेदांत संहिता" सत्र से लिया गया है।
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00:00500 बार अगर सौरी किसी को बोलना पड़ रहा है तो नियत में खराबी होगी
00:08तो अगर माफी का मौका नहीं मिलता तो कई बार ऐसा भी देखा गया है कि वो हार्डेंट क्रिमिनल बन
00:15जाते हैं या फिर रिपीट ओफेंडर्स बन जाते हैं
00:19हार्डेंट क्रिमिनल आप तब भी बनते हो आपको बार बार माफी मिलती रहे दुर्योधनों कैसे मिली थी
00:24कोई महाभारत ऐसे ही नहीं हो गई उससे पहले ना जाने हो कितने काम कर रहा था माफी मिलती रही
00:28उसको
00:29लाक्षाग्रह से चीरहरण तक क्या दुर्योधन को माफिया नहीं मिल रही थी
00:33माफिया मिलती रही तो महाभारत खड़ी कर दी उसने अंत में
00:37तो हाड़न क्रिमिनल कुछ ऐसा नहीं है कि आपको जेल में डाला जाएगा
00:55बात यह नहीं कि क्रिमिनल को हाड़न क्रिमिनल बनने से कैसे रूखे बात यह कि क्रिमिनल क्रिमिनल रहे ही ना
01:00इसका क्या रास्ता है इसका रास्ता है कि क्राइम से ज्यादा वो जो भीतर बैठा है जो क्राइम को सही
01:08मानता है
01:09उसको संबोधित करो, जिसको आप क्राइम कहते हो, वो भीतरी डार्कनेस का एक लक्षन है, एक सिम्टम, एक मैनिफेस्टेशन है
01:16वो, और क्या कहती हो भीतरी डार्कनेस, वो वही कहती है, जो हम सब के भीतर कहती है, अपने स्वार्थ
01:22के लिए किसी का नुक्सान करना पड़े
01:24तो करूँगा जिंदगी मिली है मौज मारने को खुश रहने भाई कुछ भी जस्त काम में खुशी मिलती है भाई
01:32वो काम करो ना भाई
01:33अरे उस भी खुशी मिलती है उसने कर दिया नहीं नहीं मतलब ऐसा काम करो जिसमें तुम्हें खुशी मिले किसे
01:40नुकसान ना हो
01:41पोख और बीफ खा रहे हैं, अब मैं तो कुछ नहीं कर रहा है, नुक्सान नहीं कर रहा है, अपना
01:44खाने ही तु खा रहा हूँ, खाना खाने हूँ, जो तुम खा रहे हो ना, वो किसी की जान लेगा
01:49है, फिलासफी तो सब की एक ही है, मज्जा मारने का, लाइफ किस वास्ते म
02:09कि अधिवस्ट इसजित पर टॉप पर टॉप इवस्ट लॉग्ट इगो अधि इच्स अधिवस्ट अग्दा क्रिमूल
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