00:00जूजती हुई लड़की भले वो होकी का मैदान हो कि क्रिकेट की पिछ हो या एथलेटिक्स हो उन्हीं पसंद आएगी
00:06ज्यादा तर लोगों को क्योंकि अगर वो क्रिकेट में या बैडमिंटन में जूज सकती है तो फिर वो समाज से
00:13भी जूज सकती है उसने जूजना सीख �
00:15इसलिए आप देखोगे कि परंपरा से हमने जहां कहीं भी चित्रन करा है या वर्णन करा है चाहे लिखा हो
00:22और चाहे चित्र बनाया हो एक आधर्श लड़की का या महिला का या मा का तो उसमें वो हमेशा कुमलांगिनी
00:30है उसका वर्णन ही ऐसे होगा कि मुलायम मुलायम है
00:33अगर उसके हाथ कहीं दिखाये जा रहे हैं बाहें तो आपको उसमें ऐसा नहीं होगा कि मजबूत मास्पेशियां दिख जाएं
00:39या बाइसेफ्स दिख जाएं नहीं होगा
00:40सब में यही कहा जाएगा कि ऐसी उसकी नाजुक उंगलियां हैं और नाजुक कलाईयां हैं
00:46और कई बार तो उसके कमजोर होने को ही उसके सौंदर का प्रतीक बना दिया जाता है
00:52केते चुई मुई हैं और अगर आप महिला हैं तो संभावना यह है कि आपको स्थितियां तो प्रतिकूल मिलेंगी
00:58पुरुषों के लिए जरूरी है कि वो जूजना सीखें पर अगर आपके घर में लड़की है तो उसके लिए तो
01:04दूना जरूरी है कि आप उसको जूजना सिखाएं
01:06लड़की को तो जुजारू होना ही पड़ेगा
01:08क्योंकि उसका जो climate है
01:10उसको जो महौल मिलता है
01:12वो तो by definition adverse होना ही है
01:14लड़की को तो फिर भी favorable climate मिल सकता है
01:17किसी भी institution में या समाज में या कहीं भी
01:19पर लड़की के लिए तो बहुत बहुत ज्यादा समभावना है
01:22कि वो जहां भी जाएगी उसको महौल प्रतिकूल ही मिलेगा
01:25adverse ही मिलेगा
01:26तो आपके घर में अगर बेटियां है या बहने है
01:28या कोई भी महिला आपके घर में
01:30उनको जूजना सिखाईए
01:31उसको सर जुकाना मत सिखाओ
01:33सर तो उसका शताब्दियों से जुकाई हुआ है
01:35उसको सर उठाना सिखाओ
Comments