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  • 4 hours ago
अग्निकांड में जिन 15 परिवारों के बुझे चिराग उन्हें इंसाफ मिल पाएगा? देखें विशेष

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00:00मस्कार स्वागत आप काप देख रहे हैं विशेश आपके साथ मैंने यहावातम लखनाओं के अगनी कांड में इन सवालों की
00:06जाश दौब होती ही रहेगी कि क्या ये इमारत अवेद रूप से बनी थी फायर रूसी वी था या फिर
00:12नहीं था या जितना लोट सैंक्शन था उ
00:28इसने अपने बेटे के विडियो कॉल करके ये कहा कि अब वो बच नहीं पाएगा और फिर खर पर बेटे
00:36की लाश आई ऐसी एक नहीं ऐसी 15 घर की कहानिया है पूरी रिपोर्ट देखिए
01:02लखनव में ध्रश्टाचार की आग में मरने वाले 15 लोगों की यही कहानी किसी का बेटा गया किसी की बेटी
01:10गई किसी का भाई किसी की बेहन इन 15 परिवारों की दुख दुनिया ही उजड़ दे
01:28सोचिये उस मा पर क्या बीती होगी जिसके सामने उसका बच्चा अंदर आग में फसा हुआ था और वो कुछ
01:34नहीं कर बाए
01:38सोचिए उस पिता पर क्या भीती हुगी जिसे आग में फसे उसके बच्चे ने फोन किया कि पापा मुझे बचा
01:45लो
01:49क्या गलती थी इन बच्चों की कोई पढ़ता था कोई पढ़ाता था आँखों में सपने लिए एनिमेशन सीख रहे थे
01:57उन्हें क्या पता था कि ध्रश्टचार की इंटो और रिश्वत खोरी के सीमेंट और रेट से बनी ये इमारत एक
02:03दिन उनकी जान ले ले गी बौत भी ऐ
02:15ऐसा होगा जो ये दिन देखना चाहता है लेकिन लखनों के निलेश के अभागे माता पिता को ये देखना पड़
02:21रहा है
02:22सामने बेटे की लाश पड़ी है बगल में अर्थी तैयार की जा रही है मा तो संभाले नहीं संभल रही
02:36पिता सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन हिंदुस्तान में एक आम आदमी कर भी क्या सकता है
02:44कि इस सरकार को दिम्यदार मानते हैं और किसको मानने में हम तो क्यों इसकी कोई देख भाल या इस
02:54तरीके एक गोस्था नहीं होती है
02:56जो कि बिल्डिंगों की चेक चेक अप कराये जाए या साठ सर्कृट नहों देख देख सविधा असविधा की बात है
03:05कोई एक्जिट नहीं था होता तो बच्चे निकल सकते थे आदित देख
03:09मौके कोई था ही नहीं बंध था सब
03:15अब जिस साब दिखाया गया तो साब से बंध है सब बाहर के आदमी खड़े क्या करा है
03:19कुछ करी नहीं सकते से
03:2327 साल का निलेश लख्णों का ही रहने वाला था
03:26बच्पन से आर्टिस्ट था, हुनरमन था, अच्छे स्कच बनाता था
03:30वो तो एनिमेशन सीख गया, इस्टिट्यूट में पढ़ाता था
03:33परिवार लोर मिडल क्लास है
03:35जिस कम्प्यूटर पर बैठ कर निलेश एनिमेशन बराता था
03:38वहाँ भाई बिला, लेकिन भाई हमसे बात ही नहीं कर पाया
03:42बैठ के कभी यो गेम केला करता है
03:44हम लोग बात चीत किया गरते
03:46रात के दो तो तेन तिन वज़े तक
03:47साथ में समय बिताते थे
03:49यहाँ गर्मी लगती तो दोनों भाई ने मिलके एसी वह लगाया
03:52तो इसी तरह हम लोग यहाँ सारा समय लोग यहीं बिताते थे
03:56चुट्टी का दिन भी पूरा यहीं बीता था हमारा उसके साथ
03:59शेक हम समा सकते हैं बहुत आप
04:01आपके लिए बहुती दर्द बड़ा शाण है
04:10निलेश की क्या गलती थी
04:12रोजाना की तरह अपने ऑफिस गए थे
04:15भरा पूरा परिवार था
04:16माता पिता भाई भावी भतीजे सब कुछ तो था
04:20अभी भी है बस निलेश नहीं है
04:23निलेश की भावी बहुत आक्रोशित दिखाई
05:05हाथसे में परिवार ने निलेश को ही नहीं खोया है
05:07बलकि अपनी होने वाली बहु को भी खोया है
05:12निलेश और अनामी का सामन एक साथ काम करते थे
05:15पिछले हफ़ते ही दोनों की शादी की बात घरवालों ने तैकी थी
05:19बस अब तारीख निकलनी बाकी थी
05:21और कल खबर आई कि हाथसे में दोनों की ही मौत ही
05:29एक पिछले हफ़ते बात चीत हुई थी हमारी
05:34सब कंफर्म हो गया थे
05:35सब पूरी बात कंफर्म हो गया थी कि हाँ बस सादी कब करनी ये बाते हो रही थी
05:40ये सब डिसाइट करना था कि कब करनी है
05:42बाकी सारी बात तय हो गई थी
05:47ऐसी एक नहीं कई कहानिया है
