00:05अगर वो आज को कह दें कि हम स्पोर्ट छोड़ रहे हैं, शादी करने जा रहे हैं, पूरा देश खुशी
00:10मनाएगा, फिर इसलिए हमारे एथलीट्स कुछ जीत भी लेते हैं, तो दुबारा नहीं जीत पाते हैं, हमारा समाद खा जाता
00:17है उनको, कैसे लाएं हम मेडल्स, हम ही
00:22इसलायक हैं, कि 140 करोड होके भी हमें एक भी गोल्ड ना मिले, खिलाडियों की गलती नहीं है, खिलाडी इसी
00:28मिट्टी से उठता है, इसी देश से, इसी समाज से, इसी मूले विवस्था से, हमारी ही माननेताओं से तो खिलाडी
00:34खड़ा होता है ना, हमारी माननेता ही इतनी स
00:47सबसे ज्यादा महत्तोबस इसी को देती है खाओ पचाओ भोगो बच्चे पैदा करो अपने छोटे से पिंजड़े में पड़े रहो
00:56और मर जावा नया करना है जूजना है इसको हमारे कल्चर में इज़त कहा मिलती है
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