00:00कहानी की शिरुवात राबिया से होती है, जिसे सर्बुलंद अपने घर में पनाह देता है। बानो उसकी देख भल करती
00:07है और उसे नए कपड़े भी देती है। लेकिन घर की कुछ महिलाएं राबिया की मौजूदगी को पसंद नहीं करती।
00:13और बानो को चीतावनी देती हैं
00:15कि कहीं ये खुबसूरत लड़की उसके रिष्टे पर असर न डाल दे। दूसरी तरफ सर्बुलंद और उसके परिवार के लोग
00:22राबिया की प्रती हमदर्दी दिखाते हैं और उसकी सेहत का ध्यान रखते हैं। तुरसम खान और उसके लोग राबिया की
00:29तलाश में हैं।
00:30वहीं हवेली में सर्बुलंद के इस फैसले पर चर्चा होती है कि उसने एक जवान औरत को घर में क्यों
00:36रखा है। बानो अपने मंगीतर सर्बुलंद पर पूरा भरोसा जताती है और कहती है कि अगर उसने कोई फैसला लिया
00:43है तो उसके पीछे कोई न कोई वज़ा जरूर
00:45होगी। घर के लोग अपने पुराने दुखों और रिष्टों को याद करते हैं। राबिया अपने पती मुदस्र की मौत के
00:52गम से उबर नहीं पाई है। बानो उसे समझाने की कोशिश करती है और उसका होसला बढ़ाती है। सर्बुलंद भी
00:59उसे दिलासा देता है और कहत
01:01है कि उसे हिम्मत से काम लेना होगा। राबिया के जन्दिन जैसी खुशियों और उसके दुखों के बीच भावनात्मक माहौल
01:08दिखाया जाता है। एक हाथसे में गर्म चाय राबिया के हाथ पर गिर जाती है। लेकिन वो कहती है कि
01:15उसकी दिल का दर्थ इससे कहीं ज्या�
01:30हो रही है। दूसरी ओर तुरसम खान अपने आदमियों से पूछताच करता है और उन्हें जूट बोलने पर धमकाता है।
01:37इससे पता चलता है कि आगे संघर्ष और खत्रा बढ़ने वाला है। बानो राबिया को हवेली घुमाने ले जाती है
01:44और परिवार के बाकी सदस्यो
01:46से मिलवाती है। लेकिन नूर भावी और सुराब लाला राबिया को शक की नजर से देखते हैं। वे मानते हैं
01:52कि उसकी मौझूदगी से सर बुलंद और बानो के रिष्टे में परिशानी आ सकती है। राबिया इन बातों से परिशान
01:59हो जाती है। आखिर में राबिया सर �
02:02सर बुलंद से कहती है कि वो हवेली छोड़कर अपने मामू और भाई के पास जाना चाहती है। लेकिन सर
02:07बुलंद उसे समझाता है कि उसके दुश्मन अभी भी उसकी तलाश में हैं और बाहर जाना उसके लिए बहुत खतरनाक
02:14हो सकता है। वो उसे यकीन दिलाता है कि हवे
02:17मेली में ही उसकी जान सबसे ज्यादा महफूज है इस तरह एपिसोड सस्पेंस और भावनात्मक मोड पर खत्म होता है