05:49यह लखनों का पोस्टमॉटम हाउस है
05:51जहां कल राद उन शबों को भिजवाया गया
05:54जिनकी इस हाथसे में मौत हो गई
05:56लगातार परिवार आते जा रहे थे
05:58रोते बिलखते जिने विश्वासी नहीं हो रहा था
06:01कि जिन अपनों को उन्होंने सुबह घर से विदा किया है
06:04वो उन्हें पोस्टमॉटम हाउस में आखरी बार मिल रहे हैं
06:09हम इस वक्त मर्चरी के बाहार है यानि कि पोस्टमॉटम हाउस
06:12यहां वो परिवार आते हैं जिन्होंने अपने को खो दिया होता है रैसी तस्वीर आपको में एक मा की दिखाएंगे
06:17जिसने अपने बेटे को खो दिया है आपके बल तस्वीरे देखें और ये दर्द देखें और समझें कि सिस्टम की
06:24लापरवाही के चलते एक मा आज बिलख
06:45एसी ही एक कहानी आदित्य श्रिवास्तव की भी है
06:51आदित्य की मा को जैसे ही पता चला कि आग लगी है वो तुरन घटना स्थल पर पहुँच गई
06:57उनके साथ छोटा बेटा था
06:58कल हमारे समवादाता समत श्रिवास्तव को
07:01रिपोर्टिंग के दौरान आदित की मा यही पर मिली थी
07:27सोचिए मा बहर से देख रही है बेबस मजबूर उसे पता है
07:32कि बेटा अंदर इस भीशन आग में फसा है
07:35शायद वो अंजाम भी जान रही थी लेकिन वो कुछ नहीं कर पाई
07:39सिर्फ और सिर्फ इस मर चुके सिस्टम के सामने अपने बेटे की मौत देखती रही
07:51अपने बेटे के आफिस पहुंची तो देखा की आफिस के बाहर लपते वहां सब लपते वहां सब बुजाने जाने को
07:59चला
07:59तक हम घर पड़ थे तो मंजले वारे बेटे पास भून भाय भी या तो वो करने लगा हाई अरे
08:08का हुआ हाई तो हमने कहा क्या हुआ क्या हुआ क्या तो वो कहें कि हुआ कि आदित वहां आग
08:16लग गई बिलिंग में उनके हां कोशिंग वाले और उसमें जो आ है
08:21तो वो वो उसी के अंदर पसा हुआ तब चोटे बेटे के हमने आवाद दी आगा है कि भी या
08:29निकलो जल्दी वागए तो उसके बाद निकले है यह सबसे बड़ी दरदरा घटना होई कि मां के सामने बेटा अंदर
08:39तब मां अधित्य की उस वक्त जहां पर वो पूरा संस्�
08:47वहां मतलब बाहर मौजूद हैं और सामने उनका जहां पर वो ओफिस बनाए वो धलक रहा है जोती भी इस
09:04हादसे का शिकार हुई है
09:07जोती सुभए इसी स्कूटी से कोचिंग सेंटर पहुँची थी लेकिन हादसे में जोती की मौत हो गई जोती के भाई
09:14सक्यम आज सुभए उसकी स्कूटी लेने के लिए आये थे
09:18ऐसा चलता रहेगा मेरे को कोई उमीद नहीं है कच्चा है जो गवर्मेंट आजाए लोग ही ऐसे हैं वैसे देखे
09:24सपास हो जाता है अब वो ऐसे होता रहेगा तो इसमें मुझे उमीद नहीं है
09:28दम गुटने से मौत हुई है यहां बताए किया है
09:30मेरा लाज से और किसी का सबका फायदा है
09:33हुए जोती के आँखों में आसूली है उनकी स्कूटी है इसी स्कूटी से सोचिए वो लड़की इसी स्कूटी से आई
09:46थी और इसी स्कूटी
09:50से आ तो गई लेकिन अब ये स्कूटी यहीं खड़ी रहेगी यहां के भाई ले जाएंगे
09:55किसी को उमीद नहीं थी घर पर कि जैसे स्कूटी से वो यहां आएगी वो स्कूटी को वापस कभी नहीं
10:01ला पाएगी
10:02जोती जैसे तमाम चिराग अब बुच चुके हैं
10:05इन परिवारों में कुछ बचा है तो बस खामोशी और इमारत में के वलसन नाटा
10:12लखनव अगनिकांड में जान गवाने वाले अब्दुल रह्मान अपने परिवार के एकलोते सहारा थे
10:18दिव्यांग पिता और वेहन की जिम्मेदारी पिछले कई वर्षों से उनके कंधों पर थी
10:23एनिमेशन का कोर्स करने के बाद उन्हें उसी संस्थान में नौकरी मिली थी
10:27जहां वो पिछले चार साल से काम कर रहे थी
10:30यह तीन बजे जब आग लगी है तब तो हमने खुझी सोसल साइट पर डाला था तुब तक हमें नहीं
10:36पता था
10:36अभी आड़ बजे पता चला कि हमारा बदीजा रह्मान भी इसाक का शिकार हो गया
10:42तो घर में कैसे दी है उनके घर में पिता जी विगलांग है तुमा टीचरिंग करती थी बच्चा अभी दोई
10:48ती महीने वह जॉब करता था काम भी करता था वहीं पढ़ाई भी करता था अब परिवार की कैसे प्रदाई
10:56है और क्या चाहते हैं आपको कि इस पुरुद अपन
11:10प्रदावाँ करता थार की तो आपको करता है ह।एगर प्रदाई हैं गाल
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